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विशेष वार्ता

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नया मलयालम टीवी चैनल

कोच्चि: केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री, माननीय। मुरलीधरन ने ब्रह्म कुमारियों का नया मलयालम चैनल लॉन्च किया - मलयाली को समर्पित राजयोग टीवी मलयालम। यह एक पूर्ण चैनल है जो हमारी ज़रूरत की हर चीज़ वितरित करता है। भारतीय दर्शन विज्ञान और अध्यात्म का सामंजस्य है। यह चैनल ब्रह्म कुमारियों की मानवता की समग्र दृष्टि का प्रमाण है। मंत्री ने अपने…

आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

मध्यप्रदेश के राज्य कैबिनेट मंत्री ने आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र प्रदान किया मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन में ब्रह्मा कुमारिस संगठन के प्रयासों की सराहना की। मध्य प्रदेश सरकार में पशुपालन और मत्स्यपालन मंत्री और प्रभारी मंत्री श्री लखन सिंह यादव, मुरैना जिला कलेक्टर, प्रियंका दास के साथ, प्रशासन की ओर से इस…

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर   ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के मेडिकल विंग के स्थानीय सेवाकेंद्र “प्रभु उपहार भवन, माधवगंज लश्कर ग्वालियर” द्वारा निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर का आयोजन किया गया।शिविर में परामर्श देनें के लिए डॉ. निर्मला कंचन (स्त्री रोग विशेषज्ञ), एवं…

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  • सेवा समाचार - मॉरीशस में जीएचआरसी, माउंट आबू के डॉ। प्रताप मिधा का दौरा - 
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  • Watch "प्रेरणा (Inspiration) (EP-120) Rajyogini Vanita Didi (Jetpur, Gujarat)" on YouTube -https://youtu.be/mBRBP12YcWA
  • भारत के भाई बीके चार्ली की सेवा रिपोर्ट (ऑस्ट्रेलिया) की यात्रा
  • बैंगलोर - ब्रह्मा कुमारियों ने पृथ्वी माता महोत्सव में "प्रकृति मित्र पुरस्कार" से सम्मानित किया

 

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नया मलयालम टीवी चैनल

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आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

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19 मई (आबूरोड) आध्यात्मिकता और भौतिकता के संगम से होगा विश्व परीवर्तन.

19 मई (आबूरोड) आध्यात्मिकता और भौतिकता के संगम से होगा विश्व परीवर्तन.

19 मई (आबूरोड) आध्यात्मिकता और भौतिकता के संगम से होगा विश्व परीवर्तन. केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र. संस्था के 80 वर्ष कार्यक्रम में वक्तव्य.Read more...

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निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर

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आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

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युवा शिविर का सफल आयोजन.

युवा शिविर का सफल आयोजन.

त्रिनिदाद) युवा शिविर का सफल आयोजन. टोका त्रिनिदाद मेंे हासन्ना बीच रिसोर्ट पर युवा शिविर का आयोजन किया गया. Read more...

 

आज का मुरली प्रवचन
 
 

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06-04-2020 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


"मीठे बच्चे - अपने ऊपर रहम करो, बाप जो मत देते हैं उस पर चलो तो अपार खुशी रहेगी, माया के श्राप से बचे रहेंगे"

प्रश्नः-

माया का श्राप क्यों लगता है? श्रापित आत्मा की गति क्या होगी?

उत्तर:-

1. बाप और पढ़ाई का (ज्ञान रत्नों का) निरादर करने से, अपनी मत पर चलने से माया का श्राप लग जाता है, 2. आसुरी चलन है, दैवीगुण धारण नहीं करते तो अपने पर बेरहमी करते हैं। बुद्धि को ताला लग जाता है। वह बाप की दिल पर चढ़ नहीं सकते।

ओम् शान्ति। रूहानी बच्चों को यह तो अब निश्चय है कि हमको आत्म-अभिमानी बनना है और बाप को याद करना है। माया रूपी रावण जो है वह श्रापित, दु:खी बना देता है। श्राप अक्षर ही दु:ख का है, वर्सा अक्षर सुख का है। जो बच्चे व़फादार, फरमानबरदार हैं, वह अच्छी रीति जानते हैं। जो नाफरमानबरदार है, वह बच्चा है नहीं। भल अपने को कुछ भी समझें परन्तु बाप की दिल पर चढ़ नहीं सकते, वर्सा पा नहीं सकते। जो माया के कहने पर चलते और बाप को याद भी नहीं करते, किसको समझा नहीं सकते। गोया अपने को आपेही श्रापित करते हैं। बच्चे जानते हैं माया बड़ी जबरदस्त है। अगर बेहद के बाप की भी नहीं मानते हैं तो गोया माया की मानते हैं। माया के वश हो जाते हैं। कहावत है ना - प्रभू की आज्ञा सिर माथे। तो बाप कहते हैं बच्चे, पुरुषार्थ कर बाप को याद करो तो माया की गोद से निकल प्रभू की गोद में आ जायेंगे। बाप तो बुद्धिवानों का बुद्धिवान है। बाप की नहीं मानेंगे तो बुद्धि को ताला लग जायेगा। ताला खोलने वाला एक ही बाप है। श्रीमत पर नहीं चलते तो उनका क्या हाल होगा। माया की मत पर कुछ भी पद पा नहीं सकेंगे। भल सुनते हैं परन्तु धारणा नहीं कर सकते हैं, न करा सकते तो उसका क्या हाल होगा! बाप तो गरीब निवाज़ हैं। मनुष्य गरीबों को दान करते हैं तो बाप भी आकर कितना बेहद का दान करते हैं। अगर श्रीमत पर नहीं चलते तो एकदम बुद्धि को ताला लग जाता है। फिर क्या प्राप्ति करेंगे! श्रीमत पर चलने वाले ही बाप के बच्चे ठहरे। बाप तो रहमदिल है। समझते हैं बाहर जाते ही माया एकदम खत्म कर देगी। कोई आपघात करते हैं तो भी अपनी सत्यानाश करते हैं। बाप तो समझाते रहते हैं - अपने पर रहम करो, श्रीमत पर चलो, अपनी मत पर नहीं चलो। श्रीमत पर चलने से खुशी का पारा चढ़ेगा। लक्ष्मी-नारायण की शक्ल देखो कैसी खुशनुम: है। तो पुरुषार्थ कर ऐसा ऊंच पद पाना चाहिए ना। बाप अविनाशी ज्ञान रत्न देते हैं तो उनका निरादर क्यों करना चाहिए! रत्नों से झोली भरनी चाहिए। सुनते तो हैं परन्तु झोली नहीं भरते क्योंकि बाप को याद नहीं करते। आसुरी चलन चलते हैं। बाप बार-बार समझाते रहते हैं - अपने पर रहम करो, दैवीगुण धारण करो। वह है ही आसुरी सम्प्रदाय। उनको बाप आकर परिस्तानी बनाते हैं। परिस्तान स्वर्ग को कहा जाता है। मनुष्य कितना धक्का खाते रहते हैं। संन्यासियों आदि के पास जाते हैं, समझते हैं मन को शान्ति मिलेगी। वास्तव में यह अक्षर ही रांग है, इनका कोई अर्थ नहीं। शान्ति तो आत्मा को चाहिए ना। आत्मा स्वयं शान्त स्वरूप है। ऐसे भी नहीं कहते कि आत्मा को कैसे शान्ति मिले? कहते हैं मन को शान्ति कैसे मिले? अब मन क्या है, बुद्धि क्या है, आत्मा क्या है, कुछ भी जानते नहीं। जो कुछ कहते अथवा करते हैं वह सब है भक्ति मार्ग। भक्ति मार्ग वाले सीढ़ी नीचे उतरते-उतरते तमोप्रधान बनते जाते हैं। भल किसको बहुत धन, प्रापर्टी आदि है परन्तु हैं तो फिर भी रावण राज्य में ना।

