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14-07-19

14-07-19 प्रात:मुरली ओम् शान्ति ''मातेश्वरी'' रिवाइज: 31-12-84 मधुबन


नये ज्ञान और नई जीवन द्वारा नवीनता की झलक दिखाओ

आज चारों ओर के बच्चे साकार रूप में वा आकार रूप में नया युग, नया ज्ञान, नया जीवन देने वाले बापदादा से नया वर्ष मनाने के लिए इस रूहानी हाइएस्ट और होलीएस्ट नई दरबार में उपस्थित हैं। बापदादा के पास सभी बच्चों के दिल के उमंग उत्साह और परिवर्तन करने की प्रतिज्ञाओं का शुभसंकल्प, शुभ भावनायें, शुभ कामनायें पहुँच गई हैं। बापदादा भी सर्व नये विश्व के निर्माताओं को, विश्व परिवर्तक विशेष आत्माओं को, सदा पुरानी दुनिया के पुराने संस्कार, पुरानी स्मृतियाँ, पुरानी वृत्तियाँ, पुरानी देह की स्मृति के भान से परे रहने वाले, सर्व पुरानी बातों को विदाई देने वालों को सदा के लिए बधाई दे रहे हैं। बीती को बिन्दी लगाए, स्वराज्य की बिन्दी लगाने वालों को स्वराज्य के तिलक की बधाई दे रहे हैं। सभी बच्चों को इस विदाई की बधाई के साथ नये वर्ष की विशेष सौगात - “सदा साथ रहोˮ “सदा समान रहोˮ “सदा दिलतख्तनशीन श्रेष्ठ रूहानी नशे में रहोˮ यही वरदान की सौगात दे रहे हैं।

