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नया मलयालम टीवी चैनल

कोच्चि: केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री, माननीय। मुरलीधरन ने ब्रह्म कुमारियों का नया मलयालम चैनल लॉन्च किया - मलयाली को समर्पित राजयोग टीवी मलयालम। यह एक पूर्ण चैनल है जो हमारी ज़रूरत की हर चीज़ वितरित करता है। भारतीय दर्शन विज्ञान और अध्यात्म का सामंजस्य है। यह चैनल ब्रह्म कुमारियों की मानवता की समग्र दृष्टि का प्रमाण है। मंत्री ने अपने…

आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

मध्यप्रदेश के राज्य कैबिनेट मंत्री ने आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र प्रदान किया मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन में ब्रह्मा कुमारिस संगठन के प्रयासों की सराहना की। मध्य प्रदेश सरकार में पशुपालन और मत्स्यपालन मंत्री और प्रभारी मंत्री श्री लखन सिंह यादव, मुरैना जिला कलेक्टर, प्रियंका दास के साथ, प्रशासन की ओर से इस…

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर   ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के मेडिकल विंग के स्थानीय सेवाकेंद्र “प्रभु उपहार भवन, माधवगंज लश्कर ग्वालियर” द्वारा निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर का आयोजन किया गया।शिविर में परामर्श देनें के लिए डॉ. निर्मला कंचन (स्त्री रोग विशेषज्ञ), एवं…

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  • भारत के भाई बीके चार्ली की सेवा रिपोर्ट (ऑस्ट्रेलिया) की यात्रा
  • बैंगलोर - ब्रह्मा कुमारियों ने पृथ्वी माता महोत्सव में "प्रकृति मित्र पुरस्कार" से सम्मानित किया

 

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युवा शिविर का सफल आयोजन.

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आज का मुरली प्रवचन
 
 

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  25-01-2020 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन

 


 

“मीठे बच्चे - तुम्हें विकर्मों की सज़ा से मुक्त होने का पुरूषार्थ करना है, इस अन्तिम जन्म में सब हिसाब-किताब चुक्तू कर पावन बनना है”

 

प्रश्न:

 

धोखेबाज माया कौन-सी प्रतिज्ञा तुड़वाने की कोशिश करती है?

 

उत्तर:

 

तुमने प्रतिज्ञा की है - कोई भी देहधारी से हम दिल नहीं लगायेंगे। आत्मा कहती है हम एक बाप को ही याद करेंगे, अपनी देह को भी याद नहीं करेंगे। बाप, देह सहित सबका सन्यास कराते हैं। परन्तु माया यही प्रतिज्ञा तुड़वाती है। देह में लगाव हो जाता है। जो प्रतिज्ञा तोड़ते हैं उन्हें सजायें भी बहुत खानी पड़ती हैं।

 

गीत:-

 

तुम्हीं हो माता-पिता तुम्हीं हो........

 

ओम् शान्ति।

 