तुम बच्चों को चित्रों पर समझाने की भी बहुत अच्छी प्रैक्टिस करनी है। बाप सब सेन्टर्स के बच्चों को समझाते रहते हैं, नम्बरवार तो हैं ना। कई बच्चे राजाई पद पाने का पुरुषार्थ नहीं करते तो प्रजा में क्या जाकर बनेंगे! सर्विस नहीं करते, अपने पर तरस नहीं आता है कि हम क्या बनेंगे फिर समझा जाता है ड्रामा में इनका पार्ट इतना है। अपना कल्याण करने के लिए ज्ञान के साथ-साथ योग भी हो। योग में नहीं रहते तो कुछ भी कल्याण नहीं होता। योग बिगर पावन बन नहीं सकते। ज्ञान तो बहुत सहज है परन्तु अपना कल्याण भी करना है। योग में न रहने से कुछ भी कल्याण होता नहीं। योग बिगर पावन कैसे बनेंगे? ज्ञान अलग चीज़ है, योग अलग चीज़ है। योग में बहुत कच्चे हैं। याद करने का अक्ल ही नहीं आता। तो याद बिगर विकर्म कैसे विनाश हों। फिर सजा बहुत खानी पड़ती है, बहुत पछताना पड़ता है। वह स्थूल कमाई नहीं करते तो कोई सजा नहीं खाते हैं, इसमें तो पापों का बोझा सिर पर है, उसकी बहुत सजा खानी पड़े। बच्चे बनकर और बेअदब होते हैं तो बहुत सजा मिल जाती है। बाप तो कहते हैं - अपने पर रहम करो, योग में रहो। नहीं तो मुफ्त अपना घात करते हैं। जैसे कोई ऊपर से गिरता है, मरा नहीं तो हॉस्पिटल में पड़ा रहेगा, चिल्लाता रहेगा। नाहेक अपने को धक्का दिया, मरा नहीं, बाकी क्या काम का रहा। यहाँ भी ऐसे है। चढ़ना है बहुत ऊंचा। श्रीमत पर नहीं चलते हैं तो गिर पड़ते हैं। आगे चल हर एक अपने पद को देख लेंगे कि हम क्या बनते हैं? जो सर्विसएबुल, आज्ञाकारी होंगे, वही ऊंच पद पायेंगे। नहीं तो दास-दासी आदि जाकर बनेंगे। फिर सजा भी बहुत कड़ी मिलेगी। उस समय दोनों जैसे धर्मराज का रूप बन जाते हैं। परन्तु बच्चे समझते नहीं हैं, भूलें करते रहते हैं। सजा तो यहाँ खानी पड़ेगी ना। जितना जो सर्विस करेंगे, शोभेंगे। नहीं तो कोई काम के नहीं रहेंगे। बाप कहते हैं दूसरों का कल्याण नहीं कर सकते हो तो अपना कल्याण तो करो। बांधेलियाँ भी अपना कल्याण करती रहती हैं। बाप फिर भी बच्चों को कहते हैं खबरदार रहो। नाम-रूप में फँसने से माया बहुत धोखा देती है। कहते हैं बाबा फलानी को देखने से हमको खराब संकल्प चलते हैं। बाप समझाते हैं - कर्मेन्द्रियों से कभी भी खराब काम नहीं करना है। कोई भी गंदा आदमी जिसकी चलन ठीक न हो तो सेन्टर पर उनको आने नहीं देना है। स्कूल में कोई बदचलन चलते हैं तो बहुत मार खाते हैं। टीचर सबके आगे बतलाते हैं, इसने ऐसे बदचलन की है, इसलिए इनको स्कूल से निकाला जाता है। तुम्हारे सेन्टर्स पर भी ऐसी गन्दी दृष्टि वाले आते हैं, तो उनको भगा देना चाहिए। बाप कहते हैं कभी कुदृष्टि नहीं रहनी चाहिए। सर्विस नही करते, बाप को याद नहीं करते तो जरूर कुछ न कुछ गन्दगी है। जो अच्छी सर्विस करते हैं, उनका नाम भी बाला होता है। थोड़ा भी संकल्प आये, कुदृष्टि जाये तो समझना चाहिए माया का वार होता है। एकदम छोड़ देना चाहिए। नहीं तो वृद्धि को पाए नुकसान कर देंगे। बाप को याद करेंगे तो बचते रहेंगे। बाबा सब बच्चों को सावधान करते हैं - खबरदार रहो, कहाँ अपने कुल का नाम बदनाम नहीं करो। कोई गन्धर्वी विवाह कर इकट्ठे रहते हैं तो कितना नाम बाला करते हैं, कोई फिर गन्दे बन पड़ते हैं। यहाँ तुम आये हो अपनी सद्गति करने, न कि बुरी गति करने। बुरे ते बुरा है काम, फिर क्रोध। आते हैं बाप से वर्सा लेने लिए परन्तु माया वार कर श्राप दे देती है तो एकदम गिर पड़ते हैं। गोया अपने को श्राप दे देते हैं। तो बाप समझाते हैं बड़ी सम्भाल रखनी है, कोई ऐसा आये तो उनको एकदम रवाना कर देना चाहिए। दिखाते भी हैं ना - अमृत पीने आये फिर बाहर जाकर असुर बन गन्द किया। वह फिर यह ज्ञान सुना न सकें। ताला बंद हो जाता है। बाप कहते हैं अपनी सर्विस पर ही तत्पर रहना चाहिए। बाप की याद में रहते-रहते पिछाड़ी को चले जाना है घर। गीत भी है ना - रात के राही थक मत जाना....... आत्मा को घर जाना है। आत्मा ही राही है। आत्मा को रोज़ समझाया जाता है अब तुम शान्तिधाम जाने के राही हो। तो अब बाप को, घर को और वर्से को याद करते रहो। अपने को देखना है माया कहाँ धोखा तो नहीं देती है? मैं अपने बाप को याद करता हूँ?

