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नया मलयालम टीवी चैनल

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आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

मध्यप्रदेश के राज्य कैबिनेट मंत्री ने आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र प्रदान किया मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन में ब्रह्मा कुमारिस संगठन के प्रयासों की सराहना की। मध्य प्रदेश सरकार में पशुपालन और मत्स्यपालन मंत्री और प्रभारी मंत्री श्री लखन सिंह यादव, मुरैना जिला कलेक्टर, प्रियंका दास के साथ, प्रशासन की ओर से इस…

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर

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  • भारत के भाई बीके चार्ली की सेवा रिपोर्ट (ऑस्ट्रेलिया) की यात्रा
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युवा शिविर का सफल आयोजन.

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आज का मुरली प्रवचन
 
 

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 20-01-2020 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन

 


 

“मीठे बच्चे - पुण्य आत्मा बनना है तो अपना पोतामेल देखो कि कोई पाप तो नहीं होता है, सच का खाता जमा है?”

 

प्रश्न:

 

सबसे बड़ा पाप कौन-सा है?

 

उत्तर:

 

किसी पर भी बुरी दृष्टि रखना-यह सबसे बड़ा पाप है। तुम पुण्य आत्मा बनने वाले बच्चे किसी पर भी बुरी दृष्टि (विकारी दृष्टि) नहीं रख सकते। जाँच करनी है हम कहाँ तक योग में रहते हैं? कोई पाप तो नहीं करते हैं? ऊंच पद पाना है तो खबरदारी रखो कि ज़रा भी कुदृष्टि न हो। बाप जो श्रीमत देते हैं उस पर पूरा चलते रहो।

 

गीत:-

 

मुखड़ा देख ले प्राणी.....

 

ओम् शान्ति।

 

