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27-05-18

27-05-18 प्रात:मुरली ओम् शान्ति ''अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज: 03-12-83 मधुबन


संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य

आज रत्नागर बाप अपने सौदागर बच्चों को देख रहे हैं। सौदा सभी बच्चों ने किया है। किससे सौदा किया और किन्होंने किया है? दुनिया के हिसाब से तो बहुत भोले बच्चे हैं लेकिन भोले बच्चों ने चतुर-सुजान बाप को जाना। तो भोले हुए या चतुर हुए? दुनिया वाले जो अपने को अनेक बातों में चतुर समझते हैं उसके अन्तर में आप सबको भोले समझते हैं लेकिन आप सब उनको भोले कहते हो - क्योंकि चतुर-सुजान बाप को जानने की समझ, चतुराई उन्हों में नहीं है। आप लोगों ने मूल को जान लिया और वह विस्तार में जा रहे हैं। आप सबने एक में पदम पा लिया और वह अरब-खरब गिनते ही रह गये। पहचानने की आंख, जिसको श्रेष्ठ नॉलेज की आंख कहते हैं, वह कल्प-कल्प किसको प्राप्त होती है? आप भोली आत्माओं को। वे क्या और क्यों, ऐसे और कैसे के विस्तार में ढूँढते ही रह जाते हैं और आप सभी ने "वो ही मेरा बाप है", मेरा बाबा कहकर रत्नागर से सौदा कर लिया। ज्ञान सागर कहो, रत्नागर कहो, रत्नों की थालियां भर-भरकर दे रहे हैं। उन रत्नों से खेलते हो। रत्नों से पलते हो, रत्नों में झूलते हो, रत्न ही रत्न हैं, हिसाब कर सकते हो, कितने रत्न मिले हैं! अमृतवेले आंख खोलते बाप से मिलन मनाते रत्नों से खेलते हो ना। सारे दिन में धन्धा कौन सा करते हो! रत्नों का धन्धा करते हो ना! बुद्धि में ज्ञान रत्नों की प्वाइंटस गिनते हो ना। तो रत्नों के सौदागर रत्नों की खानों के मालिक हो। जितने कार्य में लगाओ उतने बढ़ते ही जाते। सौदा करना अर्थात् मालामाल बनना। तो सौदा करना आ गया है! सौदा कर लिया है वा अभी करना है? सौदागर नम्बरवार हैं वा सभी नम्बर वन हैं? लक्ष्य तो सभी का नम्बर वन है लेकिन नम्बर वन सदा रत्नों में इतना बिज़ी रहेगा जो और कोई बातों को देखने, सुनने और सोचने की फुर्सत ही नहीं होगी। माया भी बिजी देख वापस चली जायेगी। माया को बार-बार भगाने की मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। तो आज बापदादा एक तरफ बड़े-बड़े नामीग्रामी नॉलेजफुल कहलाने वाले बच्चों को देख रहे थे, क्या-क्या कर रहे हैं। अनेक बातों की समझ है, एक बात की समझ नहीं है। उसके अन्तर में ब्राह्मण बच्चों को देख रहे थे। बापदादा भी दोनों का अन्तर देख गीत गा रहे थे। आप भी वह गीत गाते हो। जो ब्रह्मा बाप को बहुत प्रिय लगता है, बापदादा बच्चों के प्रति गा रहे थे, जो आज ब्रह्मा बाप बहुत मस्ती में गा रहे थे - कितने भोले कितने प्यारे मीठे-मीठे बच्चे। जैसे आप लोग बाप के लिए गाते हो ना। बाप भी बच्चों के लिए यही गीत गाते, ऐसे ही इसी स्मृति-स्वरूप में किसके प्यारे हैं, किसके मीठे हैं, कौन बच्चों का गीत गाता है। यह स्मृति सदा निर्माण बनाए स्व-अभिमान के नशे में स्थित कर देती है। इसी नशे में कोई नुकसान नहीं। इतना नशा रहता है? आधा कल्प आपने भगवान के गीत गाये और अब भगवान गीत गा रहे हैं। दोनों तरफ के बच्चों को देख रहम और स्नेह दोनों आ रहे थे।