ऊंच ते ऊंच बाप की तरफ ही दृष्टि रहे - यह है बहुत ऊंच पुरुषार्थ। बाप कहते हैं - बच्चे, कुदृष्टि छोड़ दो। देह-अभिमान माना कुदृष्टि, देही-अभिमानी माना शुद्ध दृष्टि। तो बच्चों की दृष्टि बाप की तरफ रहनी चाहिए। वर्सा बहुत ऊंच है - विश्व की बादशाही, कम बात है! स्वप्न में भी किसको नहीं होगा कि पढ़ाई से, योग से विश्व की बादशाही मिल सकती है। पढ़कर ऊंच पद पायेंगे तो बाप भी खुश होगा, टीचर भी खुश होगा, सतगुरू भी खुश होगा। याद करते रहेंगे तो बाप भी पुचकार देते रहेंगे। बाप कहते हैं - बच्चे, यह खामियां निकाल दो। नहीं तो मुफ्त नाम बदनाम करेंगे। बाप तो विश्व का मालिक बनाते, सौभाग्य खोलते हैं। भारतवासी ही 100 प्रतिशत सौभाग्यशाली थे सो फिर 100 प्रतिशत दुर्भाग्यशाली बने हैं फिर तुमको सौभाग्यशाली बनाने के लिए पढ़ाया जाता है।

बाबा ने समझाया है धर्म के जो बड़े-बड़े हैं, वह भी तुम्हारे पास आयेंगे। योग सीखकर जायेंगे। म्युज़ियम में जो टूरिस्ट आते हैं, उनको भी तुम समझा सकते हो - अब स्वर्ग के गेट्स खुलने हैं। झाड़ पर समझाओ, देखो तुम फलाने समय पर आते हो। भारतवासियों का पार्ट फलाने समय पर है। तुम यह नॉलेज सुनते हो फिर अपने देश में जाकर बताओ कि बाप को याद करो तो तमोप्रधान से सतोप्रधान बन जायेंगे। योग के लिए तो वह चाहना रखते हैं। हठयोगी, संन्यासी तो उन्हों को योग सिखला न सकें। तुम्हारी मिशन भी बाहर जायेगी। समझाने की बड़ी युक्ति चाहिए। धर्म के जो बड़े-बड़े हैं उन्हों को आना तो है। तुमसे कोई एक भी अच्छी रीति यह नॉलेज ले जाये तो एक से कितने ढेर समझ जायेंगे। एक की बुद्धि में आ गया तो फिर अखबारों आदि में भी डालेंगे। यह भी ड्रामा में नूँध है। नहीं तो बाप को याद करना कैसे सीखे। बाप का परिचय तो सबको मिलना है। कोई न कोई निकलेंगे। म्युज़ियम में बहुत पुरानी चीजें देखने जाते हैं। यहाँ फिर तुम्हारी पुरानी नॉलेज सुनेंगे। ढेर आयेंगे। उनसे कोई अच्छी रीति समझेंगे। यहाँ से ही दृष्टि मिलेगी या तो मिशन बाहर जायेगी। तुम कहेंगे बाप को याद करो तो अपने धर्म में ऊंच पद पायेंगे। पुनर्जन्म लेते-लेते सब नीचे आ गये हैं। नीचे उतरना माना तमोप्रधान बनना। पोप आदि ऐसे कह न सके कि बाप को याद करो। बाप को जानते ही नहीं। तुम्हारे पास बहुत अच्छी नॉलेज है। चित्र भी सुन्दर बनते रहते हैं। सुन्दर चीज़ होगी तो म्युजियम और ही सुन्दर होगा। बहुत आयेंगे देखने के लिए। जितने बड़े चित्र होंगे उतना अच्छी रीति समझा सकेंगे। शौक रहना चाहिए हम ऐसे समझायें। सदा तुम्हारी बुद्धि में रहे कि हम ब्राह्मण बने हैं तो जितनी सर्विस करेंगे उतना बहुत मान होगा। यहाँ भी मान तो वहाँ भी मान होगा। तुम पूज्य बनेंगे। यह ईश्वरीय नॉलेज धारण करनी है। बाप तो कहते हैं सर्विस पर दौड़ते रहो। बाप कहाँ भी सर्विस पर भेजे, इसमें कल्याण है। सारा दिन बुद्धि में सर्विस के ख्याल चलने चाहिए। फॉरेनर्स को भी बाप का परिचय देना है। मोस्ट बिलवेड बाप को याद करो, कोई भी देहधारी को गुरू नहीं बनाओ। सबका सद्गति दाता वह एक बाप है। अभी होलसेल मौत सामने खड़ा है, होलसेल और रीटेल व्यापार होता है ना। बाप है होलसेल, वर्सा भी होलसेल देते हैं। 21 जन्म के लिए विश्व की राजाई लो। मुख्य चित्र हैं ही त्रिमूर्ति, गोला, झाड़, सीढ़ी, विराट रूप का चित्र और गीता का भगवान कौन?..... यह चित्र तो फर्स्ट क्लास है, इसमें बाप की महिमा पूरी है। बाप ने ही कृष्ण को ऐसा बनाया है, यह वर्सा गॉड फादर ने दिया। कलियुग में इतने ढेर मनुष्य हैं, सतयुग में थोड़े हैं। यह फेरघेर (अदली-बदली) किसने की? ज़रा भी कोई नहीं जानते हैं। तो टूरिस्ट बहुत करके बड़े-बड़े शहरों में जाते हैं। वह भी आकर बाप का परिचय पायेंगे। प्वाइंट्स तो सर्विस की बहुत मिलती रहती हैं। विलायत में भी जाना है। एक तरफ तुम बाप का परिचय देते रहेंगे, दूसरे तरफ मारामारी चलती रहेगी। सतयुग में थोड़े मनुष्य होंगे तो जरूर बाकी का विनाश होगा ना। वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी रिपीट होती है। जो हो गया वो फिर रिपीट होगा। परन्तु किसको समझाने का भी अक्ल चाहिए। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) सदा एक बाप की तरफ ही दृष्टि रखनी है। देही-अभिमानी बनने का पुरुषार्थ कर माया के धोखे से बचना है। कभी कुदृष्टि रख अपने कुल का नाम बदनाम नहीं करना है।

