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31/12/17

31/12/17 मधुबन "अव्यक्त-बापदादा" ओम् शान्ति 31-12-82


"बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैन्डस को बधाई"

आज सर्व ब्राहमण आत्माओं के मन के मीत, दिल के गीत, प्रीत की रीति निभाने के लिए वन्डरफुल रीति से रूहानी गुलाब फूलों के बगीचे में वा अल्लाह अपने बगीचे में मिलने के लिए आये हैं। वैसे भी मीत कहो वा फ्रैण्डस कहो, बगीचे में मिलन मनाते हैं। ऐसा बगीचा सारे कल्प में मिल नहीं सकता। आज चारों तरफ के बच्चे इसी एक लगन में हैं कि हम भी अपने मन के मीत के साथ यह न्यू ईयर डे मनावें। बापदादा आज सिर्फ साकारी स्वरूप में सन्मुख बैठे हुए रूहानी फ्रैन्डस से नहीं मिल रहे हैं। लेकिन साकार सभा से आकार रूपधारी बच्चों की वा मन के मीत स्नेही आत्माओं की बहुत बड़ी सभा देख रहे हैं। इतने रूहानी फ्रैन्डस, सच्चे फ्रैन्डस और किसको होंगे? बापदादा को भी रूहानी फखुर है कि ऐसे और इतने फ्रैन्डस न किसको मिले हैं, न मिलेंगे। सबके दिल का गीत दूर से वा समीप से सुनाई दे रहा है। कौन सा गीत? ओ बाबा। यही ''बाबा बाबा'' का गीत एक ही साज़ और राज़ से चारों ओर से सुनाई दे रहा है। बच्चे कहो वा फ्रैन्डस कहो, सभी का एक ही बोल है ''तुम ही मेरे'' और खुदा दोस्त भी एक एक को यही कहते कि तुम ही मेरे। ‘वाह मेरे फ्रैन्डस।' गीत गाओ -(बहनों ने साकार बाबा का प्यारा गीत गाया, तुम्हीं मेरे......)
यह मुख का गीत तो थोड़ा समय गा सकते लेकिन मन का गीत तो अविनाशी बजता रहता। आज के न्यू इयर डे पर अनेक बच्चों के बहुत अच्छे संकल्प, स्नेह के बोल बापदादा के पास पहले से पहुँच गये हैं। आज का दिन खुशियों का मनाते हो ना। एक दो को बधाई देते हो। बापदादा भी सर्व मन के मीत अलौकिक रूहानी फ्रैन्डस को बधाई देते हैं।
सदा विधि द्वारा वृद्धि को पाते रहेंगे। सदा सर्व खजानों से सम्पन्न रहेंगे। सदा फरिश्ता बन सर्व देह के रिश्तों से पार उड़ते रहेंगे। सदा नयनों में, दिल में बाप को समाते हुए एक बाप दूसरा न कोई - इसी लगन में मगन रहेंगे। सदा आई हुई परीक्षाओं को, समस्याओं को, व्यर्थ संकल्पों को पानी पर लकीर के समान पार कर पास विथ आनर बनेंगे। ऐसी श्रेष्ठ शुभ कामनाओं से बधाई दे रहे हैं। एक एक अमूल्य रत्न की विशेषताओं के गीत गा रहे हैं। आज के दिन नाचते गाते हैं ना। सिर्फ आज नहीं लेकिन सदा नाचते और गाते रहो। सदा हरेक को एक अलौकिक गिफ्ट देते रहना। जैसे बड़े आदमी कहाँ जाते हैं वा उनके पास कोई आते हैं तो खाली हाथ नहीं जाते हैं। आप सब भी बड़े ते बड़े हो ना। कभी भी किसी भी ब्राहमण आत्मा से वा किसी से भी मिलते हो तो कुछ देने के बिना कैसे मिलेंगे। हरेक को शुभ भावना और