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नया मलयालम टीवी चैनल

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आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

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निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर   ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के मेडिकल विंग के स्थानीय सेवाकेंद्र “प्रभु उपहार भवन, माधवगंज लश्कर ग्वालियर” द्वारा निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर का आयोजन किया गया।शिविर में परामर्श देनें के लिए डॉ. निर्मला कंचन (स्त्री रोग विशेषज्ञ), एवं…

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युवा शिविर का सफल आयोजन.

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13-04-2021 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


"मीठे बच्चे - बाप जो है, जैसा है, तुम बच्चों में भी नम्बरवार पहचानते हैं, अगर सब पहचान लें तो बहुत भीड़ मच जाये''

प्रश्नः-

चारों ओर प्रत्यक्षता का आवाज कब फैलेगा?

उत्तर:-

जब मनुष्यों को पता पड़ेगा कि स्वयं भगवान इस पुरानी दुनिया का विनाश कराके नई दुनिया स्थापन करने आये हैं। 2- हम सबकी सद्गति करने वाला बाप हमें भक्ति का फल देने आया है। यह निश्चय हो तो प्रत्यक्षता हो जाए। चारों ओर हलचल मच जाए।

गीत:-

जो पिया के साथ है....

ओम् शान्ति। बच्चों ने गीत की दो लाइन सुनी। जो पिया के साथ है, अब पिया कौन है! यह दुनिया नहीं जानती। भल ढेर बच्चे हैं, उनमें भी बहुत हैं जो नहीं जानते हैं कि किस प्रकार से बाप को याद करना चाहिए। वह याद करने नहीं आता। घड़ी-घड़ी भूल जाते हैं। बाप समझाते हैं बच्चे अपने को आत्मा समझो, हम बिन्दी हैं। बाप, ज्ञान का सागर है, उनको ही याद करना है। याद करने की ऐसी प्रैक्टिस पड़ जाए जो निरन्तर याद ठहर जाये। पिछाड़ी में यही याद रहे कि हम आत्मा हैं, शरीर तो है परन्तु यह ज्ञान बुद्धि में रखना है कि हम आत्मा हैं। बाप का डायरेक्शन मिला हुआ है मैं जो हूँ, उस रूप में कोई विरला याद करते हैं। देह-अभिमान में बच्चे बहुत आ जाते हैं। बाप ने समझाया है, कोई को भी जब तक बाप का परिचय नहीं दिया है तब तक कुछ भी समझ नहीं सकेंगे। पहले तो उन्हों को यह मालूम पड़े कि वह निराकार हमारा बाप, गीता का भगवान है, वही सर्व का सद्गति दाता है। वह इस समय सद्गति करने का पार्ट बजा रहे हैं। इस प्वाइंट में निश्चयबुद्धि हो जाएं तो फिर जो भी इतने साधू-सन्त आदि हैं सब एक सेकण्ड में आ जायें। भारत में बड़ा हंगामा मच जाये। अभी मालूम पड़ जाये कि यह दुनिया विनाश होने वाली है। इस बात का निश्चय हो जाए तो बम्बई से लेकर आबू तक क्यू लग जाये। लेकिन इतना जल्दी कोई को निश्चय नहीं हो सकता। तुम जानते हो विनाश होना है, यह सब घोर निद्रा में सोये ही रहने हैं। फिर अन्त समय तुम्हारा प्रभाव निकलेगा। मासी का घर नहीं है जो इस बात में निश्चय हो जाए कि गीता का भगवान परमपिता पर-मात्मा शिव है। यह प्रसिद्ध हो जाए तो सारे भारत में आवाज हो जाये। अभी तो तुम एक को समझायेंगे तो दूसरा कहेगा तुमको जादू लग गया है। यह झाड़ बहुत धीरे-धीरे बढ़ना है। अभी थोड़ा टाइम है फिर भी पुरूषार्थ करने में हर्जा नहीं है। तुम बड़े-बड़े लोगों को समझाते हो, परन्तु वे कुछ भी समझते थोड़ेही हैं। बच्चों में भी कई इस नॉलेज को समझते नहीं हैं। बाप की याद नहीं तो वह अवस्था नहीं। बाप जानते हैं निश्चय किसको कहा जाता है। अभी तो कोई 1-2 परसेन्ट भी मुश्किल बाप को याद करते हैं। भल यहाँ बैठे हैं, बाप के साथ वह लव नहीं रहता। इसमें लव चाहिए, तकदीर चाहिए। बाप से लव हो तो समझें, हमको कदम-कदम श्रीमत पर चलना है। हम विश्व के मालिक बनते हैं। आधाकल्प का देह-अभिमान बैठा हुआ है सो अब देही-अभिमानी बनने में बड़ी मेहनत लगती है। अपने को आत्मा समझ मोस्ट बिलवेड बाप को याद करना मासी का घर नहीं है। उनके चेहरे में ही रौनक आ जाए। कन्या शादी करती है, जेवर आदि पहनती है तो चेहरे में एकदम खुशी आ जाती है। परन्तु यहाँ तो साजन को याद ही नहीं करते तो वह शक्ल मुरझाई हुई रहती है। बात मत पूछो। कन्या शादी करती है तो चेहरा खुशनुम: हो जाता है। कोई की तो शादी के बाद भी शक्ल मुर्दे जैसी रहती है। किसम-किसम के होते हैं। कोई तो दूसरे घर में जाकर मूँझ पड़ती हैं। तो यहाँ भी ऐसे है। बाप को याद करने की मेहनत है। यह गायन अन्त का है कि अतीन्द्रिय सुख गोपी वल्लभ के गोप-गोपियों से पूछो। अपने को गोप-गोपी समझना और निरन्तर बाप को याद करना, वह अवस्था होनी है। बाप का परिचय सबको देना है। बाप आया हुआ है वो वर्सा दे रहे हैं। इसमें सारी नॉलेज आ जाती है। लक्ष्मी-नारायण ने जब 84 जन्म पूरे किये तब बाप ने अन्त में आकर उन्हों को राजयोग सिखाकर राजाई दी। लक्ष्मी-नारायण का यह चित्र है नम्बरवन। तुम जानते हो उन्होंने आगे जन्म में ऐसे कर्म किये हैं, वह कर्म अब बाप सिखला रहे हैं। कहते हैं मनमनाभव, पवित्र रहो। कोई भी पाप मत करो क्योंकि तुम अभी स्वर्ग के मालिक, पुण्य आत्मा बनते हो। आधाकल्प माया रावण पाप कराती आई है। अब अपने से पूछना है - हमसे कोई पाप तो नहीं होता है? पुण्य का काम करते रहते हैं? अन्धों की लाठी बने हैं? बाप कहते हैं मनमना-भव। यह भी पूछना होता है कि मनमनाभव किसने कहा? वह कहेंगे कृष्ण ने कहा। तुम मानते हो परमपिता परमात्मा शिव ने कहा। रात-दिन का फर्क है। शिव जयन्ती के साथ है गीता जयन्ती। गीता जयन्ती के साथ कृष्ण जयन्ती।