2) सर्विस के लिए भाग दौड़ करते रहना है। सर्विसएबुल और आज्ञाकारी बनना है। अपना और दूसरों का कल्याण करना है। कोई भी बदचलन नहीं चलनी है।

वरदान:-

एकता और सन्तुष्टता के सर्टीफिकेट द्वारा सेवाओं में सदा सफलतामूर्त भव

सेवाओं में सफलतामूर्त बनने के लिए दो बातें ध्यान में रखनी है एक - संस्कारों को मिलाने की युनिटी और दूसरा स्वयं भी सदा सन्तुष्ट रहो तथा दूसरों को भी सन्तुष्ट करो। सदा एक दो में स्नेह की भावना से, श्रेष्ठता की भावना से सम्पर्क में आओ तो यह दोनों सर्टीफिकेट मिल जायेंगे। फिर आपकी प्रैक्टिकल जीवन बाप के सूरत का दर्पण बन जायेगी और उस दर्पण में बाप जो है जैसा है वैसा दिखाई देगा।

स्लोगन:-

आत्म स्थिति में स्थित होकर अनेक आत्माओं को जीयदान दो तो दुआयें मिलेंगी।

 

 

 


 

 

   बीकेवार्ता वेबपोर्टल : उदघाटन के ऐतिहासिक क्षण प्रकाशन शुभारम्भ दि 28 नवम्बर, 2009


  

बीकेवार्ता आर्टिकल बँक

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बहूतसे सेवाकेंद्र की तथा प्रेस के भाई बहनों की माँग रहती है की उन्हें नये विषय पर ब्राहृाकुमारीज् आर्टिकल्स की आवश्यकता रहती है. जैसे मन की शांती, जीवन में सुख शांती प्राप्त करने की बातें, तनाव मुक्त जीवन आदि विषयोंपर समाचार पत्रों के लिए तथा पढने के लिए तथा दुसरों को समझाने हेतू आर्टिकल्स चाहिए और वह भी हिंदी तथा अपनी प्रादेशिक/रिजनल भाषाओं में, बीकेवार्ता ने इस बात को देखते हूए बहनों तथा भाइयों की मांग को कुछ हद तक पूरी करने का प्रयास किया है, ज्ञानसागर परमात्मा से कुछ ज्ञान की अंजली को जनमाध्यमोंको देने हेतू ज्ञानांजली - बीकेवार्ता आर्टिकल बँक को शुरु किया है,

 

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 विश्व पर्यावरण दिवस

संयुक्त राष्ट्र द्वारा सकारात्मक पर्यावरण कार्य हेतु दुनियाभर में मनाया जाने वाला 'विश्व पर्यावरण दिवस' सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण और जीवन का अन्योन्याश्रित संबंध है तथापि हमें अलग से यह दिवस मनाकर पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लेने की आवश्यकता पड़ रही है। यह चिंताजनक ही नहीं, शर्मनाक भी है। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टाकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। इसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया। इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का जन्म हुआ तथा प्रति वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस आयोजित करके नागरिकों कोप्रदूषण की समस्या से अवगत कराने का निश्चय किया गया। तथा इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम जनता को प्रेरित करना था। उक्त गोष्ठी में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने 'पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव' विषय पर व्याख्यान दिया था। पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में यह भारत का प्रारंभिक क़दम था। तभी से हम प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाते आ रहे हैं।

 


 

विचारपुष्प  -   जो संकल्प करो उसे बीच-बीच में दृढ़ता का ठप्पा लगाओ तो विजयी बन जायेंगे ! 

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संस्कार धन - बोध कथा  : मन का राजा 

राजा भोज वन में शिकार करने गए लेकिन घूमते हुए अपने सैनिकों से बिछुड़ गए और अकेले पड़ गए। वह एक वृक्ष के नीचे बैठकर सुस्ताने लगे। तभी उनके सामने से एक लकड़हारा सिर पर बोझा उठाए गुजरा। वह अपनी धुन में मस्त था। उसने राजा भोज को देखा पर प्रणाम करना तो दूर, तुरंत मुंह फेरकर जाने लगा।
भोज को उसके व्यवहार पर आश्चर्य हुआ। उन्होंने लकड़हारे को रोककर पूछा, ‘तुम कौन हो?’ लकड़हारे ने कहा, ‘मैं अपने मन का राजा हूं।’ भोज ने पूछा, ‘अगर तुम राजा हो तो तुम्हारी आमदनी भी बहुत होगी। कितना कमाते हो?’ लकड़हारा बोला, ‘मैं छह स्वर्ण मुद्राएं रोज कमाता हूं और आनंद से रहता हूं।’ भोज ने पूछा, ‘तुम इन मुद्राओं को खर्च कैसे करते हो?’ लकड़हारे ने उत्तर दिया, ‘मैं प्रतिदिन एक मुद्रा अपने ऋणदाता को देता हूं। वह हैं मेरे माता पिता। उन्होंने मुझे पाल पोस कर बड़ा किया, मेरे लिए हर कष्ट सहा। दूसरी मुद्रा मैं अपने ग्राहक असामी को देता हूं ,वह हैं मेरे बालक। मैं उन्हें यह ऋण इसलिए देता हूं ताकि मेरे बूढ़े हो जाने पर वह मुझे इसे लौटाएं।