शुभ कामना की गिफ्ट सदा देते रहो। विशेषता दो और विशेषता लो। गुण दो और गुण लो। ऐसी गाडली गिफ्ट सभी को देते रहो। चाहे कोई किसी भी भावना वा कमाना से आये लेकिन आप शुभ भावना की गिफ्ट दो। शुभ भावना और श्रेष्ठ कामना की गिफ्ट का स्टाक सदा भरपूर रहे। यह संकल्प मात्र भी उत्पन्न न हो कि आखिर भी कहाँ तक शुभ भावना से देखें। आखिर भी कोई हद है वा नहीं। यह संकल्प भी सिद्ध करता है कि इस गोल्डन गिफ्ट का स्टाक जमा नहीं है।
दाता, विधाता, वरदाता के बच्चे, भाग्य की लकीर खींचने वाले ब्रह्मा के बच्चे ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारियाँ हो इसलिए सदा भण्डारा भरपूर रहे। इस वर्ष खाली किसको नहीं रहने देना। न खाली हाथ जाना, न खाली हाथ आना। सबको देना भी और सबसे लेना भी। यह गिफ्ट बाँटने का वर्ष है। सिर्फ एक दिन नहीं, लेकिन सारा वर्ष हर दिन, हर घण्टा, हर सेकेण्ड, हर संकल्प जो बीता उससे और रूहानी नवींनता लाने वाला हो। नया दिन, नई रात तो सब कहते हैं लेकिन श्रेष्ठ आत्माओं का नया सेकण्ड, नया संकल्प हो तब ही आने वाली नई दुनिया की नई झलक विश्व की आत्माओं को स्वप्न के रूप में वा साक्षात्कार के रूप में दिखाई देगी। अब तक विश्व की आत्मायें जानने की इच्छुक हैं कि विनाश के बाद क्या होगा? लेकिन इस वर्ष सर्व आधार स्वरूप आत्माओं का हर सेकण्ड और हर संकल्प, नये ते नया, ऊंचे ते ऊंचा, अच्छे ते अच्छा रहे तो चारों ओर से नई दुनिया की झलक देखने का आवाज फैलेगा और क्या होगा इसके बजाए ऐसे होगा। ऐसी वन्डरफुल दुनिया जल्दी आवे और जल्दी तैयारी करें - इसमें जुट जायेंगे। जैसे स्थापना के आदि में स्वप्न और साक्षात्कार की लीला विशेष रही, ऐसे अन्त में भी यही विचित्र लीला प्रत्यक्षता करने के निमित्त बनेंगी। चारों ओर से ‘यही है, यही है', यही आवाज़ गूजेंगी और यह आवाज अनेकों के भाग्य की श्रेष्ठता के निमित्त होगा। एक से अनेक दीपक जग जायेंगे।
तो इस वर्ष क्या करना है? सच्ची दीपमाला मनाने की तैयारी करनी है। पुरानी बातें, पुराने संस्कार का दशहरा मनाओ क्योंकि दशहरे के बाद ही दीपमाला होगी। तो आज मन के मीत आत्माओं से मन की बात कर रहे हैं। मन की बात किससे करते हैं? फ्रेन्डस से करते हो ना। अच्छा बधाई तो मिली। बधाई के साथ-साथ नये साल की सौगात भी सदा साथ रखना। कितनी सौगात चाहिए? एक, एक में बहुत समाई हुई भी हैं और बहुत भी एक हैं। सबसे बढ़िया सौगात एक तो बापदादा ने सब बच्चों को डायमण्ड की (वब्) दी है, जिससे जो खजाना चाहो वह हाज़िर हो जायेगा। ‘डायमण्ड की' क्या है? एक ही बोल ''बाबा'', इससे बढ़िया चाबी कोई मिलेगी क्या? सतयुग में भी ऐसी चाबी नहीं मिलेगी। सबके पास यह ''डायमण्ड की'' सम्भाली हुई है ना। चोरी