तुम जानते हो हम भविष्य में प्रिन्स बनेंगे। बेगर टू प्रिन्स बनना है। यह एम-आब्जेक्ट ही राजयोग की है। तुम सिद्ध कर बताओ कि गीता का भगवान श्रीकृष्ण नहीं था, वह तो निराकार था। तो सर्वव्यापी का ज्ञान उड़ जाए। सर्व का सद्गति दाता, पतित-पावन बाप है। कहते भी हैं कि वह लिबरेटर है, फिर सर्वव्यापी कह देते। जो कुछ बोलते हैं, समझते नहीं हैं। धर्म के बारे में जो आता है, बोल देते हैं। मुख्य धर्म हैं तीन। देवी देवता धर्म तो आधाकल्प चलता है। तुम जानते हो बाप ब्राह्मण, देवता, क्षत्रिय धर्म स्थापन करते हैं। यह दुनिया नहीं जानती। वह तो सतयुग को ही लाखों वर्ष कह देते हैं। आदि सनातन देवी देवता धर्म है सबसे ऊंचा, परन्तु यह अपने धर्म को भूल इरिलीजियस बन पड़े हैं। क्रिश्चियन लोग अपने धर्म को नहीं छोड़ते। वह जानते हैं - क्राइस्ट ने हमारा धर्म स्थापन किया था। इस्लामी, बौद्धी, फिर क्रिश्चियन, यह हैं मुख्य धर्म। बाकी तो छोटे-छोटे बहुत हैं। कहाँ से वृद्धि हुई? यह कोई नहीं जानता। मुहम्मद को अभी थोड़ा समय हुआ है, इस्लामी पुराने हैं। क्रिश्चियन भी मशहूर हैं। बाकी तो कितने ढेर हैं। सबका अपना-अपना धर्म है। अपना भिन्न-भिन्न धर्म, भिन्न-भिन्न नाम हैं तो मूँझ गये हैं। यह नहीं जानते कि मुख्य धर्मशास्त्र ही 4 हैं। इसमें डिटीज्म, ब्राह्मणिज्म भी आ जाते हैं। ब्राह्मण सो देवता, देवता सो क्षत्रिय, यह किसको पता नहीं। गाते हैं ब्राह्मण देवताए नम:। परमपिता ने ब्राह्मण, देवता, क्षत्रिय धर्म की स्थापना की, अक्षर हैं परन्तु पढ़ते ऐसे हैं जैसे तोते।

यह है कांटों का जंगल। भारत गॉर्डन ऑफ फ्लॉवर था, यह भी मानते हैं। परन्तु वह कब, कैसे, किसने बनाया, परमात्मा क्या चीज़ है, यह कोई नहीं जानते। तो आरफन हो गये ना इसलिए यह लड़ाई-झगड़े आदि हैं। सिर्फ भक्ति में खुश होते रहते हैं। अब बाप आये हैं सोझरा करने, सेकेण्ड में जीवनमुक्त बना देते हैं। ज्ञान अंजन सतगुरू दिया, अज्ञान अन्धेर विनाश। अभी तुम जानते हो हम सोझरे में हैं। बाप ने तीसरा नेत्र दिया है। भल देवताओं को तीसरा नेत्र दिखाते हैं परन्तु अर्थ नहीं जानते। वास्तव में तीसरा नेत्र तुमको है। उन्होंने फिर दे दिया है देवताओं को। गीता में ब्राह्मणों की कोई बात नहीं। उसमें तो फिर कौरव, पाण्डवों आदि की लड़ाई, घोड़े-गाड़ी आदि लिख दी है, कुछ भी समझते नहीं। तुम समझायेंगे तो कहेंगे तुम शास्त्रों आदि को नहीं मानते। तुम कह सकते हो हम शास्त्रों को मानते क्यों नहीं हैं, जानते हैं - यह सब भक्ति मार्ग की सामग्री है। गाया हुआ है ज्ञान और भक्ति। जब रावण राज्य होता है तब भक्ति शुरू होती है। भारतवासी वाम मार्ग में जाकर धर्म भ्रष्ट और कर्म भ्रष्ट बन जाते हैं इसलिए अब हिन्दू कहला दिया है। पतित बन गये हैं। पतित किसने बनाया? रावण ने। रावण को जलाते भी हैं, समझते हैं यह परम्परा से चला आता है। परन्तु सतयुग में तो रावण राज्य ही नहीं था। कुछ भी समझते नहीं। माया बिल्कुल ही पत्थरबुद्धि बना देती है। पत्थर से पारस बाप ही बनाते हैं। जब आइरन एज में आये तब तो आकर गोल्डन एज स्थापन करें। बाप समझाते हैं फिर भी बड़ा मुश्किल किसकी बुद्धि में बैठता है।