तीसरी मुद्रा मैं अपने मंत्री को देता हूं। भला पत्नी से अच्छा मंत्री कौन हो सकता है, जो राजा को उचित सलाह देता है ,सुख दुख का साथी होता है। चौथी मुद्रा मैं खजाने में देता हूं। पांचवीं मुद्रा का उपयोग स्वयं के खाने पीने पर खर्च करता हूं क्योंकि मैं अथक परिश्रम करता हूं। छठी मुद्रा मैं अतिथि सत्कार के लिए सुरक्षित रखता हूं क्योंकि अतिथि कभी भी किसी भी समय आ सकता है। उसका सत्कार करना हमारा परम धर्म है।’ राजा भोज सोचने लगे, ‘मेरे पास तो लाखों मुद्राएं है पर जीवन के आनंद से वंचित हूं।’ लकड़हारा जाने लगा तो बोला, ‘राजन् मैं पहचान गया था कि तुम राजा भोज हो पर मुझे तुमसे क्या सरोकार।’ भोज दंग रह गए।

 


ब्रह्माकुमारीज् की प्रमुख खबरें -

 

 

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बोध कथा-

विचार की पवित्रता

एक राजा और नगर सेठ में गहरी मित्रता थी। वे रोज एक दूसरे से मिले बिना नहीं रह पाते थे। नगर सेठ चंदन की लकड़ी का व्यापार करता था। एक दिन उसके मुनीम ने बताया कि लकड़ी की बिक्री कम हो गई है। तत्काल सेठ के मन में यह विचार कौंधा कि अगर राजा की मृत्यु हो जाए, तो मंत्रिगण चंदन की लकडि़यां उसी से खरीदेंगे। उसे कुछ तो मुनाफा होगा। शाम को सेठ हमेशा की तरह राजा से मिलने गया। उसे देख राजा ने सोचा कि इस नगर सेठ ने उससे दोस्ती करके न जाने कितनी दौलत जमा कर ली है, ऐसा कोई नियम बनाना होगा जिससे इसका सारा धन राज खजाने में जमा हो जाए।
दोनों इसी तरह मिलते रहे, लेकिन पहले वाली गर्मजोशी नहीं रही। एक दिन नगर सेठ ने पूछ ही लिया, ‘पिछले कुछ दिनों से हमारे रिश्तों में एक ठंडापन आ गया है। ऐसा क्यों?’ राजा ने कहा, ‘मुझे भी ऐसा लग रहा है। चलो, नगर के बाहर जो महात्मा रहते हैं, उनसे इसका हल पूछा जाए।’ उन्होंने महात्मा को सब कुछ बताया। महात्मा ने कहा, ‘सीधी सी बात है। आप दोनों पहले शुद्ध भाव से मिलते रहे होंगे, पर अब संभवत: एक दूसरे के प्रति आप लोगों के मन में कुछ बुरे विचार आ गए हैं इसलिए मित्रता में पहले जैसा सुख नहीं रह गया।’ नगर सेठ और राजा ने अपने-अपने मन की बातें कह सुनाईं। महात्मा ने सेठ से कहा,’ तुमने ऐसा क्यों नहीं सोचा कि राजा के मन में चंदन की लकड़ी का आलीशान महल बनवाने की बात आ जाए? इससे तुम्हारा चंदन भी बिक जाता। विचार की पवित्रता से ही संबंधों में मिठास आती है। तुमने राजा के लिए गलत सोचा इसलिए राजा के मन में भी तुम्हारे लिए अनुचित विचार आया। गलत सोच ने दोनों के बीच दूरी बढ़ा दी। अब तुम दोनों प्रायश्चित करके अपना मन शुद्ध कर लो, तो पहले जैसा सुख फिर से मिलने लगेगा।’ 5  

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विश्व और भारत महत्वपूर्ण दिवस


 देश विदेश के सेवाकेंद्रो द्वारा सेवायें


 

 


 

 

31 मार्च (कोरबा) नारी सुरक्षा अभियान. मानिकपुर में नारी सुरक्षा अभियान अंतर्गत व्याख्यान संपन्न हुआ


 

 

30 मार्च (राजिम) राज्यपाल महोदय को ई·ारीय संदेश. छत्तीसगढ़ के मान. राज्यपाल महामहिम शेखरदत्त जी को ई·ारीय संदेश दिया बहन पुष्पाने. इनके साथ ब्रा.कु. नारायणभाई और सांसद चन्दूलालजी उपस्थित थे.


 

29 मार्च (पिंपरी:पुना) शिवज्ञान दर्शन मेला. ब्र.कु पारुदीदी, ब्र.कु. सुरेखा बहन, उद्योजक संदिप वाघेरे इनके करकमलोंद्वारा इसका उदघाटन किया गया.


 

28 मार्च (बोरवली:मुंबई) दिव्या बहन को वूमन ऑफ एक्सलन्स अवार्ड. आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में लाला लजपतराय इन्सिस्ट¬ूट आफ मॅनेजमेंट की औरसे ब्राहृाकुमारी दिव्या बहन को आध्यत्मिक क्षेत्र में अद्वितीय कार्य करने पर वूमन ऑफ एक्सलन्स अवार्ड से सम्मानित किया गया. डा. कमल गुप्ताजी, चेअरमन एलएलआय ने सम्मानित किया.


 

27 मार्च (अंजार-कच्छ:गुज.) रतनमणी मेटल एण्ड ट¬ूब लि. में कार्यक्रम. मुंदरा सेवाकेंद्र से ब्रा.कु. सुशला बहन ने मोटीवेशनल ट्रेनिंग शिविर करवाया.


 

26 मार्च (सायन:मुंबई) शांती उद्यान में महिला दिवस. आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष मंे ब्राहृाकुमारी संतोषदिदीजी के प्रमुख उपस्थित में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. वरीष्ठ इन्स्पेक्टर बहन सुजाथा को इस समय ई·ारीय संदेश दिया गया.