ऊंच ते ऊंच भगवान की महिमा भी की है और फिर ग्लानि भी की है। अब ऊंच ते ऊंच बाप खुद आकर परिचय देते हैं और फिर जब रावण राज्य शुरू होता है तो अपनी ऊंचाई दिखाते हैं। भक्ति मार्ग में भक्ति का ही राज्य है इसलिए कहा जाता है रावण राज्य। वह राम राज्य, यह रावण राज्य। राम और रावण की ही भेंट की जाती है। बाकी वह राम तो त्रेता का राजा हुआ, उनके लिए नहीं कहा जाता। रावण है आधाकल्प का राजा। ऐसे नहीं कि राम आधाकल्प का राजा है। नहीं, यह डिटेल में समझने की बातें हैं। बाकी वह तो बिल्कुल सहज बात है समझने की। हम सब भाई-भाई हैं। हम सबका वह बाप एक निराकार है। बाप को मालूम है इस समय हमारे सब बच्चे रावण की जेल में हैं। काम चिता पर बैठ सब काले हो गये हैं। यह बाप जानते हैं। आत्मा में ही सारी नॉलेज है ना। इसमें भी सबसे जास्ती महत्व देना होता है आत्मा और परमात्मा को जानने का। छोटी-सी आत्मा में कितना पार्ट नूंधा हुआ है जो बजाती रहती है। देह-अभिमान में आकर पार्ट बजाते हैं तो स्वधर्म को भूल जाते हैं। अब बाप आकर आत्म अभिमानी बनाते हैं क्योंकि आत्मा ही कहती है कि हम पावन बनें। तो बाप कहते हैं मामेकम् याद करो। आत्मा पुकारती है हे परमपिता, हे पतित-पावन, हम आत्मायें पतित बन गये हैं, आकर हमें पावन बनाओ। संस्कार तो सब आत्मा में हैं ना। आत्मा साफ कहती है हम पतित बने हैं। पतित उनको कहा जाता है जो विकार में जाते हैं। पतित मनुष्य, पावन निर्विकारी देवताओं के आगे जाकर मन्दिर में उनकी महिमा गाते हैं। बाप समझाते हैं बच्चे तुम ही पूज्य देवता थे। 84 जन्म लेते-लेते नीचे जरूर उतरना पड़े। यह खेल ही पतित से पावन, पावन से पतित होने का है। सारा ज्ञान बाप आकर इशारे में समझाते हैं। अभी सबका अन्तिम जन्म है। सबको हिसाब-किताब चुक्तू कर जाना है। बाबा साक्षात्कार कराते हैं। पतित को अपने विकर्मों का दण्ड जरूर भोगना पड़ता है। पिछाड़ी का कोई जन्म देकर ही सजा देंगे। मनुष्य तन में ही सजा खायेंगे इसलिए शरीर जरूर धारण करना पड़ता है। आत्मा फील करती है, हम सजा भोग रहे हैं। जैसे काशी कलवट खाने समय दण्ड भोगते हैं, किये हुए पापों का साक्षात्कार होता है। तब तो कहते हैं क्षमा करो भगवान, हम फिर ऐसा नहीं करेंगे। यह सब साक्षात्कार में ही क्षमा मांगते हैं। फील करते हैं, दु:ख भोगते हैं। सबसे जास्ती महत्व है आत्मा और परमात्मा का। आत्मा ही 84 जन्मों का पार्ट बजाती है। तो आत्मा सबसे पावरफुल हुई ना। सारे ड्रामा में महत्व है आत्मा और परमात्मा का। जिसको और कोई भी नहीं जानते। एक भी मनुष्य नहीं जानता कि आत्मा क्या, परमात्मा क्या है? ड्रामा अनुसार यह भी होना है। तुम बच्चों को भी ज्ञान है कि यह कोई नई बात नहीं, कल्प पहले भी यह चला था। कहते भी हैं ज्ञान, भक्ति, वैराग्य। परन्तु अर्थ नहीं समझते हैं। बाबा ने इन साधुओं आदि का संग बहुत किया हुआ है, सिर्फ नाम ले लेते हैं। अभी तुम बच्चे अच्छी रीति जानते हो कि हम पुरानी दुनिया से नई दुनिया में जाते हैं तो पुरानी दुनिया से जरूर वैराग्य करना पड़े। इनसे क्या दिल लगानी है। तुमने प्रतिज्ञा की है - कोई भी देहधारी से दिल नही लगायेंगे। आत्मा कहती है हम एक बाप को ही याद करेंगे। अपनी देह को भी याद नहीं करेंगे। बाप देह सहित सबका सन्यास कराते हैं। फिर औरों की देह से हम लगाव क्यों रखें। कोई से लगाव होगा तो उनकी याद आती रहेगी। फिर ईश्वर याद आ न सके। प्रतिज्ञा तोड़ते हैं तो सज़ा भी बहुत खानी पड़ती है, पद भी भ्रष्ट हो जाता है इसलिए जितना हो सके बाप को ही याद करना है। माया तो बड़ी धोखेबाज है। कोई भी हालत में माया से अपने को बचाना है। देह-अभिमान की बहुत कड़ी बीमारी है। बाप कहते हैं अब देही-अभिमानी बनो। बाप को याद करो तो देह-अभिमान की बीमारी छूट जाए। सारा दिन देह-अभिमान में रहते हैं। बाप को याद बड़ा मुश्किल करते हैं। बाबा ने समझाया है हथ कार डे दिल यार डे। जैसे आशिक माशूक धन्धा आदि करते भी अपने माशूक को ही याद करते रहते। अब तुम आत्माओं को परमात्मा से प्रीत रखनी है तो उनको ही याद करना चाहिए ना। तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट ही है कि हमको देवी-देवता बनना है, उसके लिए पुरूषार्थ करना है। माया धोखा तो जरूर देगी, अपने को उनसे छुड़ाना है। नहीं तो फँस मरेंगे फिर ग्लानि भी होगी, नुकसान भी बहुत होगा।