बेहद का बाप अपने बच्चों को कहते हैं बच्चे, अपने भीतर ज़रा जाँच करो। यह तो मनुष्यों को मालूम रहता है कि हमने सारे जीवन में कितने पाप, कितने पुण्य किये हैं? रोज़ाना अपना पोतामेल देखो-कितने पाप और कितने पुण्य किये हैं? किसको रंज (नाराज़) तो नहीं किया? हर एक मनुष्य समझ सकते हैं-हमने लाइफ में क्या-क्या किया है? कितना पाप किया है, कितना दान-पुण्य आदि किया है? मनुष्य यात्रा पर जाते हैं तो दान-पुण्य करते हैं। कोशिश करके पाप नहीं करते हैं। तो बाप बच्चों से ही पूछते हैं-कितने पाप, कितने पुण्य किये हैं? अभी तुम बच्चों को पुण्य आत्मा बनना है। कोई भी पाप नहीं करना है। पाप भी अनेक प्रकार के होते हैं। कोई पर बुरी दृष्टि जाती है तो यह भी पाप है। बुरी दृष्टि होती ही है विकार की। वह है सबसे खराब। कभी भी विकार की दृष्टि नहीं जानी चाहिए। अक्सर करके स्त्री-पुरूष की तो विकार की ही दृष्टि होती है। कुमार-कुमारी की भी कहाँ न कहाँ विकार की दृष्टि उठती है। अब बाप कहते हैं यह विकार की दृष्टि नहीं होनी चाहिए। नहीं तो तुमको बन्दर कहना पड़े। नारद का मिसाल है ना। बोला हम लक्ष्मी को वर सकते हैं! तुम भी कहते हो ना हम तो लक्ष्मी को वरेंगे। नारी से लक्ष्मी, नर से नारायण बनेंगे। बाप कहते हैं अपने दिल से पूछो-कितने तक हम पुण्य आत्मा बने हैं? कोई पाप तो नहीं करते हैं? कहाँ तक योग में रहते हैं?
तुम बच्चे तो बाप को पहचानते हो तब तो यहाँ बैठे हो ना। दुनिया के मनुष्य थोड़ेही बाबा को पहचानेंगे कि यह बापदादा है। तुम ब्राह्मण बच्चे तो जानते हो परमपिता परमात्मा ब्रह्मा में प्रवेश होकर हमको अविनाशी ज्ञान रत्नों का खजाना देते हैं। मनुष्यों के पास होता है विनाशी धन। वही दान करते हैं, वह तो हैं पत्थर। यह हैं ज्ञान के रत्न। ज्ञान सागर बाप के पास ही रत्न हैं। यह एक-एक रत्न लाखों रूपयों का है। रत्नागर बाप से ज्ञान रत्न धारण कर और फिर इन रत्नों का दान करना है। जितना जो लेवे और देवे, उतना ऊंच पद पाये। तो बाप समझाते हैं अपने अन्दर देखो हमने कितने पाप किये हैं? अभी कोई पाप तो नहीं होता है? ज़रा भी कुदृष्टि न हो। बाप जो श्रीमत देते हैं उस पर पूरा चलते रहें, यह खबरदारी चाहिए। माया के तूफान तो भल आयें परन्तु कर्मेन्द्रियों से कोई विकर्म नहीं करना है। कोई तरफ कुदृष्टि जाये तो उसके आगे खड़ा भी नहीं होना चाहिए। एकदम चला जाना चाहिए। मालूम पड़ जाता है-इनकी कुदृष्टि है। अगर ऊंच पद पाना है तो बहुत खबरदार रहना है। कुदृष्टि होगी तो फिर लूले-लंगड़े बन पड़ेंगे। बाप जो श्रीमत देते हैं, उस पर चलना है। बाप को बच्चे ही पहचान सकते हैं। समझो बाबा कहाँ जाता है, बच्चे ही समझेंगे कि बापदादा आया है। और मनुष्य देखते तो बहुत हैं परन्तु उनको थोड़ेही पता है। कोई पूछे भी यह कौन है? बोलो, बापदादा हैं। बैज तो सबके पास होने ही चाहिए। बोलो, शिवबाबा हमको इस दादा द्वारा अविनाशी ज्ञान रत्नों का दान देते हैं। यह है प्रीचुअल नॉलेज। प्रीचुअल फादर सभी रूहों का बाप बैठ यह नॉलेज देते हैं। शिव भगवानुवाच, गीता में कृष्ण भगवानुवाच रांग है। ज्ञान सागर पतित-पावन शिव को ही कहा जाता है। ज्ञान से ही सद्गति होती है। यह है अविनाशी ज्ञान रत्न। सद्गति दाता एक ही बाप है। यह सब अक्षर पूरी रीति याद रखने चाहिए। अभी बच्चे समझते हैं कि हम बाप को जानते हैं और बाप भी समझते हैं कि हम बच्चों को जानते हैं। बाप तो कहेगा ना-यह सब हमारे बच्चे हैं, परन्तु जान नहीं सकते हैं। तकदीर में होगा तो आगे चलकर जानेंगे। समझो यह बाबा कहाँ जाता है, कोई पूछते हैं कि यह कौन है? जरूर शुद्ध भाव से ही पूछेंगे। अक्षर ही यह बोलो कि बापदादा हैं। बेहद का बाप है निराकार। वह जब तक साकार में न आये तब तक बाप से वर्सा कैसे मिले? तो शिवबाबा प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा एडाप्ट कर वर्सा देते हैं। यह प्रजापिता ब्रह्मा और यह बी.