यह सारा वर्ष यही समर्थ स्मृति रहे - साथ हैं, बाप समान हैं तो स्वत: ही हर संकल्प में विदाई की बधाई के अनुभव करते रहेंगे। पुराने को विदाई नहीं तो नवीनता की बधाई अनुभव नहीं कर सकते हैं इसलिए जैसे आज पुराने वर्ष को विदाई दे रहे हो वैसे वर्ष के साथ जो सब पुरानी बातें सुनाई उस पुराने-पन को सदा के लिए विदाई दो। नया युग है, नया ब्राहमणों का सुन्दर संसार है, नया सम्बन्ध है, नया परिवार है। नई प्राप्तियाँ हैं। सब नया ही नया है। देखते हो तो भी रूहानी नजर से रूह को देखते हो। रूहानी बातों को ही सोचते हो। तो सब नया हो गया ना। रीति नई, प्रीति नई सब नया। तो सदा नवीनता की बधाई में रहो। इसको कहा जाता है रूहानी बधाई। जो एक दिन के लिए नहीं लेकिन सदा रूहानी बधाईयों से वृद्धि को पाते रहते हो। बापदादा और सर्व ब्राहमण परिवार की बधाईयों वा रूहानी आशीर्वादों से पल रहे हो, चल रहे हो - ऐसे न्यू ईयर विश्व में कोई मना नहीं सकते। वह अल्पकाल का मनाते हैं। आप अविनाशी सदा का मनाते हो वह मनुष्य आत्मायें मनुष्यों से ही मनाते हैं। आप श्रेष्ठ आत्मयें परमात्म बाप से मनाते हो। विधाता और वरदाता से मनाते हो इसलिए मनाना अर्थात् खजानों से, वरदानों से सदा के लिए झोली भरना। उन्हों का है मनाना और गँवाना। यह है झोली भरना इसलिए ही बापदादा से मनाते हो ना। वो लोग हैपी न्यू ईयर कहते, आप एवर हैपी न्यू ईयर कहते। आज खुशी और कल दु:ख की घटना दु:खी नहीं बनाती। कैसी भी दु:ख की घटना हो लेकिन ऐसे समय पर भी सुख, शान्ति स्वरूप स्थिति द्वारा सर्व को सुख शान्ति की किरणें देने वाले मास्टर सुख के सागर दाता का पार्ट बजाते हो इसलिए घटना के प्रभाव से परे हो जाते हो और एवर हैपी का सदा अनुभव करते हो। तो इस नये वर्ष में नीवनता क्या करेंगें? कानफ्रेन्स करेंगे, मेले करेंगे। अभी सब पुरानी रीत रसमों से, पुरानी चाल चलन से थके हुए तो हैं ही। सभी समझते हैं - कुछ नया होना चाहिए। क्या नया हो, कैसे हो वह समझ नहीं सकते हैं। ऐसी नवीनता की इच्छा रखने वालों को नये ज्ञान द्वारा, नई जीवन द्वारा नवीनता की झलक का अनुभव कराओ। यह अच्छा है, इतना भी समझते हैं, लेकिन नया है, यही नया ज्ञान, नया युग ला रहा है, यह अनुभव अभी गुप्त है। होना चाहिए, यह कहते हैं। उन्हों की चाहना पूर्ण करने के लिए नई जीवन का प्रत्यक्ष एक्जैम्पुल उन्हों के सामने प्रत्यक्ष रूप में लाओ, जिससे नई झलक उन्हों को अनुभव हो। तो नया ज्ञान प्रत्यक्ष करो। हर एक ब्राहमण की जीवन से नवीनता का अनुभव हो तब नई सृष्टि की झलक उन्हों को दिखाई दे। कोई भी प्रोग्राम करो उसमें लक्ष्य रखो सभी को नवीनता का अनुभव हो। यह भी अच्छा कार्य हो रहा है इस रिमार्क देने के बजाए यह अनुभव करें कि यह नया ज्ञान, नया संसार लाने वाला है। समझा। नई सृष्टि की स्थापना के अनुभव कराने की लहर फैलाओ। नई सृष्टि आई कि आई अर्थात् हम सब की शुभ भावनाओं का फल मिलने का समय आ गया है, ऐसा उमंग-उत्साह उन्हों के मन में उत्पन्न हो। सभी के मन में निराशा के बदले शुभ भावनाओं के दीपक जागाओ। कोई भी बड़ा दिन मनाते हैं तो दीपक भी जगाते हैं। आजकल तो रॉयल मोमबत्तियाँ हो गई हैं। तो सभी के मन में यह दीपक जगाओ। ऐसा न्यू ईयर मनाओ। श्रेष्ठ भावनाओं के फल की सौगातें सभी को दो। अच्छा -

सदा सर्व को नई जीवन, नये युग की झलक दिखाने वाले, नये उमंग-उत्साह की बधाई देने वाले, सर्व को एवर हैपी बनाने वाले, विश्व को नई रचना का अनुभव कराने वाले, ऐसे सर्व श्रेष्ठ नये युग परिवर्तक, विश्व कल्याणकारी, सदा बाप के साथ का अनुभव करने वाले, बाप के सदा साथी बच्चों को बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।

पार्टियों से - 1- नये वर्ष का नया उमंग, नया उत्साह सदा के लिए रहना है, ऐसा दृढ़ संकल्प सभी ने किया? नया युग है, इसमें हर संकल्प नये से नया हो। हर कर्म नये से नया हो। इसको कहा जाता है नया उमंग नया उत्साह। ऐसा दृढ़ संकल्प किया? जैसे अविनाशी बाप है, ऐसे बाप द्वारा प्राप्ति भी अविनाशी है। तो अविनाशी प्राप्ति दृढ़ संकल्प द्वारा प्राप्त कर सकते हो। तो अपने कार्य स्थान पर जाकर इस अविनाशी दृढ़ संकल्प को भूल नहीं जाना। भूलना अर्थात् अप्राप्ति और दृढ़ संकल्प रहना अर्थात् सर्व प्राप्ति।