तुम बच्चे जानते हो कि हम आत्मा बिन्दी हैं, हमारा बाप भी बीजरूप नॉलेजफुल है। यह बड़ी वन्डरफुल बातें हैं। आत्मा क्या है, उसमें कैसे अविनाशी पार्ट भरा हुआ है-इन गुह्य बातों को अच्छे-अच्छे बच्चे भी पूरी तरह नहीं समझते हैं। अपने को यथार्थ रीति आत्मा समझें और बाप को भी बिन्दी मिसल समझ याद करें, वह ज्ञान का सागर है, बीजरूप है..... ऐसा समझ बड़ा मुश्किल याद करते हैं। मोटे ख्यालात से नहीं, इसमें महीन बुद्धि से काम लेना होता है-हम आत्मा हैं, हमारा बाप आया हुआ है, वह बीजरूप नॉलेजफुल है। हमको नॉलेज सुना रहे हैं। धारणा भी मुझ छोटी-सी आत्मा में होती है। ऐसे बहुत हैं जो मोटी रीति सिर्फ कह देते हैं-आत्मा और परमात्मा..... लेकिन यथार्थ रीति बुद्धि में आता नहीं है। ना से तो मोटी रीति याद करना भी ठीक है। परन्तु वह यथार्थ याद जास्ती फलदायक है। वह इतना ऊंच पद पा नहीं सकेंगे। इसमें बड़ी मेहनत है। मैं आत्मा छोटी-सी बिन्दु हूँ, बाबा भी इतनी छोटी-सी बिन्दु है, उनमें सारा ज्ञान है, यह भी यहाँ तुम बैठे हो तो कुछ बुद्धि में आता है लेकिन चलते-फिरते वह चिंतन रहे, सो नहीं। भूल जाते हैं। सारा दिन वही चिंतन रहे-यह है सच्ची-सच्ची याद। कोई सच बताते नहीं हैं कि हम कैसे याद करते हैं। चार्ट भल भेजते हैं परन्तु यह नहीं लिखते कि ऐसे अपने को बिन्दी समझ और बाप को भी बिन्दी समझ याद करता हूँ। सच्चाई से पूरा लिखते नहीं हैं। भल बहुत अच्छी-अच्छी मुरली चलाते हैं परन्तु योग बहुत कम है। देह-अभिमान बहुत है, इस गुप्त बात को पूरा समझते नहीं, सिमरण नहीं करते हैं। याद से ही पावन बनना है। पहले तो कर्मातीत अवस्था चाहिए ना। वही ऊंच पद पा सकेंगे। बाकी मुरली बजाने वाले तो ढेर हैं। लेकिन बाबा जानते हैं योग में रह नहीं सकते। विश्व का मालिक बनना कोई मासी का घर थोड़ेही है। वह अल्पकाल के मर्तबे पाने के लिए भी कितना पढ़ते हैं। सोर्स ऑफ इनकम अब हुई है। आगे थोड़ेही बैरिस्टर आदि इतना कमाते थे। अभी कितनी कमाई हो गई है।
बच्चों को अपने कल्याण के लिए एक तो अपने को आत्मा समझ यथार्थ रीति बाप को याद करना है और त्रिमूर्ति शिव का परिचय औरों को भी देना है। सिर्फ शिव कहने से समझेंगे नहीं। त्रिमूर्ति तो जरूर चाहिए। मुख्य हैं ही दो चित्र त्रिमूर्ति और झाड़। सीढ़ी से भी झाड़ में जास्ती नॉलेज है। यह चित्र तो सबके पास होने चाहिए। एक तरफ त्रिमूर्ति गोला, दूसरे तरफ झाड़। यह पाण्डव सेना का फ्लैग (झण्डा) होना चाहिए। ड्रामा और झाड़ की नॉलेज भी बाप देते हैं। लक्ष्मी-नारायण, विष्णु आदि कौन हैं? यह कोई समझते नहीं। महालक्ष्मी की पूजा करते हैं, समझते हैं लक्ष्मी आयेगी। अब लक्ष्मी को धन कहाँ से आयेगा? 4 भुजा वाले, 8 भुजा वाले कितने चित्र बना दिये हैं। समझते कुछ भी नहीं। 8-10 भुजा वाला कोई मनुष्य तो होता नहीं। जिसको जो आया सो बनाया, बस चल पड़ा। कोई ने मत दी कि हनुमान की पूजा करो बस चल पड़ा। दिखाते हैं संजीवनी बूटी ले आया... उसका भी अर्थ तुम बच्चे समझते हो। संजीवनी बूटी तो है मन्मनाभव! विचार किया जाता है जब तक ब्राह्मण न बनें, बाप का परिचय न मिले तब तक वर्थ नाट ए पेनी है। मर्तबे का मनुष्यों को कितना अभिमान है। उन्हों को तो समझाने में बड़ी मुश्किलात है। राजाई स्थापन करने में कितनी मेहनत लगती है। वह है बाहुबल, यह है योगबल। यह बातें शास्त्रों में तो हैं नहीं। वास्तव में तुम कोई शास्त्र आदि रेफर नहीं कर सकते हो। अगर तुमको कहते हैं - तुम शास्त्रों को मानते हो? बोलो हाँ यह तो सब भक्ति मार्ग के हैं। अभी हम ज्ञान मार्ग पर चल रहे हैं। ज्ञान देने वाला ज्ञान का सागर एक ही बाप है, इनको रूहानी ज्ञान कहा जाता है। रूह बैठ रूहों को ज्ञान देते हैं। वह मनुष्य, मनुष्य को देते हैं। मनुष्य कभी प्रीचुअल नॉलेज दे न सकें। ज्ञान का सागर पतित-पावन, लिबरेटर, सद्गति दाता एक ही बाप है।
बाप समझाते रहते हैं यह-यह करो। अब देखें शिवजयन्ती पर कितना धमपा मचाते हैं। ट्रांसलाइट के चित्र छोटे भी हों जो सबको मिल जाएं। तुम्हारी तो है बिल्कुल नई बात। कोई समझ न सके। खूब अखबारों में डालना चाहिए। आवाज़ करना चाहिए। सेन्टर्स खोलने वाले भी ऐसे चाहिए। अभी तुम बच्चों को ही इतना नशा नहीं चढ़ा हुआ है। नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार समझाते हैं। इतने ढेर ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ हैं। अच्छा, ब्रह्मा का नाम निकाल कोई का भी नाम डालो। राधे कृष्ण का नाम डालो। अच्छा फिर ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ कहाँ से आयेंगे? कोई तो ब्रह्मा चाहिए ना, जो मुख वंशावली बी.के. हों। बच्चे आगे चलकर बहुत समझेंगे। खर्चा तो करना ही पड़ता है। चित्र तो बड़े क्लीयर हैं। लक्ष्मी-नारायण का चित्र बहुत अच्छा है। अच्छा!
मीठे-मीठे सिकीलधे सर्विसएबुल, आज्ञाकारी, फरमानबरदार, नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