तो नहीं हो गई है ना। चाबी को खोया तो सब खजाने खोये इसलिए चाबी सदा साथ रखना। कीचेन है? वा अकेली चाबी है? ‘की' (खब्) की चेन है - सदा सर्व सम्बन्धों से स्मृति स्वरूप होते रहो। तो ‘की चेन' की गिफ्ट मिली ना। सबसे बढ़िया गिफ्ट तो है यह चाबी। उसके साथ-साथ वर्ष के लिए विशेष प्रतिज्ञा का कंगन भी दे रहे हैं। वह प्रतिज्ञा का कंगन क्या है? जो सुनाया हर सेकण्ड, हर संकल्प, हर आत्मा के सम्पर्क में सदा नये ते नया अर्थात् ऊंचे ते ऊंचा। नीचे की बात को न देखना है, न नीचे की स्टेज अपनानी है, सदा ऊंचा। ऊंचा बाप, ऊंचे बच्चे, ऊंची स्टेज और ऊंचे ते ऊंची सर्व की सेवा हो। यह प्रतिज्ञा का कंगन है।
साथ-साथ सर्व गुणों के श्रृंगार का बाक्स। वैरायटी सेट का श्रृंगार बाक्स। जिस समय जो श्रृंगार चाहिए उस समय वही सेट धारण कर सदा सजे-सजाये रहना। कभी सहनशीलता का सेट पहनना, लेकिन फुलसेट पहनना। सिर्फ एक सेट नहीं पहनना। कानों द्वारा भी सहनशीलता हो, हाथों द्वारा भी सहनशीलता का श्रृंगार हो। ऐसे समय-समय पर भिन्न-भिन्न श्रृंगार करते हुए विश्व के आगे फरिश्ते रूप और देव रूप में प्रख्यात हो जायेंगे। यह त्रिमूर्ति सौगात सदा साथ रखना।
फ्रैन्डशिप निभाने तो आती है ना। डबल विदेशी फ्रैन्डस तो बहुत अच्छे बनाते हैं लेकिन अविनाशी फ्रैन्डशिप रखना। डबल विदेशी छोड़ने में भी होशियार हैं, करने में भी होशियार हैं। अभी अभी हैं और अभी अभी नहीं, ऐसे तो नहीं करेंगे ना। बापदादा डबल विदेशी बच्चों को देख हर्षित होते हैं, कैसे चारों कोनों से इशारा मिलते पुरानी पहचान कर ली। बाप ने बच्चों को ढूंढा और बच्चों ने पहचान लिया। इसी विशेषता को देख बापदादा भी बधाई दे रहा है इसलिए सदा मायाजीत रहो। अच्छा।
ऐसे सिकीलधे बच्चों को अविनाशी प्रीत की रीति निभाने वाले अविनाशी फ्रैन्डस को, सदा फूलों के बगीचे में हाथ में हाथ दे साथी बन सैर करने वाले, सदा गाडली गोल्डन गिफ्ट को कार्य में लाने वाले सदा सम्पन्न, सदा मास्टर दाता, सर्व के मास्टर भाग्य विधाता, ऐसे स्नेही सहयोगी चारों ओर के बच्चों को, साकारी वा आकारी रूपधारी बच्चों को यादप्यार और नमस्ते।
विदेशी टीचर्स से:- निमित्त शिक्षक को देख बापदादा अति हर्षित हो रहे हैं। कितनी लगन से, स्नेह से अपने-अपने स्थान पर रहते सभी सदा शक्ति स्वरूप स्थिति में स्थित हो सर्व शक्तियों का अनुभव कराते रहते हैं। अभी साधारण नारी वा कुमारी का रूप नहीं लेकिन सर्व श्रेष्ठ सेवाधारी आत्मायें। बापदादा के शोकेस के शोपीस हो। आप सबको देख सर्व आत्मायें बाप को पहचानती हैं। हरेक निमित्त शिक्षक के ऊपर विश्व परिवर्तन की जिम्मेवारी है। बेहद के सेवाधारी हो - ऐसे अपने को समझती हो? एक एरिया के कल्याणकारी तो नहीं