 

25 मार्च (गुलबर्गा) 47 फिट शिवलिंग का भव्य आयोजन. विशाल द्वादर्श ज्योतिलिंग अमृतसरोवर में 5000 स्केअर फिट जगह पर किया गया. हर रोज दो हजार के करीब श्रद्धालु दर्शन करने आते थे.


 

24 मार्च (नेपाल) फ्यूचर ऑफ पावर. समाज के गणमान्य व्यक्तियों के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन पोखरा में किया गया.


 

23 मार्च (शांतीवन) रेडिओ मधुबन ने मनाया महिला दिवस. आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में, नारित्व दर्शन कार्यक्रम का आयाजन ब्राहृाकुमारीज् सामुदायीक रेडिओ स्टेशन , रेडिओ मधुबन ने आयोजित किया.


 

22 मार्च (बार्शी) महिला दिवस मनाया गया. सेवाकेंद्र की औरसे आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया

 


 

21 मार्च (मनीपाल:कर्ना.) 35 फिट महाशिवलिंग. शहर के मुख्य स्थान के सर्कल में भगवान शिव की 35 फिट शिवलिंग की भव्य प्रतिमा लगाई गई.


 

20 मार्च (विलेपार्ले:मुंबई) टीवी तथा फिल्म कलाकरोंने मनाई शिवरात्री. लाखंण्डवाला क्षेत्र में टीवी तथा फिल्म कलाकर डाली बींद्रा, श्रीमती ज्योत्सना डिगे आदियांेने शिवजयंती मनाई.


 

19 मार्च (चेंबुर:मुंबई) 40 फिट शिवलिंग दर्शन. पहली बार भगवान शिव के 40 फिट ऊँचाईवाले शिवलिंगका दर्शन लिया श्रद्धालुओंने.


 

18 मार्च (मुंबई) नारी सुरक्षा, हमारी सुरक्षा. महिला सशक्तिकरण हेतु निकाली गई रॅली. समाज की सभी वर्गो की महिलाओं लिया हिस्सा.


 

17 मार्च (बैंगलौर) शिवजयंती महोत्सव. भगवान शिव का भव्य ज्योतिलिंग स्थापन किया गया.शिवलिंगका दर्शन लिया श्रद्धालुओंने.


 

16 मार्च (बार्शी) शिवजयंती महोत्सव. भ.के. गव्हाने, पत्रकार, विनोद बुडूख, अध्यक्ष लायन्स कल्ब, प्रकाश महामुनी, अध्यक्ष, लायन्स क्लब, तेजस बखारीया, अध्यक्ष, रोटरी क्लब, मोहनभाई, संगीत बहन, वर्षा बहन, राणी बहन महादेवी बहन वैजिनाथभाई आदियोंने किया शिवध्वजारोहण.


 

15 मार्च (चेन्नई) बारा ज्योतिलिंगम् दर्शन. शहर मंे भगवान शिव के बारा ज्योतिलिंगर्म दर्शन करने हेतु भव्य चैतन्य आयोजन किया गया.


14 मार्च (बेलापूर:मुंबई) शिवजयंती महोत्सव. भ्राता मंदा म्हात्रे,पूर्व विधायक, बहन स्नेहल पाठक, टीवी कलाकार, भ्राता आर सी सिंग, बीके शिला, बीके शुभांगी , बीके मिना ने किया उदघाटन


 

13 मार्च (अजमेर) भव्य शिवलिंग का निर्माण. शिवजयंती महोत्सवपर 15फिट का भव्य शिवलिंग का निर्माण किया गया जिसका दर्शन शहर के हजारों श्रद्धालुओंने लिया.


 

12 मार्च (केशोद) शिवजयंती महोत्सव. विधायक भ्राता अरविंदभाई लाडाणी, रोटरी क्लब के प्रमुख भ्राता कांतीभाई चुडासमा, जेसीस के प्रमुख भ्राता रजनीभाई फडदु, प्रो. डो. भुपेन्द्रभाई जेपी तथा बीके रुपा बहन उपस्थित थे


 

11 मार्च (मालाड:लिबर्टी गार्डन) गीतकार श्रवणकुमार पहुंचे शिवरात्रीपर . परमात्मा शिव की मनोरम्य झाँकी.  शिवजयंती महोत्सव पर शिवजयंती की झाँकि निकाली गई. जिसका उदघाटन शोभा बहन, कॅप्टर जीहेना, कॅ. पूनम, बीके राजबेन, बीके कुंती बहन, म्युझीक डायरेक्टर श्रवणकुमार, गीतकार डेबूजीत, चांदमिश्रा, निरजाबहन आदियों के करकमलोंद्वारा किया उदघाटन


 

10 मार्च (कोरबा) शिव शंकर झाँकि. शिवजयंती महोत्सव पर शिवजयंती की झाँकि निकाली गई.


 

09 मार्च (ग्वालियर) शिवजयंती महोत्सव. सेवाकेंद्रकी औरसे शिवजयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया.


 

08 मार्च (नासिक) डो. भटकर सेवाकेंद्रपर. सीडॅक के प्रणेता तथा सुपर कम्प्युटर के जनक डो. विजय भटकर सेवाकेंद्र पर पहुंचे तथा राजयोग अनुभूती की.


 

 

07 मार्च (मालाड:दिडोंशी) सड़क निर्माण में ब्र.कु. योगदान. शहर विकास के अंतर्गत सड़क निर्माण योजना में ब्रह्माकुमारी बहनों ने प्रवचन दिया.


 

06 मार्च (ग्वालीयर:दिनलयाल नगर) शिवपार्वती झाँकि. शिवजयंती महोत्सव पर शिवजयंती की झाँकि निकाली गई.


 


05 मार्च (बाणेर) अमरनाथ की भव्य गुफाये. शिवजयंती महोत्सव पर भव्य अमरनाथ गुफाओं का निर्माण किया गया. जिससे बहोतही सुंदर सेवायें हुई.


04 मार्च (बेलगाम) विश्व की सबसे बडी पतंग. ब्रह्माकुमारीज् की औरसे विश्व की सबसे बडी पतंग का निर्माण किया गया इसमें शिवसंदेश दिया गया. 203 फिट पतंग का निर्माण किया गया.