तुम कुमारियों की अब सगाई होती है। तुमको पटरानी बनाते हैं। तुमको भगाया अर्थात् तुम आत्माओं को कहते हैं - तुम मेरे थे फिर तुम मुझे भूल गये हो। देह-अभिमानी बन माया के बन गये हो। बाकी भगाने आदि की तो बात नहीं है। मामेकम् याद करो। याद की ही मेहनत है। बहुत देह-अभिमान में आकर विकर्म करते हैं। बाप जानते हैं यह आत्मा मुझे याद ही नहीं करती है। देह-अभिमान में आकर बहुत पाप करते हैं तो पाप का घड़ा सौगुणा भर जाता है। औरों को रास्ता बताने के बदले खुद ही भूल जाते हैं। और ही जास्ती दुर्गति को पा लेते हैं। बड़ी ऊंची मंजिल है। चढ़े तो चाखे वैकुण्ठ रस, गिरे तो चकनाचूर। यह राजाई स्थापन हो रही है। इसमें फ़र्क देखो कितना पड़ जाता है। कोई तो पढ़कर आसमान में चढ़ जाते हैं, कोई पट में पड़ जाते हैं। बुद्धि डल होती है तो पढ़ नहीं सकते हैं। कोई-कोई कहते हैं बाबा हम किसको समझा नहीं सकते हैं। कहता हूँ अच्छा सिर्फ अपने को आत्मा समझो, मुझ बाप को याद करो तो मैं तुमको सुख दूँगा। परन्तु याद ही नहीं करते हैं। याद करें तो औरों को याद दिलाते रहें। बाप को याद करें तो पाप नष्ट हो जायें। उनकी याद बिगर तुम सुखधाम में जा नहीं सकते हो। 21 जन्मों का वर्सा निराकार बाप से मिल सकता है। बाकी तो सब अल्पकाल का सुख देने वाले हैं। कोई को रिद्धि-सिद्धि से बच्चा मिल गया वा आशीर्वाद से लॉटरी मिल गई तो बस विश्वास बैठ जाता है। कोई को 2-4 करोड़ फायदा हो जायेगा बस बहुत महिमा करेंगे। परन्तु वह तो है अल्पकाल के लिए। 21 जन्मों के लिए हेल्थ वेल्थ तो मिल नहीं सकती ना। परन्तु मनुष्य नहीं जानते हैं। दोष भी नहीं दे सकते हैं। अल्पकाल के सुख में ही खुश हो जाते हैं।

बाप तुम बच्चों को राजयोग सिखलाकर स्वर्ग की बादशाही देते हैं। कितना सहज है। कोई तो बिल्कुल समझा नहीं सकते। कोई समझते भी हैं परन्तु योग पूरा न होने के कारण कोई को तीर नहीं लगता है। देह-अभिमान में आने से कुछ न कुछ पाप होते रहते हैं। योग ही मुख्य है। तुम योगबल से विश्व के मालिक बनते हो। प्राचीन योग भगवान ने सिखाया था, न कि श्रीकृष्ण ने। याद की यात्रा बड़ी अच्छी है। तुम ड्रामा देखकर आओ तो बुद्धि में सारा सामने आ जायेगा। कोई को बताने में टाइम लगेगा। यह भी ऐसे है। बीज और झाड़। यह चक्र बड़ा क्लीयर है। शान्तिधाम, सुखधाम, दु:खधाम....सेकण्ड का काम है ना। परन्तु याद भी रहे ना। मुख्य बात है बाप का परिचय। बाप कहते हैं - मेरे को याद करने से तुम सब कुछ जान जायेंगे। अच्छा।

शिवबाबा तुम बच्चों को याद करते हैं, ब्रह्मा बाबा याद नहीं करते हैं। शिवबाबा जानते हैं हमारे सपूत बच्चे कौन-कौन हैं। सर्विसएबुल सपूत बच्चों को तो याद करते हैं। यह थोड़ेही किसको याद करेंगे। इनकी आत्मा को तो डायरेक्शन है मामेकम् याद करो। अच्छा।

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) तकदीरवान बनने के लिए एक बाप से सच्चा-सच्चा लव रखना है। लव रखना माना कदम-कदम एक की ही श्रीमत पर चलते रहना।

2) रोज़ पुण्य का काम अवश्य करना है। सबसे बड़ा पुण्य है सबको बाप का परिचय देना। बाप को याद करना और सबको बाप की याद दिलाना।

वरदान:-

स्थूल कार्य करते भी मन्सा द्वारा विश्व परिवर्तन की सेवा करने वाली जिम्मेवार आत्मा भव

कोई भी स्थूल कार्य करते सदा यह स्मृति रहे कि मैं विश्व की स्टेज पर विश्व कल्याण की सेवा अर्थ निमित्त हूँ। मुझे अपनी श्रेष्ठ मन्सा द्वारा विश्व परिवर्तन के कार्य की बहुत बड़ी जिम्मेवारी मिली हुई है। इस स्मृति से अलबेलापन समाप्त हो जायेगा और समय भी व्यर्थ जाने से बच जायेगा। एक-एक सेकण्ड अमूल्य समझते हुए विश्व कल्याण के वा जड़-चैतन्य को परिवर्तन करने के कार्य में सफल करते रहेंगे।

स्लोगन:-

अभी योद्धा बनने के बजाए निरन्तर योगी बनो।

 


 

बोध कथा-

विचार की पवित्रता

एक राजा और नगर सेठ में गहरी मित्रता थी। वे रोज एक दूसरे से मिले बिना नहीं रह पाते थे। नगर सेठ चंदन की लकड़ी का व्यापार करता था। एक दिन उसके मुनीम ने बताया कि लकड़ी की बिक्री कम हो गई है। तत्काल सेठ के मन में यह विचार कौंधा कि अगर राजा की मृत्यु हो जाए, तो मंत्रिगण चंदन की लकडि़यां उसी से खरीदेंगे। उसे कुछ तो मुनाफा होगा। शाम को सेठ हमेशा की तरह राजा से मिलने गया। उसे देख राजा ने सोचा कि इस नगर सेठ ने उससे दोस्ती करके न जाने कितनी दौलत जमा कर ली है, ऐसा कोई नियम बनाना होगा जिससे इसका सारा धन राज खजाने में जमा हो जाए।
दोनों इसी तरह मिलते रहे, लेकिन पहले वाली गर्मजोशी नहीं रही। एक दिन नगर सेठ ने पूछ ही लिया, ‘पिछले कुछ दिनों से हमारे रिश्तों में एक ठंडापन आ गया है। ऐसा क्यों?’ राजा ने कहा, ‘मुझे भी ऐसा लग रहा है। चलो, नगर के बाहर जो महात्मा रहते हैं, उनसे इसका हल पूछा जाए।’ उन्होंने महात्मा को सब कुछ बताया। महात्मा ने कहा, ‘सीधी सी बात है। आप दोनों पहले शुद्ध भाव से मिलते रहे होंगे, पर अब संभवत: एक दूसरे के प्रति आप लोगों के मन में कुछ बुरे विचार आ गए हैं इसलिए मित्रता में पहले जैसा सुख नहीं रह गया।’ नगर सेठ और राजा ने अपने-अपने मन की बातें कह सुनाईं। महात्मा ने सेठ से कहा,’ तुमने ऐसा क्यों नहीं सोचा कि राजा के मन में चंदन की लकड़ी का आलीशान महल बनवाने की बात आ जाए? इससे तुम्हारा चंदन भी बिक जाता। विचार की पवित्रता से ही संबंधों में मिठास आती है। तुमने राजा के लिए गलत सोचा इसलिए राजा के मन में भी तुम्हारे लिए अनुचित विचार आया। गलत सोच ने दोनों के बीच दूरी बढ़ा दी। अब तुम दोनों प्रायश्चित करके अपना मन शुद्ध कर लो, तो पहले जैसा सुख फिर से मिलने लगेगा।’ 5  