अव्यक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए विशेष होमवर्क
सम्पूर्ण फरिश्ता वा अव्यक्त फरिश्ता की डिग्री लेने के लिए सर्व गुणों में फुल बनो। नॉलेजफुल के साथ-साथ फेथ-फुल, पावरफुल, सक्सेसफुल बनो। अभी नाज़ुक समय में नाज़ों से चलना छोड़ विकर्मो और व्यर्थ कर्मो को अपने विकराल रूप (शक्ति रूप) से समाप्त करो।

 

धारणा के लिए मुख्य सार:

 

1) कर्मातीत बनने के लिए बाप को महीन बुद्धि से पहचान कर यथार्थ याद करना है। पढ़ाई के साथ-साथ योग पर पूरा अटेन्शन देना है।

 

2) स्वयं को माया के धोखे से बचाना है। कोई की भी देह में लगाव नहीं रखना है। सच्ची प्रीत एक बाप से रखनी है। देह-अभिमान में नहीं आना है।

 

वरदान:

 

समय के महत्व को जान स्वयं को सम्पन्न बनाने वाले विश्व के आधारमूर्त भव

 

सारे कल्प की कमाई का, श्रेष्ठ कर्म रूपी बीज बोने का, 5 हजार वर्ष के संस्कारों का रिकार्ड भरने का, विश्व कल्याण वा विश्व परिवर्तन का यह समय चल रहा है। यदि समय के ज्ञान वाले भी वर्तमान समय को गंवाते हैं या आने वाले समय पर छोड़ देते हैं तो समय के आधार पर स्वयं का पुरूषार्थ हुआ। लेकिन विश्व की आधारमूर्त आत्मायें किसी भी प्रकार के आधार पर नहीं चलती। वे एक अविनाशी सहारे के आधार पर कलियुगी पतित दुनिया से किनारा कर स्वयं को सम्पन्न बनाने का पुरूषार्थ करती हैं।

 

स्लोगन:

 

स्वयं को सम्पन्न बना लो तो विशाल कार्य में स्वत:सहयोगी बन जायेंगे।

 

 


 

   बीकेवार्ता वेबपोर्टल : उदघाटन के ऐतिहासिक क्षण प्रकाशन शुभारम्भ दि 28 नवम्बर, 2009


  