ब्रह्मा बाप को आज भारत के और विदेश के अन्जान बच्चे विशेष याद आ रहे थे। दुनिया वाले तो उन्हों को वी.आई.पी. (V.I.P.) कहते हैं लेकिन बाप उन बच्चों को वी.आई.पी.अर्थात् वेरी इनोसेन्ट परसन, (Very innocent person) इस रूप में देख रहे थे। आप सेन्ट (Cent) हो वे इनोसेन्ट हैं लेकिन अभी उन्हों को भी अंचली दो। अंचली देने आती है। आपके लाइन में उन्हों का नम्बर अभी पीछे है वा आगे है? क्या समझते हो? (साइलेन्स की ड्रिल)

ऐसे विशेष साइलेन्स की शक्ति उन आत्माओं को दो। अभी संकल्प उठता है कि कोई सहारा, कोई नया रास्ता मिलना चाहिए। अभी चाह उत्पन्न हो रही है। अब राह दिखाना आप सबका कार्य है। "एकता और दृढ़ता" यह दो साधन हैं राह दिखाने के। संगठन की शुभ भावना ऐसी आत्माओं को भावना का फल दिलाने के निमित्त बनेगी। सर्व का शुभ संकल्प उन आत्माओं में भी शुभ कार्य करने के संकल्प को उत्पन्न करेगा। इसी विधि को अभी से अपनाओ। फिर भी बड़ा कार्य सफल तब होता है जब सबके शुभ संकल्पों की आहुति पड़ती है। समझा। बापदादा तो यही सभी के प्रति कहते हैं कि कोई बच्चा वंचित न रह जाए। आप सभी तो मालामाल हो गये ना। अच्छा -

ऐसे श्रेष्ठ सौदा करने वाले श्रेष्ठ सौदागर, सदा रत्नों से पलने ओर खेलने वाले मास्टर रत्नागर बाप के अति स्नेही सदा सहयोगी सिकीलधे, पहचानने के नेत्रधारी, सदा सेवाधारी, सदा मेरा बाबा के गीत गाने वाले, विशेष आत्माओं को बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।

पार्टियों से मुलाकात

मद्रास निवासियों प्रति:- सभी उमंग-उत्साह में हो ना। सभी के मन में एक ही उमंग-उत्साह है ना कि बाप को कैसे प्रत्यक्ष करें। अभी तो स्टेज भी तैयार कर रहे हो ना। स्टेज तैयार कर रहे हो प्रत्यक्षता का झण्डा लहराने के लिए। स्थूल झण्डा और भी लहराते हैं, आप सभी कौन सा झण्डा लहरायेंगे? कपड़े वाला झण्डा लहरायेंगे, क्या करेंगे? वह तो हुआ निमित्त मात्र लेकिन असली झण्डा कौन सा लहरायेंगे? बाप को प्रत्यक्ष करने का। बाप आये हैं यह आवाज फैलाने का झण्डा लहरायेंगे। इसकी तैयारी कर रहे हो ना। सभी आत्मायें जो वंचित हैं उन्हों को रोशनी मिल जाए, रास्ता मिल जाए। यही पुरुषार्थ सभी कर रहे हैं और आगे भी करना है। अभी से यह लहर फैलायेंगे तब उस समय चारों ओर यह लहर फैला सकेंगे। ऐसी तैयारी की है ना। सदा यह सोचो जो अब तक कहाँ नहीं हुआ है, वह हम करके दिखायेंगे। नया कुछ करना है। नई बात यही है जो सर्व आत्माओं को परिचय मिले और वह समझें, वर्णन करें, अनुभव करें कि बाप आ गये। अच्छा-