 

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07-03-20 प्रात:मुरली ओम् शान्ति “बापदादा”मधुबन


“मीठे बच्चे-तुम्हें अपने योगबल से सारी सृष्टि को पावन बनाना है, तुम योगबल से ही माया पर जीत पाकर जगतजीत बन सकते हो"

प्रश्न:

बाप का पार्ट क्या है, उस पार्ट को तुम बच्चों ने किस आधार पर जाना है

उत्तर:

बाप का पार्ट है-सबके दु:ख हरकर सुख देना, रावण की जंजीरों से छुड़ाना। जब बाप आते हैं तो भक्ति की रात पूरी होती है। बाप तुम्हें स्वयं अपना और अपनी जायदाद का परिचय देते हैं। तुम एक बाप को जानने से ही सब कुछ जान जाते हो।

गीत:-

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो......

ओम् शान्ति।

बच्चों ने ओम् शान्ति का अर्थ समझा है, बाप ने समझाया है हम आत्मा हैं, इस सृष्टि ड्रामा के अन्दर हमारा मुख्य पार्ट है। किसका पार्ट है? आत्मा शरीर धारण कर पार्ट बजाती है। तो बच्चों को अब आत्म-अभिमानी बना रहे हैं। इतना समय देह-अभिमानी थे। अब अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है। हमारा बाबा आया हुआ है ड्रामा प्लैन अनुसार। बाप आते भी हैं रात्रि में। कब आते हैं-उसकी तिथि-तारीख कोई नहीं है। तिथि-तारीख उनकी होती है जो लौकिक जन्म लेते हैं। यह तो है पारलौकिक बाप। इनका लौकिक जन्म नहीं है। कृष्ण की तिथि, तारीख, समय आदि सब देते हैं। इनका तो कहा जाता है दिव्य जन्म। बाप इनमें प्रवेश कर बताते हैं कि यह बेहद का ड्रामा है। उसमें आधाकल्प है रात। जब रात अर्थात् घोर अन्धियारा होता है तब मैं आता हूँ। तिथि-तारीख कोई नहीं। इस समय भक्ति भी तमोप्रधान है। आधा कल्प है बेहद का दिन । बाप खुद कहते हैं मैंने इनमें प्रवेश किया है। गीता में है भगवानुवाच, परन्तु भगवान मनुष्य हो नहीं सकता। कृष्ण भी दैवी गुणों वाला है। यह मनुष्य लोक है। यह देव लोक नहीं है। गाते भी हैं ब्रह्मा देवताए नमः...... वह है सूक्ष्मवतनवासी। बच्चे जानते हैं वहाँ हड्डी-मास नहीं होता है। वह है सूक्ष्म सफेद छाया। जब मूलवतन में है तो आत्मा को न सूक्ष्म शरीर छाया वाला है, न हड्डी वाला है। इन बातों को कोई भी मनुष्य मात्र नहीं जानते हैं। बाप ही आकर सुनाते हैं, ब्राह्मण ही सुनते हैं, और कोई नहीं सुनते। ब्राह्मण वर्ण होता ही है भारत में, वह भी तब होता है जब परमपिता परमात्मा प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण धर्म की स्थापना करते हैं। अब इनको रचता भी नहीं कहेंगे। नई रचना कोई रचते नहीं हैं। सिर्फ रिज्युवनेट करते हैं। बुलाते भी हैं - हे बाबा, पतित दुनिया में आकर हमको पावन बनाओ। अभी तुमको पावन बना रहे हैं। तुम फिर योगबल से इस सृष्टि को पावन बना रहे हो। माया पर तुम जीत पाकर जगत जीत बनते हो। योगबल को साइंस बल भी कहा जाता है। ऋषि-मुनि आदि सब शान्ति चाहते हैं परन्तु शान्ति का अर्थ तो जानते नहीं। यहाँ तो जरूर पार्ट बजाना है ना। शान्तिधाम है स्वीट साइलेन्स होम। तुम आत्माओं को अब यह मालूम है कि हमारा घर शान्तिधाम है। यहाँ हम पार्ट बजाने आये हैं। बाप को भी बुलाते हैं-हे पतित-पावन, दु:ख हर्ता, सुख कर्ता आओ, हमको इस रावण की जंजीरों से छुड़ाओ। भक्ति है रात, ज्ञान है दिन। रात मुर्दाबाद होती है फिर ज्ञान जिंदाबाद होता है। यह खेल है सुख और दुःख का। तुम जानते हो पहले हम स्वर्ग में थे फिर उतरते-उतरते आकर नीचे हेल में पड़े हैं। कलियुग कब खलास होगा फिर सतयुग कब आयेगा, यह कोई नहीं जानते। तुम बाप को जानने से बाप द्वारा सब कुछ जान गये हो। मनुष्य भगवान को ढूँढने के लिए कितना धक्का खाते हैं। बाप को जानते ही नहीं। जानें तब जब बाप आकर अपना और जायदाद का परिचय दें। वर्सा बाप से ही मिलता है, माँ से नहीं। इनको मम्मा भी कहते हैं, परन्तु इनसे वर्सा नहीं मिलता है, इनको याद भी नहीं करना है। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर भी शिव के बच्चे हैं - यह भी कोई नहीं जानते। बेहद की सारी दुनिया का रचयिता एक ही बाप है। बाकी सब हैं उनकी रचना या हद के रचयिता। अब तुम बच्चों को बाप कहते हैं मुझे याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश हों। मनुष्य बाप को नहीं जानते हैं तो किसको याद करें? इसलिए बाप कहते हैं कितने निधनके बन पड़े हैं। यह भी ड्रामा में गूंध है। भक्ति और ज्ञान दोनों में सबसे श्रेष्ठ कर्म है-दान करना। भक्ति मार्ग में ईश्वर अर्थ दान करते हैं। किसलिए? कोई कामना तो जरूर रहती है। समझते हैं जैसा कर्म करेंगे वैसा फल दूसरे जन्म में पायेंगे, इस जन्म में जो करेंगे उसका फल दूसरे जन्म में पायेंगे। जन्म-जन्मान्तर नहीं पायेंगे। एक जन्म के लिए फल मिलता है। सबसे अच्छे ते अच्छा कर्म होता है दान। दानी को पुण्यात्मा कहा जाता है। भारत को महादानी कहा जाता है। भारत में जितना दान होता है उतना और कोई खण्ड में नहीं। बाप भी आकर बच्चों को दान करते हैं, बच्चे फिर बाप को दान करते हैं। कहते हैं बाबा आप आयेंगे तो हम अपना तन-मन-धन सब आपके हवाले कर देंगे। आप बिगर हमारा कोई नहीं। बाप भी कहते हैं मेरे लिए तुम बच्चे ही हो। मुझे कहते ही हैं हेविनली गॉड फादर अर्थात् स्वर्ग की स्थापना करने वाला। मैं आकर तुमको स्वर्ग की बादशाही देता हूँ। बच्चे मेरे अर्थ सब कुछ दे देते हैं - बाबा सब कुछ आपका है। भक्ति मार्ग में भी कहते थे-बाबा, यह सब कुछ आपका दिया हुआ है। फिर वह चला जाता है तो दुःखी हो जाते हैं। वह है भक्ति का अल्पकाल का सुख। बाप समझाते हैं भक्ति मार्ग में तुम मुझे दान-पुण्य करते हो इनडायरेक्ट । उसका फल तो तुमको मिलता रहता है। अब इस समय मैं तुमको कर्मअकर्म-विकर्म का राज़ बैठ समझाता हूँ। भक्ति मार्ग में तुम जैसे कर्म करते हो उसका अल्पकाल सुख भी मेरे द्वारा तुमको मिलता है। इन बातों का दुनिया में किसको पता नहीं है। बाप ही आकर कर्मों की गति समझाते हैं। सतयुग में कभी कोई बुरा कर्म करते ही नहीं। सदैव सुख ही सुख है। याद भी करते हैं सुखधाम, स्वर्ग को। अभी बैठे हैं नर्क में। फिर भी कह देते–फलाना स्वर्ग पधारा। आत्मा को स्वर्ग कितना अच्छा लगता है। आत्मा ही कहती है ना–फलाना स्वर्ग पधारा। परन्तु तमोप्रधान होने के कारण उनको कुछ पता नहीं पड़ता है कि स्वर्ग क्या, नर्क क्या है? बेहद का बाप कहते हैं तुम सब कितने तमोप्रधान बन गये हो। ड्रामा को तो जानते नहीं। समझते भी हैं कि सृष्टि का चक्र फिरता है तो जरूर हूबहू फिरेगा ना। वह सिर्फ कहने मात्र कह देते हैं। अभी यह है संगमयुग। इस एक ही संगमयुग का गायन है। आधाकल्प देवताओं का राज्य चलता है फिर वह राज्य कहाँ चला जाता, कौन जीत लेते हैं? यह भी किसको पता नहीं। बाप कहते हैं रावण जीत लेता है। उन्होंने फिर देवताओं और असुरों की लड़ाई बैठ दिखाई है। अब बाप समझाते हैं-5 विकारों रूपी रावण से हारते हैं फिर जीत भी पाते हैं रावण पर। तुम तो पूज्य थे फिर पुजारी पतित बन जाते हो तो रावण से हारे ना। यह तुम्हारा दुश्मन होने के कारण तुम सदैव जलाते आये हो। परन्तु तुमको पता नहीं है। अब बाप समझाते हैं रावण के कारण तुम पतित बने हो। इन विकारों को ही माया कहा जाता है। माया जीत, जगत जीत। यह रावण सबसे पुराना दुश्मन है। अभी श्रीमत से तुम इन 5 विकारों पर जीत पाते हो। बाप आये हैं जीत पहनाने। यह खेल है ना। माया ते हारे हार, माया ते जीते जीत। जीत बाप ही पहनाते हैं इसलिए इनको सर्वशक्तिमान कहा जाता है। रावण भी कम शक्तिमान नहीं है। परन्तु वह दुःख देते हैं इसलिए गायन नहीं है। रावण है बहुत दुश्तर। तुम्हारी राजाई ही छीन लेते हैं। अभी तुम समझ गये हो– हम कैसे हारते हैं फिर कैसे जीत पाते हैं? आत्मा चाहती भी है हमको शान्ति चाहिए। हम अपने घर जावें। भक्त भगवान को याद करते हैं परन्तु पत्थरबुद्धि होने कारण समझते नहीं हैं। भगवान बाबा है, तो बाप से जरूर वर्सा मिलता होगा। मिलता भी जरूर है परन्तु कब मिलता है फिर कैसे गँवाते हैं, यह नहीं जानते हैं। बाप कहते हैं मैं इस ब्रह्मा तन द्वारा तुमको बैठ समझाता हूँ। मुझे भी आरगन्स चाहिए ना। मुझे अपनी कर्मेन्द्रियां तो हैं नहीं। सूक्ष्मवतन में भी कर्मेन्द्रियां हैं। चलते फिरते जैसे मूवी बाइसकोप होता है, यह मूवी टॉकी बाइसकोप निकले हैं तो बाप को भी समझाने में सहज होता है। उन्हों का है बाहुबल, तुम्हारा है योगबल। वह दो भाई भी अगर आपस में मिल जाएं तो विश्व पर राज्य कर सकते हैं। परन्तु अभी तो फूट पड़ी हुई है। तुम बच्चों को साइलेन्स का शुद्ध घमण्ड रहना चाहिए। तुम मनमनाभव के आधार से साइलेन्स द्वारा जगतजीत बन जाते हो। वह है साइंस घमण्डी। तुम साइलेन्स घमण्डी अपने को