सदा अपने को पदमापदम भाग्यवान आत्मा समझो। जो कदम याद से उठाते हो उस हर कदम में पदमों की कमाई भरी हुई है। तो सदा अपने को एक दिन में अनगिनत कमाई करने वाले पदमापदम भाग्यवान आत्मा समझ इसी खुशी में सदा रहो कि “वाह मेरा श्रेष्ठ भाग्यˮ। तो आपको खुश देखकर औरों को भी प्रेरणा मिलती रहेगी। यही सेवा का सहज साधन है। जो याद और सेवा में सदा मस्त रहते हैं वही सेफ रहते हैं, विजयी रहते हैं। याद और सेवा ऐसी शक्ति है जिससे सदा आगे से आगे बढ़ते रहेंगे। सिर्फ याद और सेवा का बैलेन्स जरूर रखना है। बैलेन्स ही ब्लैसिंग दिलायेगा। हिम्मतवान बच्चों को हिम्मत के कारण सदा ही मदद मिलती है। हिम्मत का एक कदम बच्चे उठाते तो हजार कदम बाप की मदद मिल जाती है।

(रात के 12 बजने के बाद 1.1.85 को विदेशी भाई बहिनों ने नये वर्ष की खुशी में गीत गाये तथा बापदादा ने सभी बच्चों को मुबारक दी)

जैसे बच्चे बाप के स्नेह से याद में गीत गाते और लवलीन हो जाते हैं, ऐसे बाप भी बच्चों के स्नेह में समाये हुए हैं। बाप माशूक भी है तो आशिक भी है। हर एक बच्चे की विशेषता के ऊपर बाप भी आशिक होते हैं। तो अपनी विशेषता को जानते हो? बाप आपके ऊपर किस विशेषता से आशिक हुआ, यह अपनी विशेषता हरेक जानते हो?

सारे विश्व में से कितने थोड़े ऐसे बाप के स्नेही बच्चे हैं। तो बापदादा सभी स्नेही बच्चों को न्यू ईयर की बहुत-बहुत दिल व जान, सिक व प्रेम से पदमगुणा बधाई दे रहे हैं। आप लोगों ने जैसे गीत गाये तो बापदादा भी बच्चों की खुशी के गीत गाते हैं। बाप के गीत मन के हैं और आपके मुख के हैं। आपका तो सुन लिया, बाप का भी सुना ना?

इस नये वर्ष में सदा हर कर्म में कोई न कोई विशेषता जरूर दिखाते रहना। हर संकल्प विशेष हो, साधारण नहीं हो। क्यों? विशेष आत्माओं का हर संकल्प, बोल और कर्म विशेष ही होता है। सदा उमंग उत्साह में आगे बढ़ते रहो। उमंग-उत्साह यह विशेष पंख हैं, इन पंखों द्वारा जितना ऊंचा उड़ना चाहो उतना उड़ सकते हो। यही पंख उड़ती कला का अनुभव कराते हैं। इन पंखों से उड़ जाओ तो विघ्न वहाँ पहुँच नहीं सकते हैं। जैसे स्पेस में जाते हैं तो धरती की आकर्षण खींच नहीं सकती। ऐसे उड़ती कला वाले को विघ्न कुछ भी कर नहीं सकते। सदा उमंग-उत्साह से आगे बढ़ना और बढ़ाना यही विशेष सेवा है। सेवाधारियों को इसी विशेषता से सदा आगे बढ़ते जाना है।

विशेष चुने हुए अव्यक्त महावाक्य - लाइट-माइट हाउस की ऊंची स्थिति द्वारा परमात्म प्रत्यक्षता के निमित्त बनो

बाप को प्रत्यक्ष करने से पहले स्वयं में, जो स्वयं की महिमा है उन सब बातों की प्रत्यक्षता करो, तब बाप को प्रत्यक्ष कर सकेंगे। इसके लिए विशेष ज्वाला स्वरुप अर्थात् लाइट हाऊस और माइट हाऊस स्थिति को समझते हुए इसी पुरुषार्थ में रहो - विशेष याद की यात्रा को पॉवरफुल बनाओ, ज्ञान-स्वरुप के अनुभवी बनो।

मैजॉरिटी भक्तों की इच्छा सिर्फ एक सेकेण्ड के लिये भी लाइट देखने की है, इस इच्छा को पूर्ण करने का साधन आप बच्चों के नयन हैं। इन नयनों द्वारा बाप के ज्योतिस्वरुप का साक्षात्कार हो। यह नयन, नयन नहीं दिखाई दें लाइट का गोला दिखाई दे।