समझती? चाहे एक स्थान पर बैठे हो लेकिन हो तो लाइट हाउस ना। चारों ओर लाइट देने वाले। तो छोटा सा बल्ब बनकर एक ही स्थान पर रोशनी देते या लाइट हाउस बन विश्व को रोशनी देते? लाइट हो, सर्चलाइट हो या लाइट हाउस हो? हिम्मत तो बहुत अच्छी रखी है। बहुत अच्छा कर रहे हो, आगे भी अच्छे ते अच्छा करते रहो। टीचर्स तो सदा मायाजीत हैं ना? अगर टीचर्स के पास माया आयेगी तो स्टूडेन्ट का क्या हाल होगा? आपके पास यादि एक बार माया आयेगी तो उनके पास 10 बार आयेगी इसलिए टीचर्स के पास माया नमस्ते करने आवे, वैसे नहीं।
निमित्त शिक्षक का स्वरूप - सदा हर्षित, सदा मास्टर सर्वशक्तिमान, ऐसी सीट पर सदा सेट रहो। टीचर्स के रहने का स्थान ही ऊंची स्थिति है। सेन्टर पर नहीं रहती हो लेकिन ऊंची स्टेज पर रहती हो। ऊंची स्टेज अर्थात् दिलतख्त पर माया आ नहीं सकती। नीचे उतरे तो माया आयेगी। पाण्डव भी बापदादा के सहयोगी राइट हैण्ड हो ना। गद्दी सम्भालने वाले को राइट हैण्ड कहा जाता है। सभी पाण्डव विजयी हो ना। अभी तक माया से बहुत समय खेल खेला। अभी विदाई दो, आज से सदा के लिए विदाई की बधाई मनाना। बहुत अच्छा चान्स मिला है और चान्स ले भी रहे हो। अच्छा।
पार्टियों से अव्यक्त बापदादा की मुलाकात:-
बापदादा हर एक बच्चे के भाग्य को देख हर्षित होते हैं। हरेक बच्चा अपना भाग्य ले रहा है। संगम पर हरेक आत्मा का भाग्य अपना अपना है। और हरेक का श्रेष्ठ भाग्य है क्यों? क्योंकि जब श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ बाप के बच्चे बने तो श्रेष्ठ भाग्य हो गया ना। न इससे कोई बाप श्रेष्ठ है, न इससे कोई भाग्य श्रेष्ठ है। ऊंचे ते ऊंचा बाप। यही याद रहता है ना। भाग्य विधाता मेरा बाप है। इससे बड़ा नशा और क्या हो सकता है। लौकिक रीति से बच्चे को नशा रहता - मेरा बाप इन्जीनियर है, डाक्टर है, जज है या प्राइम मिनिस्टर है। लेकिन आपको नशा है कि हमारा बाप भाग्यविधाता है। ऊंचे ते ऊंचा भगवान है। यही नशा सदा रहता है या कभी कभी भूल जाते हा? भाग्य को भूला तो क्या होगा? फिर भाग्य को पाने का प्रयत्न करना पड़ेगा। खोई हुई चीज को पाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। बाप ने आकर मेहनत से बचाया। आधाकल्प मेहनत की, व्यवहार में भी मेहनत, भक्ति में, धर्म के क्षेत्र में, सबमें मेहनत ही की। और अभी सभी मेहनत से छूट गये। अभी व्यवहार भी परमार्थ के आधार पर सहज हो जाता है। निमित्त मात्र कर रहे हैं। निमित्त मात्र करने वाले को सदा सहज अनुभव होगा। व्यवहार नहीं है लेकिन खेल है। माया का तूफान नहीं लेकिन यह ड्रामा अनुसार आगे बढ़ने का तोफा है। तो मेहनत छूट गई ना। तोफा अर्थात् सौगात लेने में मेहनत नहीं होती है ना। तो ऐसे मेहनत से अपने को बचाने वाले, सदा भाग्य विधाता के साथ मास्टर भाग्य विधाता बन रहने वाले इसको कहा जाता है श्रेष्ठ आत्मा।