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 विश्व पर्यावरण दिवस

संयुक्त राष्ट्र द्वारा सकारात्मक पर्यावरण कार्य हेतु दुनियाभर में मनाया जाने वाला 'विश्व पर्यावरण दिवस' सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण और जीवन का अन्योन्याश्रित संबंध है तथापि हमें अलग से यह दिवस मनाकर पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लेने की आवश्यकता पड़ रही है। यह चिंताजनक ही नहीं, शर्मनाक भी है। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टाकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। इसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया। इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का जन्म हुआ तथा प्रति वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस आयोजित करके नागरिकों कोप्रदूषण की समस्या से अवगत कराने का निश्चय किया गया। तथा इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम जनता को प्रेरित करना था। उक्त गोष्ठी में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने 'पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव' विषय पर व्याख्यान दिया था। पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में यह भारत का प्रारंभिक क़दम था। तभी से हम प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाते आ रहे हैं।

 


 

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संस्कार धन - बोध कथा  : मन का राजा 

राजा भोज वन में शिकार करने गए लेकिन घूमते हुए अपने सैनिकों से बिछुड़ गए और अकेले पड़ गए। वह एक वृक्ष के नीचे बैठकर सुस्ताने लगे। तभी उनके सामने से एक लकड़हारा सिर पर बोझा उठाए गुजरा। वह अपनी धुन में मस्त था। उसने राजा भोज को देखा पर प्रणाम करना तो दूर, तुरंत मुंह फेरकर जाने लगा।
भोज को उसके व्यवहार पर आश्चर्य हुआ। उन्होंने लकड़हारे को रोककर पूछा, ‘तुम कौन हो?’ लकड़हारे ने कहा, ‘मैं अपने मन का राजा हूं।’ भोज ने पूछा, ‘अगर तुम राजा हो तो तुम्हारी आमदनी भी बहुत होगी। कितना कमाते हो?’ लकड़हारा बोला, ‘मैं छह स्वर्ण मुद्राएं रोज कमाता हूं और आनंद से रहता हूं।’ भोज ने पूछा, ‘तुम इन मुद्राओं को खर्च कैसे करते हो?’ लकड़हारे ने उत्तर दिया, ‘मैं प्रतिदिन एक मुद्रा अपने ऋणदाता को देता हूं। वह हैं मेरे माता पिता। उन्होंने मुझे पाल पोस कर बड़ा किया, मेरे लिए हर कष्ट सहा। दूसरी मुद्रा मैं अपने ग्राहक असामी को देता हूं ,वह हैं मेरे बालक। मैं उन्हें यह ऋण इसलिए देता हूं ताकि मेरे बूढ़े हो जाने पर वह मुझे इसे लौटाएं।

तीसरी मुद्रा मैं अपने मंत्री को देता हूं। भला पत्नी से अच्छा मंत्री कौन हो सकता है, जो राजा को उचित सलाह देता है ,सुख दुख का साथी होता है। चौथी मुद्रा मैं खजाने में देता हूं। पांचवीं मुद्रा का उपयोग स्वयं के खाने पीने पर खर्च करता हूं क्योंकि मैं अथक परिश्रम करता हूं। छठी मुद्रा मैं अतिथि सत्कार के लिए सुरक्षित रखता हूं क्योंकि अतिथि कभी भी किसी भी समय आ सकता है। उसका सत्कार करना हमारा परम धर्म है।’ राजा भोज सोचने लगे, ‘मेरे पास तो लाखों मुद्राएं है पर जीवन के आनंद से वंचित हूं।’ लकड़हारा जाने लगा तो बोला, ‘राजन् मैं पहचान गया था कि तुम राजा भोज हो पर मुझे तुमसे क्या सरोकार।’ भोज दंग रह गए।

 