आत्मा समझ बाप को याद करते हो। याद से तुम सतोप्रधान बन जायेंगे। बहुत सहज उपाय बताते हैं। तुम जानते हो शिवबाबा आये हैं हम बच्चों को फिर से स्वर्ग का वर्सा देने। तुम्हारा जो भी कलियुगी कर्मबन्धन है, बाप कहते हैं उनको भूल जाओ। 5 विकार भी मुझे दान में दे दो। तुम जो मेरा-मेरा करते आये हो, मेरा पति, मेरा फलाना, यह सब भूलते जाओ। सब देखते हुए भी उनसे ममत्व मिटा दो। यह बात बच्चों को ही समझाते हैं। जो बाप को जानते ही नहीं, वह तो इस भाषा को भी समझ न सकें। बाप आकर मनुष्य से देवता बनाते हैं। देवतायें होते ही सतयुग में हैं। कलियुग में होते हैं मनुष्य। अभी तक उनकी निशानियां हैं अर्थात् चित्र हैं। मुझे कहते ही हैं पतित-पावन । मैं तो डिग्रेड होता नहीं हूँ। तुम कहते हो हम पावन थे फिर डिग्रेड हो पतित बने हैं। अब आप आकर पावन बनाओ तो हम अपने घर में जायें। यह है स्पीचूअल नॉलेज। अविनाशी ज्ञान रत्न हैं ना। यह है नई नॉलेज। अभी तुमको यह नॉलेज सिखाता हूँ। रचयिता और रचना के आदि, मध्य, अन्त का राज़ बताता हूँ। अभी यह तो है पुरानी दुनिया। इसमें तुम्हारे जो भी मित्र सम्बन्धी आदि हैं, देह सहित सबसे ममत्व निकाल दो। अभी तुम बच्चे अपना सब कुछ बाप हवाले करते हो। बाप फिर स्वर्ग की बादशाही 21 जन्मों के लिए तुम्हारे हवाले कर देते हैं। लेन-देन तो होती है ना। बाप तुमको 21 जन्मों के लिए राज्य-भाग्य देते हैं। 21 जन्म, 21 पीढ़ी गाये जाते हैं ना अर्थात् 21 जन्म पूरी लाइफ चलती है। बीच में कभी शरीर छूट नहीं सकता। अकाले मृत्यु नहीं होती। तुम अमर बन और अमरपुरी के मालिक बनते हो। तुमको कभी काल खा न सके। अभी तुम मरने के लिए पुरूषार्थ कर रहे हो। बाप कहते हैं देह सहित देह के सब सम्बन्ध छोड़ एक बाप से सम्बन्ध रखना है। अब जाना ही है सुख के सम्बन्ध में। दु:ख के बन्धनों को भूलते जायेंगे। गृहस्थ व्यवहार में रहते पवित्र बनना है। बाप कहते हैं मामेकम् याद करो, साथ-साथ दैवीगुण भी धारण करो। इन देवताओं जैसा बनना है। यह है एम ऑबजेक्ट। यह लक्ष्मी-नारायण स्वर्ग के मालिक थे, इन्हों ने कैसे राज्य पाया, फिर कहाँ गये, यह किसको पता नहीं है। अभी तुम बच्चों को दैवी गुण धारण करने हैं। किसको भी दु:ख नहीं देना है। बाप है ही दुःख हर्ता, सुख कर्ता। तो तुमको भी सुख का रास्ता सबको बताना है अर्थात् अन्धों की लाठी बनना है। अभी बाप ने तुम्हें ज्ञान का तीसरा नेत्र दिया है। तुम जानते हो बाप कैसे पार्ट बजाते हैं। अभी बाप जो तुमको पढ़ा रहे हैं फिर यह पढ़ाई प्राय:लोप हो जायेगी। देवताओं में यह नॉलेज रहती नहीं। तुम ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण ही रचता और रचना के ज्ञान को जानते हो। और कोई जान नहीं सकते। इन लक्ष्मी-नारायण आदि में भी अगर यह ज्ञान होता तो परम्परा चला आता। वहाँ ज्ञान की दरकार ही नहीं रहती क्योंकि वहाँ है ही सद्गति। अभी तुम सब कुछ बाप को दान देते हो तो फिर बाप तुमको 21 जन्मों के लिए सब कुछ दे देते हैं। ऐसा दान कभी होता नहीं। तुम जानते हो हम सर्वन्श देते हैं – बाबा यह सब कुछ आपका है, आप ही हमारे सब कुछ हो। त्वमेव माताश्च पिता... पार्ट तो बजाते हैं ना। बच्चों को एडाप्ट भी करते हैं फिर खुद ही पढ़ाते हैं। फिर खुद ही गुरू बन सबको ले जाते हैं। कहते हैं तुम मुझे याद करो तो पावन बन जायेंगे फिर तुमको साथ ले जाऊंगा। यह यज्ञ रचा हुआ है। यह है शिव ज्ञान यज्ञ, इसमें तुम तन-मन-धन सब स्वाहा कर देते हो। खुशी से सब अर्पण हो जाता है। बाकी आत्मा रह जाती है। बाबा, बस अब हम आपकी श्रीमत पर ही चलेंगे। बाप कहते हैं गृहस्थ व्यवहार में रहते पवित्र बनना है। 60 वर्ष की आयु जब होती है तो वानप्रस्थ अवस्था में जाने की तैयारी करते हैं परन्तु वह कोई वापिस जाने के लिए थोड़ेही तैयारी करते हैं। अभी तुम सतगुरू का मन्त्र लेते हो मनमनाभव। भगवानुवाच - तुम मुझे याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। सबको कहो आप सबकी वानप्रस्थ अवस्था है। शिवबाबा को याद करो, अब जाना है अपने घर। अच्छा।
मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:

1. कलियुगी सर्व कर्मबन्धनों को बुद्धि से भूल 5 विकारों का दान कर आत्मा को सतोप्रधान बनाना है।

2. इस रूद्र यज्ञ में खुशी से अपना तन-मन-धन सब अर्पण कर सफल करना है। इस समय सब कुछ बाप हवाले कर 21 जन्मों की बादशाही बाप से ले लेनी है।

वरदान:

निमित्त भाव की स्मृति से हलचल को समाप्त करने वाले सदा अचल-अडोल भव

निमित्त भाव से अनेक प्रकार का मैं पन, मेरा पन सहज ही खत्म हो जाता है। यह स्मृति सर्व प्रकार की हलचल से छुड़ाकर अचल-अडोल स्थिति का अनुभव कराती है। सेवा में भी मेहनत नहीं करनी पड़ती। क्योंकि निमित्त बनने वालों की बुद्धि में सदा याद रहता है कि जो हम करेंगे हमें देख सब करेंगे। सेवा के निमित्त बनना अर्थात् स्टेज पर आना। स्टेज तरफ स्वत: सबकी नजर जाती है। तो यह स्मृति भी सेफ्टी का साधन बन जाती है।

स्लोगन:

सर्व बातों में न्यारे बनो तो परमात्म बाप के सहारे का अनुभव होगा।

 

महाशिवरात्री संदेश दि. 22 से 28 फरवरी, 2017 रात 12 बजे तक 7 दिनमें 

7 करोंड व्हाटसएप युजर्स को दिया जायेगा महाशिवरात्री का आध्यात्मिक रहस्य

ओमशान्ति मीडिया पत्रिका, बीकवार्ता वेबपोर्टल तथा डॉ. दिपक हरके का संयुक्त उपक्रम

वंडर बुक ऑफ रिकार्ड इंटरनॅशनल, लंदन में दर्ज होगा विश्व किर्तीमान

 

अहमदनगर (प्रतिनिधी) हम प्रतिवर्ष भक्तिभाव से महाशिवरात्री महोत्सव मनाते है, किन्तू यह उत्सव क्या मनाते ? इसके पिछे छिपा आध्यात्मिक क्या है ? इसकी जानकारी कुछ ही लोगो के पास है ? महाशिवरात्री के आध्यात्मिक रहस्य को हम अपने जीवन में समझकर अपने जीवनमें प्रतिपल खुश रहने हेतू महाशिवरात्री संदेश देना आवश्यक है  दि. 22 से 28 फरवरी, 2017 की रात 12 से 7 करोड व्हॉटसअॅप युजर्सको महाशिवरात्रीका आध्यात्मिक संदेश प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की ओरसे पहूंचाया जायेगा. ओमशान्ति मीडिया पत्रिका, www.bkvarta.com बीकवार्ता वेबपोर्टल तथा डॉ. दिपक हरके का यह संयुक्त उपक्रम है.

 

इसके पूर्व का विश्व विक्रम डॉ. दिपक हरके इनके नाम पर है, दिपावली का आध्यात्मिक रहस्य का ऑडिओ मॅसेज 1 करोड 352 व्हॉटस्अॅप युजर्स को 29 अक्तुबर 2016 को रात 12 बजे से 20 अक्तुबर, 2016 के रात बजे बजे तक भेजकर उन्होने यह उपलब्ध हासिल की थी. महाशिवरात्री का विश्वविक्रमी संदेश प्राप्त करने के लिए 9422288888 इस व्हॉटसअॅप मैसेज पर WR एैसा मॅसेज भेजकर आप यह संदेश प्राप्त कर सकतें है. विश्वविक्रम में सहभागीता पत्र प्राप्त करने के लिए हरएक सहभागी व्यक्ति निर्धारीत राशी जमा कर वंडर बुक ऑफ रिकार्डमें सहभाग प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकतें है . इस विश्वविक्रम का उदघाटन भारतीय क्रीकेट टिम के उपकप्तान अजिंक्य रहणे इनके शुभहस्तोंसे मुंबई के बीकेसीस्थित एमसीए क्लब में सपन्न हूआ. इस उपक्रम के बारें में रहाने ने डॉ. दिपक हरके को बधाई दी तथा ब्रह्माकुमारीज् के मानवसेवा के कार्य की सराहना की. 

 

 

१३ मार्च (पालक्कड:केरला) ध्यान महोत्सव का आयोजन. विभीन्य मान्यवारोंने किया राजयोग ध्यान अभ्यास.

 

31 जनवरी (भूवनेश्वर) वार्षिकोत्सव मनाया गया. सेवाकेंद्र के एक वर्ष पूर्ती पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

 


 

30 जनवरी (विलेपार्ले:मुंबई) सफल सारथी अवार्ड. ट्रान्सपोर्ट एण्ड ट्रॅव्हल्स प्रभागद्वारा यह अवार्ड प्राप्त ड्रायव्हर भाईयों को सम्मानित किया गया.

 


 

29 जनवरी (हैद्राबाद) मुख्यमंत्री महोदय शान्तिसरोवर में. भ्राता एम. चंद्राबाबू नायडूजीने शांती सरोवर भेट की. शांतीसरांेवर के दसवें वर्धापन दिन कार्यक्रम का उदघाटन उन्होंने किया.


 

28 जनवरी (जयपूर:राज.) अंतरराष्ट्रीय खेल सम्मेलन मंें ईश्वरीय संदेश. स्पोटर्स एण्ड फिजिकल एज्युकेशन विषयपर आयोजित इस मम्मेलन में बीके जगबीरभाईने दिया संदेश.


 

27 जनवरी (मडिकेरी:कर्ना.) कर्म की गती गुह्य है. - भगवानभाई सेंट्रल जेल में ब्र.कु भगवानभाई, माऊंट आबू ने दिया ईश्वरीय संदेश


 

26 जनवरी (मंगलौर:कर्ना.) सेंट्रल जेल में दिया ईश्वरीय संदेश. ब्र.कु भगवानभाई, माऊंट आबू ने दिया ईश्वरीय संदेश.