सैनअन्टानियो:- सभी अपने को विशेष आत्मा समझते हो? किस स्थान पर पहुँचे हो? सोचो कि ऐसा भाग्य विश्व में कितनी आत्माओं का होगा जो सम्मुख मिलन मनायें? इससे बड़ा भाग्य और क्या चाहिए। सदा अपने इसी भाग्य को स्मृति में रखो तो आपके भाग्य के प्राप्ति की खुशी को देख और समीप आयेंगे और अपना भाग्य बनायेंगे। सदा खुश रहो। बाप के बच्चे बने तो वर्से में क्या मिला? खुशी मिली ना। तो इस वर्से को सदा साथ रखना, छोड़कर नहीं जाना। खुशी के खजानों के मालिक बन गये। तो सदा खुशी में उड़ते रहना। इसमें ट्राई करने की बातें नहीं। अगर कहते ट्राई तो क्राई होते रहेंगे। क्या बच्चे बनने मे भी ट्राई करनी होती है। तो न ट्राई न क्राई। ट्राई करेंगे, यह शब्द यहाँ छोड़कर जाना। बाप और वर्सा सदा साथ रहे। कम्बाइन्ड रहना। तो जहाँ बाप है वहाँ सर्व खजाने स्वत: ही होंगे। यही एक बात सदा याद रखना कि बाप हमारे साथ है। वर्सा हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है।
नर्व वर्ष की मुबारक (रात्रि 12 बजे):- नये वर्ष की सभी बच्चों को सारे वर्ष के लिए बधाई हो। ऐसे अमूल्य रत्न जिन्होंने बाप को पहचाना और बाप को प्रत्यक्ष करने की जिम्मेवारी का ताज धारण किया, ऐसे सदा सेवाधारी अनन्य ताजधारी, तख्तनशीन बच्चों को अपने अपने नाम सहित बधाई स्वीकार हो।
लण्डन निवासी निमित्त जनक बेटी और साथ-साथ आदि-रत्न रजनी बच्ची, साथ में मुरली बच्चा और सबसे अति स्नेही छोटी समान बाप जयन्ती बच्ची को और जो साथ-साथ बच्चे सेवा पर उपस्थित हैं, जैसे बृजरानी अच्छा अपना शो दिखा रही है, जो सेवा कर रहे हैं उस सेवा में रूहानियत भरी हुई है - ऐसे सभी बच्चे अपने-अपने नाम से बधाई स्वीकार करें।
नया वर्ष, नया उमंग, नया उत्साह और इस वर्ष में सदा ही रोज उत्सव समझकर उत्साह दिलाते रहना। इसी सेवा में सदा तत्पर रहना। अच्छा - सभी बच्चों को बापदादा की दिल व जान, सिक व प्रेम से यादप्यार।

वरदान:

वाणी के साथ वृत्ति द्वारा रूहानी वायब्रेशन फैलाने की सेवा करने वाले डबल सेवाधारी भव!

जैसे वाणी द्वारा सेवा करते हो ऐसे वाणी के साथ वृत्ति द्वारा सेवा करो तो फास्ट सेवा होगी क्योंकि बोल तो समय पर भूल जाते हैं लेकिन वायब्रेशन के रूप में मन और बुद्धि पर छाप लग जाती है। तो यह सेवा करने के लिए वृत्ति में किसी के लिए भी व्यर्थ वायब्रेशन्स न हों। व्यर्थ वायब्रेशन रूहानी वायब्रेशन के आगे एक दीवार बन जाती है, इसलिए मन-बुद्धि को व्यर्थ वायब्रेशन से मुक्त रखो - तब डबल सेवा कर सकेंगे।

स्लोगन:

फरियाद करने के बजाए याद में रहो तो सर्व अधिकार मिल जायेंगे।