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बोध कथा-

विचार की पवित्रता

एक राजा और नगर सेठ में गहरी मित्रता थी। वे रोज एक दूसरे से मिले बिना नहीं रह पाते थे। नगर सेठ चंदन की लकड़ी का व्यापार करता था। एक दिन उसके मुनीम ने बताया कि लकड़ी की बिक्री कम हो गई है। तत्काल सेठ के मन में यह विचार कौंधा कि अगर राजा की मृत्यु हो जाए, तो मंत्रिगण चंदन की लकडि़यां उसी से खरीदेंगे। उसे कुछ तो मुनाफा होगा। शाम को सेठ हमेशा की तरह राजा से मिलने गया। उसे देख राजा ने सोचा कि इस नगर सेठ ने उससे दोस्ती करके न जाने कितनी दौलत जमा कर ली है, ऐसा कोई नियम बनाना होगा जिससे इसका सारा धन राज खजाने में जमा हो जाए।
दोनों इसी तरह मिलते रहे, लेकिन पहले वाली गर्मजोशी नहीं रही। एक दिन नगर सेठ ने पूछ ही लिया, ‘पिछले कुछ दिनों से हमारे रिश्तों में एक ठंडापन आ गया है। ऐसा क्यों?’ राजा ने कहा, ‘मुझे भी ऐसा लग रहा है। चलो, नगर के बाहर जो महात्मा रहते हैं, उनसे इसका हल पूछा जाए।’ उन्होंने महात्मा को सब कुछ बताया। महात्मा ने कहा, ‘सीधी सी बात है। आप दोनों पहले शुद्ध भाव से मिलते रहे होंगे, पर अब संभवत: एक दूसरे के प्रति आप लोगों के मन में कुछ बुरे विचार आ गए हैं इसलिए मित्रता में पहले जैसा सुख नहीं रह गया।’ नगर सेठ और राजा ने अपने-अपने मन की बातें कह सुनाईं। महात्मा ने सेठ से कहा,’ तुमने ऐसा क्यों नहीं सोचा कि राजा के मन में चंदन की लकड़ी का आलीशान महल बनवाने की बात आ जाए? इससे तुम्हारा चंदन भी बिक जाता। विचार की पवित्रता से ही संबंधों में मिठास आती है। तुमने राजा के लिए गलत सोचा इसलिए राजा के मन में भी तुम्हारे लिए अनुचित विचार आया। गलत सोच ने दोनों के बीच दूरी बढ़ा दी। अब तुम दोनों प्रायश्चित करके अपना मन शुद्ध कर लो, तो पहले जैसा सुख फिर से मिलने लगेगा।’ 5  

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विश्व और भारत महत्वपूर्ण दिवस


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8 मई 2012 कोविश्वभरमेंथैलेसीमियादिवसमनायागया

 

 

थैलेसीमिया दिवस: 8 मई


विश्वभर में 8 मई 2012 को थैलेसीमिया दिवस मनाया गया. थैलेसीमिया दिवस का मकसद लोगों को थैलेसीमिया के प्रति जागरूक कराना है. ज्ञातव्य हो कि थैलेसीमिया से ग्रस्त मरीज के खून में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बनतीं. जो बनती भी हैं, वे जल्दी ही खत्म हो जाती हैं. इसके अलावा मरीज का हिमोग्लोबिन स्तर भी कम हो जाता है. यह बीमारी बच्चों में पाई जाती है. सही समय पर उपचार में कमी होने से 15-16 साल की उम्र में मरीज की मौत भी हो सकती है.

 

nt-fam� '"i�G �%oman"; color:black'>अवसर पर हमारे देश ने उन्हें पुनः पुर्नजीवित करने का प्रयास किया जब इस अवसर पर उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया।

 

 

e�Dn-�%�*pt; font-family:"Georgia","serif";mso-bidi-font-family:Georgia;color:black'> प्रभावित होता है. 

इस बीमारी की चपेट में आने के बालिकाओं के मुकाबले बालकों की ज्‍यादा संभावना है. इस बीमारी को पहचानने का कोई निश्चित तरीका ज्ञात नहीं है, लेकिन जल्‍दी निदान हो जाने की स्थिति में सुधार लाने के लिए कुछ किया जा सकता है. दुनियाभर में यह बीमारी पाई जाती है और इसका असर बच्‍चों, परिवारों, समुदाय और समाज पर पड़ता है.

 

 

04 दिसम्बर (अकोला) तनाव मुक्त शिविर. राजयोगीनी ब्रहमाकुमारी गीता बहन, मा. आबू इनके तीन दिवसीय तनावमुक्त शिविर संपन्न हुआ.

 

31 दिसम्बर (गोवा:कोंकण) गीता पाठशाला का शुभारम्भ. नवनिर्मित गीता पाठशाला का उदघाटन संपन्न हुआ.


 

30 दिसम्बर (अमरिका) डा. बीन्नी बहन की अमरिका सेवायात्रा. बीके डा. बीन्नी बहन के राजयोग ध्यानाभ्यास विषयपर विशेष व्याख्यान संपन्न हुए.


 

29 दिसम्बर (फरिदाबाद) प्युचर आफ पावर. भ्राता निझारभाई जुमाभाईजी आयोजित प्युचर आफ पावर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. अतिविशिष्ट व्यक्तियों को राजयोग संदेश दिया गया.


 

 
28 दिसम्बर (मड़गांव:गोवा)
 महिला सशक्तिकरण. ग्रामीण महिला सशक्तिकरण अभियान का सफल आयोजन किया गया जिसका उदघाटन ब्रा.कु. शोभा, बहन बेला नाईक, जज ब्राहमाकुमार भगवान भाई, आबू पर्वत श्रीमती नूतन कामत, बीके सुरेखा बहन इनके शुभकरकमलोद्वारा संपन्न हुआ.