 

25 जनवरी (मालाड:मुंबई)फिल्म इन्स्टि. में मेडिटेशन रुम का उदघाटन. प्रसिध्द फिल्म निर्देशक तथा निर्माता भ्राता सुभाष घई ने विशअलींग फिल्म इन्स्टि. में मेडिटेशन रुम का उघाटन किया

 


 

24 जनवरी (कटघोरा) आध्यात्मिक समागम एवं सम्मान समारोह संपन्न. नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधीयों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया.


 

23 जनवरी (लातूर:महा.) उर्जा छात्र-क्लब स्थापित. गणतंत्र दिवस के अवसरपर विवेकानंद विद्यालय, सीबीएससी लातूर में महाराष्ट्र उर्जा छात्र क्लब की स्थापना की गई


 

22 जनवरी (बिलासपूर:छ.ग.) आरके नगर में सरस्वती झाँकी. राजकिशोर नगर, बीके रुपा बहनने माँ सरस्वती की महिमा का प्रवचन किया.


21 जनवरी (शान्तिवन) रेडिओ मधुबन वर्धापन दिन. ब्रहमाकुमारीज कम्युनिटी रेडिओ मधुबन का 4 था वर्धापन दिवस मनाया गया.

 


 

20 जनवरी (मालाड:मुंबई) सुरक्षीत रास्ता सप्ताह. एसटी डिपो में हुआ कार्यक्रम.


 

19 जनवारी (केशोद:गुज) यात्रा खुशनुमा जीवन की और कार्यक्रम संपन्न. ब्र.कु.डा. सविता, माऊंट आबूने किया मार्गदर्शन.


 

18 जनवरी (आबूपर्वत:पाण्डवभवन) पिताश्रीजी का स्मृतिदिवस. विश्वशांती दिवस के रुप में समूचे विश्व में मनाया गया.


 

17 जनवरी (विशाखापट्टणम) विधायक महोदय को दिया संदेश. नये वर्ष का संदेश भ्राता विष्णु कुमार राजू जी को बीके शशीकला बहनने दिया 


 

16 जनवरी (मुंबई) 102वीं विज्ञान परिषद में स्पार्क सेवा. मुंबई विश्व विद्यालय में आयोजित इस परिषदमें स्प्रिच्ुअल एप्लीकेशन एण्ड रिसर्च की सुंदर सेवा हुई


 

15 जनवरी (जयपूर) नारित्वदर्शन की सहभागीता. जयपूर अन्तरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टीवल में नारित्व दर्शन को नॉमिनेट किया गया.


 

14 जनवरी (शान्तिवन) रिडिकव्हरींग ऑफ लाईफ. वैज्ञानिक तथा अभियंता प्रभागद्वारा राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया


 

13 जनवरी (शान्तिवन) ब्र.कु. करुणाभाईजी का 75 वाँ जनमदिन. ब्रहमाकुमारीज संस्था के मीडिया उपाध्यक्ष तथा मल्टीमीडिया प्रभारी ब्र.कु. करुणाभाईजी के जनमदिन की प्लेटिनम ज्युबिली हर्षोल्हाससे मनाई गई.


 

12 जनवरी (शांतीवन)दादीजी का 99 वाँ जनमदिन मनाया. ब्रहमाकुमारीज संस्था की मुख्य प्रशासिका ददी जानकीजी का जन्मदिन बहुत ही उमंग उत्साहसे मनाया गया


 

11 जनवरी (मा.आबू) बीके केदारभाई का अभिनंदन किया दादीजीने. राजस्थान सरकारद्वारा उर्जा संरक्षण पुरस्कार प्राप्त करनेवाले बीके केदारभाई (उर्जा ऑडिटर) का अभिनंदन दादी रतनमोहिनीजी, बीके रमेशभाईजीने किया.


 

10 जनवरी (टिकरापारा:बीलासपूर) बालिका शिक्षा शिविर में सदेश. सरस्वती शिशु मंदिर उच्चस्तर मा. विद्यालय में बीके मंजू बहनने दिया ईश्वरीय संदेश.


 

09 जनवरी (राहूरी:महा.) आज की शाम भगवान के नाम. ब्र.कु. सुरजभाई, मा. आबू, ब्र.कु. गीताबहन पुना तथा उषा बहन राहूरी ने दिया ईश्वरीय संदेश. ब्र.कु. बद्रिश हेहाडरायने मीडियाद्वारा पहूंचाया संदेश


 

08 जनवरी (कलपेट्टा:केरला) केंद्रीय विद्यालय में दिया ईश्वरीय संदेश. ब्र.कु. भगवानभाई, आबू पर्वत ने  कही नैतिक मूल्यों की बा


 

07 जनवरी (बार्शि:महा.) कुंकूलोक हायस्कूल में ईश्वरीय संदेश. बीके संगीताबहनने दिया संदेश


 

06 जनवरी (केशोद) महान जादुगर विरागभाई हकुभा को दिया संदेश. बी.के. सत्याबहन, तथा बीके शिल्पा बहनने दिया परिचय.


 

05 जनवरी (हरिद्वार) ऋषीकुल में संत स्नेहमीलन, ब्र.कु.मिनाबहनने परमपिता परमात्मा का दिया सत्य परिच


 

04 जनवारी (बंेगलौर) फ्रि आय चेकींग कॅम्प. सेवाकेंद्र की ओरसे आयोजित कॅम्प में सहभागीयों दिया गया संदे


 

03 जनवरी (लिमा,पेरु:फ्रान्स)कोप-20 में ब्रहमाकुमारीज् की सहभागीता. क्लायमेंट चेंज कॉन्फरन्स में ब्रहमाकुमारीजने किया सहभाग


 

02 जनवरी (वाशी:मुंबई) सदभावना सभा में ब्रहमाकुमारीज् सहभाग. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की औरसे आयोजित इस मीटिंग में बहनोंने दिया संदेश


 

01 जनवरी (तिनसुखीया:आसाम) स्वर्णीम युग की पुन:स्थापना. गीता के भगवान को प्रत्यक्ष करने के सम्मेलनको, बी के ब्रजमोहनभाईजी, देहली, ब्र.कु. उषाबहनजी मा. आबू, बीके आशा बहनजी ने किया सम्बोधित

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