आमंत्रित भाई बहनों के ग्रुप से:-

सभी अपने को विशेष आत्मायें तो समझते हो ना। विशेष आत्मायें हो या बनना है? करेंगे, देखेंगे, सोचेंगे, ऐसी गें गें की भाषा वाले तो नहीं हो ना। अपने महत्व को जानो कि हम सबका महत्व कितना है। जितना बाप बच्चों के महत्व को जानते हैं उतना बच्चे अपने महत्व को सदा याद नहीं रखते। जानते हैं लेकिन याद नहीं रखते। अगर याद रहता - तो सदा ही समर्थ बन औरों को भी समर्थ बनाने के, उमंग-उत्साह बढ़ाने के निमित्त बनते। तो निमित्त हो ना? बीती सो बीती कर लिया है। बीती को भुला दिया और वर्तमान, भविष्य सदा उमंग-उत्साह वाला बना लिया। चलते-चलते साधारण जीवन में चलने वाले अपने को अनुभव करते हो, लेकिन साधारण नहीं हो। सदा श्रेष्ठ हो। व्यवहार किया, पढ़ाई की, प्रवृत्ति सम्भाली, यह कोई विशेषता नहीं है। यह भी साधारणता है। यह तो लास्ट नम्बर वाले भी करते हैं। तो जो लास्ट नम्बर वाले भी करते वह आदि रत्न भी करें तो क्या विशेषता हुई। आदि रत्न अर्थात् हर संकल्प और कर्म में औरों से विशेषता हो। दुनिया वालों की भेंट में तो सब न्यारे हो गये, लेकिन अलौकिक परिवार में भी जो साधारण पुरुषार्थी हैं, उनसे विशेष हो। दुनिया के हिसाब से लास्ट नम्बर भी विशेष है लेकिन ईश्वरीय परिवार में आदि रत्न हो, विशेष हो। उसी हिसाब से अपने को देखो। बुजुर्ग सदा छोटों को अच्छे ते अच्छी सहज राय देने वाले, रास्ता दिखाने वाले होते हैं। ऐसे आप मुख से बोलने वाले नहीं लेकिन करके दिखाने वाले हो। तो हर कदम, हर कर्म ऐसा हो जो ईश्वरीय परिवार की आत्माओं को विशेष दिखाई दे। यही विशेष आत्माओं का कर्तव्य है ना। जो आप विशेष आत्माओं को देखे उसे बाप की स्मृति आ जाए। जैसे देखो यहाँ मधुबन में अभी भी साकार रूप में दीदी, दादी को देखते हैं तो उन्हों के कर्म में विशेष क्या समाया हुआ दिखाई देता है? बाप दिखाई देता है ना! यह भी साकार आत्मायें हैं ना। यह ब्रह्मा जैसी विशेष पार्टधारी तो नहीं, निराकार शिव बाप जैसी भी नहीं, ब्रह्मा जैसी भी नहीं। ब्राह्मण हैं। तो वह भी ब्राह्मण आप भी ब्राह्मण, तो जैसे वह विशेष निमित्त आत्मायें हैं, कैसे निमित्त बनीं? जिम्मेवारी समझती हैं ना। जिम्मेवारी ने ही विशेष बना दिया। ऐसे ही स्वयं को भी अनुभव करते हो ना। आप भी जिम्मेवार हो ना या दीदी दादी ही जिम्मेवार हैं। सेवा के क्षेत्र में तो आप ही निमित्त हो ना। चारों ओर बापदादा ने सभी विशेष आत्माओं को निमित्त बनाया है। कोई कहाँ, कोई कहाँ। इतनी जिम्मेवारी सदा स्मृति में रहे। जैसे दीदी दादी को निमित्त देख रहे हो। ऐसे ही आप लोगों से सबको अनुभव हो। वह समझें कि यह आदि रत्न हैं, इन्हों से हमें विशेष उमंग-उत्साह की प्रेरणा मिलती है। यह कहती तो नहीं हैं ना कि हम दीदी दादी हैं, हमको मानो, लेकिन कर्म स्वत: ही आकर्षित करते हैं। ऐसे ही आप सबके विशेष कर्म सबको आकर्षित करें। इतनी जिम्मेवारी है। ढीले तो नहीं हो ना। क्या करें, कैसे करें, डबल ज़िम्मेवारी है। ऐसे कहने वाले नहीं। छोड़ा और छूटा। इतनी बेहद की जिम्मवारी होते भी बाप को देखो ना। स्थूल जिम्मेवारी भी देखी ना। शिवबाबा की बात किनारे कर दो, लेकिन ब्रह्मा बाप को तो साकार में देखा ना। ब्रह्मा बाप जितनी जिम्मेवारी स्थूल में भी किसी को नहीं है। आप सोचेंगे क्या करें वायुमण्डल में रहते हैं। वायब्रेशन खराब रहते हैं। बगुले ठेंगें लगाते रहते हैं। चारों ओर आसुरी सम्प्रदाय है। लेकिन ब्रह्मा बाप ने आसुरी सम्प्रदाय के बीच न्यारा प्यारा बनकर दिखाया ना। तो फालो फादर।