 

 

27 दिसम्बर (शिकागो) डॉ. बीन्नी बहन का शिकागो में व्याख्यान. स्वामी विवेकानंद जयंती के उपलक्ष में बीके डा. बीन्नी बहन का राजयोग ध्यानाभ्यास विषयपर विशेष व्याख्यान संपन्न हुआ.


 

26 दिसम्बर (कोलाबा) स्ट्रेस मॅनेजमेंट शिविर. पश्चिम रेल्वे अधिकारीयों के लिए विशेष स्ट्रेस मॅनेजमेंट शिविर का आयोजन किया गया. जिसमे ब्रा.कु. गायत्री बहन का विशेष व्याख्यान संपन्न हुआ.


25 दिसम्बर (कोंकण:गोवा) सर्व धर्म सम्मेलन संपन्न. स्थानिय सेवाकेंद्र की ओरसे विशेष सर्वधर्म सम्मेलन का विशेष आयोजन किया गया. ब्रा.कु. भगवानभाई माऊंट आबू की विशेष उपस्थितीत थी. ब्रा.कु. शोभा बहनने ई·ारीय संदेश दिया.


24 दिसम्बर (ग्वालियर) योगतपस्या भटटी. महाराजपूर सेवाकेंद्र की औरसे लष्कर सेवाकेंद्र की भाई बहनों की विशेष राजयोग तपस्या योगभट्टी का आयोजन किया गया. ब्रा.कु. राधाबहन, ज्योतीबहनने विशेष अभ्यास करवाया.


23 दिसम्बर (मालाड:मुंबई) मेडिकल कॅम्प का भव्य आयोजन. सेवाकेंद्र कीऔरसे आयोजित भव्य मेडिकल कॅम्प का उदघाटन कुंती बहन, फिल्म एक्टर राहूल राय, कुनीकलाल के शुभहस्तों से किया गया.


22 दिसम्बर (आबू रोड) राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण अभियान. इनर्जी कन्झरवेशन दिवस के उपक्ष में होलिस्टीक अप्रोच टुवर्डस एनर्जी कन्झरवेशन विषयपर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. नई देहली के भ्राता सुनिल सूद, एनर्जी ऑडिटर और संस्थापक अध्यक्ष आयएईएमपी इनकी विशेष उपस्थिती थी.


21 दिसम्बर (कोरबा) विधायक जी का सम्मान. नवनिर्वाचित विधायक भ्राता जयसिंहजी अग्रवाल का विशेष सम्मान स्थानिय सेवाकेंद्र की औरसे बहन रुकमणीजी के किया गया. विधायकजीने ब्राहमाकुमारीज गतिविधीयों पर प्रसन्नता जताई तथा आध्यात्मिक प्रगती के लिए आशावाद जाहिर किया


20 दिसम्बर (पानीपत) मुख्यमंत्री महोदय द्वारा शिलान्यास. हरियाणा के मुख्यमंत्री मा. भ्राता भुपेंदर सिंग हुडा जी के शुभकरकमलोंद्वारा युव्र्हसील पिस ऑडोटोरियम का शिलान्यास संपन्न हुआ. इस अवसपर पर अतिविशिष्ट व्यक्ति उपस्थित थे.


19 दिसम्बर (ब्राज़िल) निर्मलादीदीजी की ब्राज़िल सेवायात्रा. सेलिंग द वेव्ज् आफ पीस एण्ड हेप्पीनेस विषयपर निर्मलादीदीजी का विशेष व्याख्यान फिस्टा शहर में आयोजित किया गया. दीदीजी के ब्रााजील सेवायात्रा में कई व्याख्यान संपन्न हुए.


18 दिसम्बर (आबूरोड) गॉडलिवूड का वेबटीवी चॅनल. गॉडलीवूड.आर्ग वेबपोर्टल पर वेब टीवी का शुभारम्भ किया गया.


17 दिसम्बर (जलगांव:महाराष्ट्र) नार्थ महाराष्ट्र वि·ाविद्यालय में कार्यक्रम. वि·ाविद्यालय के संगीत विभाग में कला तथा सांस्कृतिक प्रभाग के कार्यक्रम संपन्न  हूए


16 दिसम्बर (चोपडा:महाराष्ट्र) कला सांस्कृतिक प्रभाग कार्यक्रम. चोपडा जि. जलगांव में कला एवम सांस्कृतिक प्रभाग के विभिन्न कार्यक्रम संपन्न हुए


15 दिसम्बर (रायपुर छ.ग.) विधायक भ्राता डॉ. रमनसिंजी का सम्मान. विधानसीाा चुनाव में लगातार तीसरी बार विजय प्राप्त करने पर मुख्यमंत्री भ्राता डा. रमनसिंजी का गुलदस्ता भेंट कर सम्मान किया इंदौर ज़ोन की क्षेत्रीय प्रशसिका ब्राहमाकुमारी कमला बहनने.