जैसे आकाश में चमकते हुए सितारे दिखाई देते हैं, ऐसे यह ऑखों के तारे सितारे-समान चमकते हुए दिखाई दें। लेकिन वह तब दिखाई देंगे जब स्वयं लाइट स्वरूप में स्थित रहेंगे। कर्म में भी लाईट अर्थात् हल्कापन और स्वरूप भी लाइट, स्टेज भी लाइट हो, जब ऐसा पुरुषार्थ वा स्थिति आप विशेष आत्माओं की रहेगी तब प्रत्यक्षता होगी। कर्म में आते, विस्तार में आते, रमणीकता में आते, सम्बन्ध और सम्पर्क में आते, न्यारे बनने का अभ्यास करो। जैसे सम्बन्ध व कर्म में आना सहज है, वैसे ही न्यारा होना भी सहज हो। ऐसी प्रैक्टिस चाहिये। अति के समय एक सेकेण्ड में अन्त हो जाये - यह है लास्ट स्टेज का पुरुषार्थ। अभी-अभी अति सम्बन्ध में और अभी-अभी जितना सम्पर्क में उतना न्यारा। जैसे लाइट हाउस में समा जाएं। इसी अभ्यास से लाइट हाउस, माइट हाउस स्थिति बनेगी और अनेक आत्माओं को साक्षात्कार होंगे - यही प्रत्यक्षता का साधन है।

अभी लास्ट यही सीजन रह गयी है जिसमें प्रत्यक्षता का नगाड़ा बज़ेगा। आवाज़ बुलन्द होगा, सायलेंस होगी। लेकिन सायलेंस द्वारा ही नगाड़ा बजेगा। जब तक मुख के नगाड़े ज्यादा हैं, तब तक प्रत्यक्षता नहीं। जब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा तब मुख के नगाड़े बन्द हो जायेंगे। गाया हुआ भी है ‘साइंस के ऊपर सायलेंस की जीत', न कि वाणी की। अभी प्रत्यक्षता की विशेषता बादलों के अन्दर है। बादल बिखर रहे हैं लेकिन हटे नहीं हैं। जितना-जितना शक्तिशाली मास्टर ज्ञान सूर्य वा लाइट माइट हाउस की स्टेज पर पहुँचते जायेंगे वैसे यह बादल बिखरते जायेंगे। बादल मिट जायेंगे तो सेकण्ड में नगाड़ा बज जायेगा।

जैसे चारों ओर अगर आग जल रही हो और एक कोना भी शीतल कुण्ड हो तो सब उसी तरफ दौड़कर जाते हैं, ऐसे शान्ति स्वरूप होकर शान्ति कुण्ड का अनुभव कराओ। मन्सा सेवा द्वारा शान्ति कुण्ड की प्रत्यक्षता कर सकते हो। जहाँ भी शान्ति सागर के बच्चे रहते हैं, वह स्थान शान्तिकुण्ड हो।

ब्रह्मा बाप समान बेहद के ताजधारी बन चारों ओर प्रत्यक्षता की लाइट और माइट फैलाओ जिससे सर्व आत्माओं को निराशा से आशा की किरण दिखाई दे। सबकी अंगुली उस विशेष स्थान की ओर हो। जो आकाश से परे अंगुली कर ढ़ूंढ़ रहे हैं उन्हों को यह अनुभव हो कि इस धरती पर, वरदान भूमि पर धरती के सितारे प्रत्यक्ष हो गये हैं। यह सूर्य, चन्द्रमा और तारामण्डल यहाँ अनुभव हो। संगठित रूप में पावरफुल-शक्तिशाली लाइट-हाउस, माइट-हाउस वायब्रेशन्स फैलाने की सेवा करो। अभी सभी लोग इन्तजार कर रहे हैं कि कब हमारे रचता वा मास्टर रचता सम्पन्न या सम्पूर्ण बन हम लोगों से अपनी स्वागत कराते। प्रकृति भी तो स्वागत करेगी। तो वह सफलता की माला से स्वागत करे - वो दिन आना ही है। जब सफलता के बाजे बजेंगे तब प्रत्यक्षता के बाजे बजेंगे। बजने तो हैं ही।