अभी क्या करेंगे? यहाँ से जाओ तो सब अनुभव करें कि हमारा उमंग-उत्साह बढ़ाने वाले स्तम्भ आ गये हैं। समझा। ऐसे बाप की उम्मीदों के सितारे हो। छोटे छोटों की कोई भी बातें दिल पर नहीं रखो। बुजुर्गों की दिल फराखदिल, बड़ी दिल होती है। छोटी दिल नहीं होती। जैसे ब्रह्मा बाप ने सभी की कमजोरियों को समाकर श्रेष्ठ बना दिया ऐसे आप निमित्त हो। कभी भी यह नहीं सोचना कि यह ऐसे करते हैं, यह तो सुनते ही नहीं हैं। न सुनने वाले को भी सुनने वाला बनाना आपका काम है। वह छोटे हैं बड़े आप हो। बड़ों को बदलना है। छोटे तो होते ही नटखट हैं। तो उनकी कमजोरियों को नहीं देखो - बुजुर्ग बन कमजोरियों को समाने वाले, बाप समान बनाने वाले बनो। इतनी जिम्मेवारी है आप लोगों की। यह जिम्मेवारी फिर से स्मृति दिलाने के लिए बुलाया है। समझा। सागर के बच्चे हो ना। सागर क्या करता है? समाता है। सबका समाकर रिफ्रेश कर देते हैं। तो आप भी सबकी बातों को समाकर सबको रिफ्रेश करने वाले। जो आये वह अनुभव करे कि इस विशेष आत्मा के संग से विशेष रंग चढ़ गया। सहयोग मिल गया। आप भी "सहयोग दो, सहयोग दो", ऐसा कहने वाले तो नहीं हो ना। सहयोग देने वाले हो। जब आदि से सहयोगी बने हो तो अन्त तक सहयोग देने वाले साथी बनेंगे ना। इतने सहयोग देंगे तो छोटे तो उड़ जायेंगे। जिस भी स्थान पर आप लोग जायेंगे वह स्थान उड़ने वाला स्थान बन जायेगा ना। आप उड़नखटोले बनकर जाओ, जो भी बैठे, सम्पर्क में आये वह उड़ जाए। बापदादा को खुशी है, कौन सी? कितने साथी हैं। जब समान को देखा जाता है तो समान बच्चों को देख बाप को खुशी होती है। अभी यहाँ थोड़े आये हैं, और भी हैं, जितने भी आये हैं, उतनों को भी देख बाप खुश होते हैं। अब तो उड़नखटोला बन सबको उड़ाओ। हमारे भाई इतनी मेहनत कर रहे हैं, तरस आता है ना। सहयोग दो और उड़ाओ।

यही सेवा है विशेष आत्माओं की। जिज्ञासु समझाया, कोर्स कराया, मेला कराया, किया। यह सब करते रहते हैं। मेले में भी आप विशेष आत्माओं की विशेषता को देखें। बस आपका खड़ा होना और सभी को उमंग आना। काम करने वालों को विशेष उमंग-उत्साह का ही सहयोग चाहता है। काम करने वाले आपके छोटे भाई बहन बहुत आ गये हैं। आप बुजुर्गों का काम है उन साथियों को स्नेह की दृष्टि देना, उमंग उत्साह का हाथ बढ़ाना। आपको देखकर बाप याद आ जाए। सबके मुख से निकले यह तो बाप के स्वरूप हैं। जैसे इन दोनों के लिए (दीदी, दादी के लिए) निकलता है कि यह बाप स्वरूप है क्योंकि सेवा में प्रैक्टिकल कर्म कर रही हैं। तो ऐसे ही दृढ़ संकल्प का समारोह जरूर मनाना। क्या समझा? आप लोग तो तूफानों में नहीं आते हो ना। तूफानों से पार होने वाले। तूफानों में आने वाले नहीं। आप एग्जैम्पल हो ना। आपको देखकर सब समझते हैं ऐसे ही चलना है, ऐसे ही होता है। तो इतना अटेन्शन रहे। अच्छा।

वरदान:-

निर्विघ्न स्थिति द्वारा वायुमण्डल को पावरफुल बनाने वाले मास्टर सर्वशक्तिमान् भव!

आपकी सेवा है पहले स्व को निर्विघ्न बनाना फिर औरों को निर्विघ्न बनाना। अगर स्वयं ही विघ्नों के वश होते रहेंगे तो अन्त में निर्विघ्न नहीं रह सकेंगे इसलिए बहुतकाल की निर्विघ्न स्थिति बनाओ, कमजोर आत्माओं को भी बाप द्वारा प्राप्त हुई शक्ति दे शक्तिशाली बनाओ, मास्टर सर्वशक्तिमान् हूँ इस स्थिति का अनुभव करो - तब वायुमण्डल पावरफुल बनेगा।

स्लोगन:-

जो रॉयल बाप के रॉयल बच्चे हैं, उनकी हर चलन से रायॅल्टी दिखाई देती है।