14 दिसम्बर (सर्वे:गोवा) दवा के साथ दुवा की जरुरुत - भगवान भाई. सर्वे शहर के डाक्टर भाई बहनों के लिए आयोजित विशेष प्रवचन में माऊंट आबू के भगवानभाईने यह बात कही


13 दिसम्बर (ग्वालियर) माइण्ड मॅनेजमेंट प्रोग्राम. गोदरेज कन्झुमर प्रोडक्टस् लि. मालनपूर में बीके प्रल्हाद, बीके ज्योती बहनने माइण्ड मॅनेजमेंट विषयपर कार्यशाला का संचलन किया.


 

 

12 दिसम्बर (देहली) हेपीनेस फारएवर. श्री सत्य साई एन्टरनेशनल सेंटर में आयेजित कार्यक्रम में बीके पीयुश, डा सविता आनंद, बीके पुष्पा जस्टीस सुनील गौर, ज. व्ही ई·ारंा, बीके मृत्युंजय, जेके डाडू, आएएस, आदि ने किया उदघाटन


 

11 दिसम्बर (कोलाबा) रेल अफसरों के लिए तनावमुक्त शिविर. बीके स्वामीनाथन् ने दिया रेल अफसरों को तनावमुक्त जीवन जीने की कला की टिप्स


10 दिसम्बर (पानीपत) महिला शक्तिकरण सम्मेलन. बहन आशा हुडा, उपाध्यक्ष हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद, बीके चक्रधारी बहन, बीके भारतभूषण, बीके सरला, जिला परीषद चेअमर ज्योती जागलान आदियोंं के करकमलोंद्वारा उदघाटन हुआ.


 

 

 

09 दिसम्बर (कुरूक्षेत्र) कर्मोसे मनुष्य महान बनता है. माऊंट आबू से पधारे ब्राहमाकुमार भगवान भाई ने जिला सुधार गृह में संस्कार विषय पर प्रवचन दिया.


 

08 दिसम्बर (सोनीपत:हरियाणा) सरस्वती पब्लिक स्कूल में प्रवचन. माऊंट आबू से पधारे ब्राहमाकुमार भगवान भाई ने नैतिक शिक्षा विषयपर प्रवचन दिया.


07 दिसम्बर (ग्वालियर) भूमिपुजन संपन्न. गोल्डन वल्र्ड रिट्रीट सेंटर स्थित सभागार के डोम का भूमिपूजन बीके अवधेश बहनजी, क्षेत्रीय निर्देशिका, भोपाल क्षेत्रके करकमलोद्वारा संपन्न हु


06 दिसम्बर (पुना) सिक्कीम गर्वनर जी को राजयोग संदेश. महामहिम श्रीनिवास दादासाहेब पाटील को ब्र.कु. दिपकभाई, ब्रा.कु. सोमप्रभाबहन ने ई·ारीय संदेश दिया

 


05 दिसम्बर (करनाल) नैतिक शिक्षा से सर्वांगिण विकास. माऊंट आबू से पधारे ब्राहमाकुमार भगवान भाई ने मधुबन पब्लिक स्कूल में प्रवचन दिया.

 


 

04 दिसम्बर (अकोला) तनाव मुक्त शिविर. राजयोगीनी ब्रहमाकुमारी गीता बहन, मा. आबू इनके तीन दिवसीय तनावमुक्त शिविर संपन्न हुआ.

 


 

01 दिसम्बर (युरोप) शिलू बहन की युरोप यात्रा.


 

8 सितम्बर (ज्ञानसरोंवर) आर्ट कल्चर विंग सम्मेलनसंपन्न. कला सांस्कृतिक प्रभाग की रजत जयंती के उपलक्ष में राष्ट्रीय सम्मेलनसंपन्न हुआ. दादी जानकीजी, दादी ह्मदयमोहिनीजी, रमेशभाई, मोहिनी बहन, मुन्नती बहन, कुसूम बहन बॉलीवूड स्टार क्रीस्टना, बॉलीवूड स्टार रती अग्नीहोत्री, चंकीपांडे ने उदघाटन किया.

31 अगस्त (रशिया) स्वतंत्रता दिवस मनाया गया.ाारतीय मूल निवासीयोंने भारतीय स्वतंत्रता दिवस मनया तथा इस अवसपर पर भ्राता गांधी, सेंट पिटर्सबर्ग में भारत के कॉन्सील को राखी बांधी गई.

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