 


 

03 मार्च (शांतीवन) शिवध्वजारोहण. शिवरात्री महोत्सव पर परमात्मा शिव का ध्वज लहराया बापदादा, दादी जानकीजी तथा वरीष्ठ दादी, भाईयोंने


02 मार्च (हातीना:गुज) महिला सम्मेलनसंपन्न. वडोदरा से पोरबंदर नारी सशक्तिकरण अभियान अंतर्गत कार्यक्रम संपन्न हुआ


 

01 मार्च (गुडगांव) ओआरसी में प्रशासक डायलाग. प्रशासक प्रभाग आयोजित इस सेमिनार में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.


 

8 मई 2012 कोविश्वभरमेंथैलेसीमियादिवसमनायागया

 

 

थैलेसीमिया दिवस: 8 मई


विश्वभर में 8 मई 2012 को थैलेसीमिया दिवस मनाया गया. थैलेसीमिया दिवस का मकसद लोगों को थैलेसीमिया के प्रति जागरूक कराना है. ज्ञातव्य हो कि थैलेसीमिया से ग्रस्त मरीज के खून में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बनतीं. जो बनती भी हैं, वे जल्दी ही खत्म हो जाती हैं. इसके अलावा मरीज का हिमोग्लोबिन स्तर भी कम हो जाता है. यह बीमारी बच्चों में पाई जाती है. सही समय पर उपचार में कमी होने से 15-16 साल की उम्र में मरीज की मौत भी हो सकती है.

 

nt-fam� '"i�G �%oman"; color:black'>अवसर पर हमारे देश ने उन्हें पुनः पुर्नजीवित करने का प्रयास किया जब इस अवसर पर उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया।

 

 

e�Dn-�%�*pt; font-family:"Georgia","serif";mso-bidi-font-family:Georgia;color:black'> प्रभावित होता है. 

इस बीमारी की चपेट में आने के बालिकाओं के मुकाबले बालकों की ज्‍यादा संभावना है. इस बीमारी को पहचानने का कोई निश्चित तरीका ज्ञात नहीं है, लेकिन जल्‍दी निदान हो जाने की स्थिति में सुधार लाने के लिए कुछ किया जा सकता है. दुनियाभर में यह बीमारी पाई जाती है और इसका असर बच्‍चों, परिवारों, समुदाय और समाज पर पड़ता है.

 

 

04 दिसम्बर (अकोला) तनाव मुक्त शिविर. राजयोगीनी ब्रहमाकुमारी गीता बहन, मा. आबू इनके तीन दिवसीय तनावमुक्त शिविर संपन्न हुआ.

 

31 दिसम्बर (गोवा:कोंकण) गीता पाठशाला का शुभारम्भ. नवनिर्मित गीता पाठशाला का उदघाटन संपन्न हुआ.


 

30 दिसम्बर (अमरिका) डा. बीन्नी बहन की अमरिका सेवायात्रा. बीके डा. बीन्नी बहन के राजयोग ध्यानाभ्यास विषयपर विशेष व्याख्यान संपन्न हुए.


 

29 दिसम्बर (फरिदाबाद) प्युचर आफ पावर. भ्राता निझारभाई जुमाभाईजी आयोजित प्युचर आफ पावर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. अतिविशिष्ट व्यक्तियों को राजयोग संदेश दिया गया.


 

 
28 दिसम्बर (मड़गांव:गोवा)
 महिला सशक्तिकरण. ग्रामीण महिला सशक्तिकरण अभियान का सफल आयोजन किया गया जिसका उदघाटन ब्रा.कु. शोभा, बहन बेला नाईक, जज ब्राहमाकुमार भगवान भाई, आबू पर्वत श्रीमती नूतन कामत, बीके सुरेखा बहन इनके शुभकरकमलोद्वारा संपन्न हुआ.


 

 

27 दिसम्बर (शिकागो) डॉ. बीन्नी बहन का शिकागो में व्याख्यान. स्वामी विवेकानंद जयंती के उपलक्ष में बीके डा. बीन्नी बहन का राजयोग ध्यानाभ्यास विषयपर विशेष व्याख्यान संपन्न हुआ.


 

26 दिसम्बर (कोलाबा) स्ट्रेस मॅनेजमेंट शिविर. पश्चिम रेल्वे अधिकारीयों के लिए विशेष स्ट्रेस मॅनेजमेंट शिविर का आयोजन किया गया. जिसमे ब्रा.कु. गायत्री बहन का विशेष व्याख्यान संपन्न हुआ.


25 दिसम्बर (कोंकण:गोवा) सर्व धर्म सम्मेलन संपन्न. स्थानिय सेवाकेंद्र की ओरसे विशेष सर्वधर्म सम्मेलन का विशेष आयोजन किया गया. ब्रा.कु. भगवानभाई माऊंट आबू की विशेष उपस्थितीत थी. ब्रा.कु. शोभा बहनने ई·ारीय संदेश दिया.


24 दिसम्बर (ग्वालियर) योगतपस्या भटटी. महाराजपूर सेवाकेंद्र की औरसे लष्कर सेवाकेंद्र की भाई बहनों की विशेष राजयोग तपस्या योगभट्टी का आयोजन किया गया. ब्रा.कु. राधाबहन, ज्योतीबहनने विशेष अभ्यास करवाया.


23 दिसम्बर (मालाड:मुंबई) मेडिकल कॅम्प का भव्य आयोजन. सेवाकेंद्र कीऔरसे आयोजित भव्य मेडिकल कॅम्प का उदघाटन कुंती बहन, फिल्म एक्टर राहूल राय, कुनीकलाल के शुभहस्तों से किया गया.


22 दिसम्बर (आबू रोड) राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण अभियान. इनर्जी कन्झरवेशन दिवस के उपक्ष में होलिस्टीक अप्रोच टुवर्डस एनर्जी कन्झरवेशन विषयपर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. नई देहली के भ्राता सुनिल सूद, एनर्जी ऑडिटर और संस्थापक अध्यक्ष आयएईएमपी इनकी विशेष उपस्थिती थी.