भारत बाप की अवतरण भूमि है और भारत प्रत्यक्षता का आवाज बुलन्द करने के निमित्त भूमि है। विदेश का सहयोग भारत में प्रत्यक्षता करायेगा और भारत की प्रत्यक्षता का आवाज विदेश तक पहुँचेगा। वाणी से प्रभाव डालने वाले दुनिया में भी अनेक हैं। लेकिन आपके वाणी की विशेषता यही है कि आपका बोल बाप की याद दिलाये। बाप को प्रत्यक्ष करने की सिद्धि आत्माओं को सद्गति की राह दिखाये - यही न्यारापन है। जैसे अब तक यह प्रसिद्ध हुआ है कि यह राजयोगी आत्मायें श्रेष्ठ हैं, राजयोग श्रेष्ठ है, कर्तव्य श्रेष्ठ है, परिवर्तन श्रेष्ठ है। ऐसे इन्हें सिखाने वाला डायरेक्ट आलमाइटी है - ज्ञान सूर्य साकार सृष्टि पर उदय हुआ है - यह अभी प्रत्यक्ष करो।

अगर आप समझते हो कि जल्दी-जल्दी बाप की प्रत्यक्षता हो तो तीव्रगति का प्रयत्न है - सभी अपनी वृत्ति को अपने लिए, दूसरों के लिए पॉजिटिव धारण करो। नॉलेजफुल भले बनो लेकिन अपने मन में निगेटिव धारण नहीं करो। निगेटिव का अर्थ है किचड़ा। तो वृत्ति पावरफुल करो, वायब्रेशन पावरफुल बनाओ, वायुमण्डल पावरफुल बनाओ। जब चारों ओर का वायुमण्डल सम्पूर्ण निर्विघ्न, रहमदिल, शुभ भावना, शुभ कामना वाला बन जायेगा तब आपकी यही लाइट-माइट प्रत्यक्षता के निमित्त बनेंगी। निरन्तर सेवा और तपस्या इन दोनों के बैलेन्स से प्रत्यक्षता होगी। जैसे सेवा का डॉयलाग बनाते हो ऐसे तपस्या भी ऐसी करो जो सब पतंगे बाबा, बाबा कहते आपके विशेष स्थानों पर पहुंच जाएं। परवाने बाबा-बाबा कहते आयें तब कहेंगे प्रत्यक्षता।

माइक भी ऐसे तैयार करो जो मीडिया समान प्रत्यक्षता का आवाज फैलायें। आप कहेंगे भगवान आ गया, भगवान आ गया.... वह तो कामन समझते हैं लेकिन आपकी तरफ से दूसरे कहें, अथॉरिटी वाले कहें, पहले आप लोगों को शक्तियों के रूप में प्रत्यक्ष करें। जब शक्तियां प्रत्यक्ष होंगी तब शिव बाप प्रत्यक्ष हो ही जायेगा। अच्छा - ओम् शान्ति।

वरदान:-

योग करने और कराने की योग्यता के साथ-साथ प्रयोगी आत्मा भव

बापदादा ने देखा बच्चे योग करने और कराने दोनों में होशियार हैं। तो जैसे योग करने-कराने में योग्य हो, ऐसे प्रयोग करने में योग्य बनो और बनाओ। अभी प्रयोगी जीवन की आवश्यकता है। सबसे पहले चेक करो कि अपने संस्कार परिवर्तन में कहाँ तक प्रयोगी बने हैं? क्योंकि श्रेष्ठ संस्कार ही श्रेष्ठ संसार के रचना की नींव हैं। अगर नींव मजबूत है तो अन्य सब बातें स्वत: मजबूत हुई पड़ी हैं।

स्लोगन:-

अनुभवी आत्मायें कभी वायुमण्डल वा संग के रंग में नहीं आ सकती।