21 दिसम्बर (कोरबा) विधायक जी का सम्मान. नवनिर्वाचित विधायक भ्राता जयसिंहजी अग्रवाल का विशेष सम्मान स्थानिय सेवाकेंद्र की औरसे बहन रुकमणीजी के किया गया. विधायकजीने ब्राहमाकुमारीज गतिविधीयों पर प्रसन्नता जताई तथा आध्यात्मिक प्रगती के लिए आशावाद जाहिर किया


20 दिसम्बर (पानीपत) मुख्यमंत्री महोदय द्वारा शिलान्यास. हरियाणा के मुख्यमंत्री मा. भ्राता भुपेंदर सिंग हुडा जी के शुभकरकमलोंद्वारा युव्र्हसील पिस ऑडोटोरियम का शिलान्यास संपन्न हुआ. इस अवसपर पर अतिविशिष्ट व्यक्ति उपस्थित थे.


19 दिसम्बर (ब्राज़िल) निर्मलादीदीजी की ब्राज़िल सेवायात्रा. सेलिंग द वेव्ज् आफ पीस एण्ड हेप्पीनेस विषयपर निर्मलादीदीजी का विशेष व्याख्यान फिस्टा शहर में आयोजित किया गया. दीदीजी के ब्रााजील सेवायात्रा में कई व्याख्यान संपन्न हुए.


18 दिसम्बर (आबूरोड) गॉडलिवूड का वेबटीवी चॅनल. गॉडलीवूड.आर्ग वेबपोर्टल पर वेब टीवी का शुभारम्भ किया गया.


17 दिसम्बर (जलगांव:महाराष्ट्र) नार्थ महाराष्ट्र वि·ाविद्यालय में कार्यक्रम. वि·ाविद्यालय के संगीत विभाग में कला तथा सांस्कृतिक प्रभाग के कार्यक्रम संपन्न  हूए


16 दिसम्बर (चोपडा:महाराष्ट्र) कला सांस्कृतिक प्रभाग कार्यक्रम. चोपडा जि. जलगांव में कला एवम सांस्कृतिक प्रभाग के विभिन्न कार्यक्रम संपन्न हुए


15 दिसम्बर (रायपुर छ.ग.) विधायक भ्राता डॉ. रमनसिंजी का सम्मान. विधानसीाा चुनाव में लगातार तीसरी बार विजय प्राप्त करने पर मुख्यमंत्री भ्राता डा. रमनसिंजी का गुलदस्ता भेंट कर सम्मान किया इंदौर ज़ोन की क्षेत्रीय प्रशसिका ब्राहमाकुमारी कमला बहनने.


14 दिसम्बर (सर्वे:गोवा) दवा के साथ दुवा की जरुरुत - भगवान भाई. सर्वे शहर के डाक्टर भाई बहनों के लिए आयोजित विशेष प्रवचन में माऊंट आबू के भगवानभाईने यह बात कही


13 दिसम्बर (ग्वालियर) माइण्ड मॅनेजमेंट प्रोग्राम. गोदरेज कन्झुमर प्रोडक्टस् लि. मालनपूर में बीके प्रल्हाद, बीके ज्योती बहनने माइण्ड मॅनेजमेंट विषयपर कार्यशाला का संचलन किया.


 

 

12 दिसम्बर (देहली) हेपीनेस फारएवर. श्री सत्य साई एन्टरनेशनल सेंटर में आयेजित कार्यक्रम में बीके पीयुश, डा सविता आनंद, बीके पुष्पा जस्टीस सुनील गौर, ज. व्ही ई·ारंा, बीके मृत्युंजय, जेके डाडू, आएएस, आदि ने किया उदघाटन


 

11 दिसम्बर (कोलाबा) रेल अफसरों के लिए तनावमुक्त शिविर. बीके स्वामीनाथन् ने दिया रेल अफसरों को तनावमुक्त जीवन जीने की कला की टिप्स


10 दिसम्बर (पानीपत) महिला शक्तिकरण सम्मेलन. बहन आशा हुडा, उपाध्यक्ष हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद, बीके चक्रधारी बहन, बीके भारतभूषण, बीके सरला, जिला परीषद चेअमर ज्योती जागलान आदियोंं के करकमलोंद्वारा उदघाटन हुआ.


 

 

 

09 दिसम्बर (कुरूक्षेत्र) कर्मोसे मनुष्य महान बनता है. माऊंट आबू से पधारे ब्राहमाकुमार भगवान भाई ने जिला सुधार गृह में संस्कार विषय पर प्रवचन दिया.


 

08 दिसम्बर (सोनीपत:हरियाणा) सरस्वती पब्लिक स्कूल में प्रवचन. माऊंट आबू से पधारे ब्राहमाकुमार भगवान भाई ने नैतिक शिक्षा विषयपर प्रवचन दिया.


07 दिसम्बर (ग्वालियर) भूमिपुजन संपन्न. गोल्डन वल्र्ड रिट्रीट सेंटर स्थित सभागार के डोम का भूमिपूजन बीके अवधेश बहनजी, क्षेत्रीय निर्देशिका, भोपाल क्षेत्रके करकमलोद्वारा संपन्न हु


06 दिसम्बर (पुना) सिक्कीम गर्वनर जी को राजयोग संदेश. महामहिम श्रीनिवास दादासाहेब पाटील को ब्र.कु. दिपकभाई, ब्रा.कु. सोमप्रभाबहन ने ई·ारीय संदेश दिया

 


05 दिसम्बर (करनाल) नैतिक शिक्षा से सर्वांगिण विकास. माऊंट आबू से पधारे ब्राहमाकुमार भगवान भाई ने मधुबन पब्लिक स्कूल में प्रवचन दिया.

 


 

04 दिसम्बर (अकोला) तनाव मुक्त शिविर. राजयोगीनी ब्रहमाकुमारी गीता बहन, मा. आबू इनके तीन दिवसीय तनावमुक्त शिविर संपन्न हुआ.

 


 

01 दिसम्बर (युरोप) शिलू बहन की युरोप यात्रा.


 

8 सितम्बर (ज्ञानसरोंवर) आर्ट कल्चर विंग सम्मेलनसंपन्न. कला सांस्कृतिक प्रभाग की रजत जयंती के उपलक्ष में राष्ट्रीय सम्मेलनसंपन्न हुआ. दादी जानकीजी, दादी ह्मदयमोहिनीजी, रमेशभाई, मोहिनी बहन, मुन्नती बहन, कुसूम बहन बॉलीवूड स्टार क्रीस्टना, बॉलीवूड स्टार रती अग्नीहोत्री, चंकीपांडे ने उदघाटन किया.

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