के. हैं। पढ़ाने वाला ज्ञान का सागर है। उनसे ही वर्सा मिलता है। यह ब्रह्मा भी पढ़ता है। यह ब्राह्मण से फिर देवता बनने वाला है। कितना सहज है समझाना। कोई को भी बैज पर समझाना अच्छा है। बोलो, बाबा कहते हैं मुझे याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश हो जायेंगे। पावन बन और पावन दुनिया में चले जायेंगे। यह पतित-पावन बाप है ना। हम पुरूषार्थ कर रहे हैं पावन बनने का। जब विनाश का समय होगा तो फिर हमारी पढ़ाई पूरी हो जायेगी। कितना सहज है समझाना। कोई भी कहाँ आते-जाते हैं तो भी बैज साथ में होना चाहिए। इस बैज के साथ फिर एक छोटा पर्चा भी होना चाहिए। उसमें लिखा हो कि भारत में बाप आकरके फिर से आदि सनातन देवी-देवता धर्म स्थापन करते हैं। और सभी अनेक धर्म इस महाभारत लड़ाई द्वारा कल्प पहले मिसल ड्रामा प्लैन अनुसार खलास हो जायेंगे। ऐसे पर्चे 2-4 लाख छपे हों, जो कोई को भी पर्चा दे सकते हैं। ऊपर में त्रिमूर्ति हो, दूसरे तरफ सेन्टर्स की एड्रेस हो। बच्चों को सारा दिन सर्विस का ख्याल चलना चाहिए।
बच्चों ने गीत सुना - रोज़ अपना पोतामेल बैठ निकालना चाहिए कि आज सारे दिन में हमारी अवस्था कैसी रही? बाबा ने ऐसे बहुत मनुष्य देखे हैं जो रोज़ रात को सारे दिन का पोतामेल बैठ लिखते हैं। जाँच करते हैं-कोई खराब काम तो नहीं किया? सारा लिखते हैं। समझते हैं अच्छी जीवन कहानी लिखी हुई होगी तो पिछाड़ी वाले भी पढ़कर ऐसे सीखेंगे। ऐसा लिखने वाले अच्छे आदमी ही होते हैं। विकारी तो सब होते ही हैं। यहाँ तो वह बात नहीं है। तुम अपना पोतामेल रोज़ देखो। फिर बाबा के पास भेज देना चाहिए तो उन्नति अच्छी होगी और डर भी रहेगा। सब क्लीयर लिखना चाहिए-आज हमारी बुरी दृष्टि गई, यह हुआ.......। जो एक-दो को दु:ख देते हैं बाबा उन्हें गाज़ी कहते हैं। जन्म-जन्मान्तर के पाप तुम्हारे सिर पर हैं। अभी तुमको याद के बल से पापों का बोझ उतारना है इसलिए रोज़ देखना चाहिए हम सारे दिन में कितना गाज़ी बने हैं? किसको दु:ख देना गोया गाज़ी बनना है। पाप बन जाता है। बाप कहते हैं गाज़ी बन किसको दु:ख मत दो। अपनी पूरी जाँच करो-हमने कितना पाप, कितना पुण्य किया है? जो भी मिले सबको यह रास्ता बताना ही है। सबको बहुत प्यार से बोलो, बाप को याद करना है और पवित्र बनना है। गृहस्थ व्यवहार में रहते कमल फूल समान पवित्र बनना है। भल तुम संगम पर हो परन्तु यह तो रावण राज्य है ना। इस मायावी विषय वैतरणी नदी में रहते कमल फूल समान पवित्र बनना है। कमल फूल बहुत बाल बच्चों वाला होता है। फिर भी पानी से ऊपर रहता है। गृहस्थी है, बहुत चीजें पैदा करता है। यह दृष्टान्त तुम्हारे लिए भी है, विकारों से न्यारा होकर रहो। यह एक जन्म पवित्र रहो तो फिर यह अविनाशी हो जायेगा। तुमको बाप अविनाशी ज्ञान रत्न देते हैं। बाकी तो सब हैं पत्थर। वो लोग तो भक्ति की ही बातें सुनाते हैं। ज्ञान सागर पतित-पावन तो एक ही है तो ऐसे बाप से बच्चों का कितना लव रहना चाहिए। बाप का बच्चों से, बच्चों का बाप से लव रहता है। बाकी और कोई से कनेक्शन नहीं। सौतेले वह हैं जो बाप की मत पर पूरा नहीं चलते हैं। रावण की मत पर चलते हैं तो राम की मत थोड़ेही ठहरी। आधाकल्प है रावण सम्प्रदाय इसलिए इनको भ्रष्टाचारी दुनिया कहा जाता है। अब तुम्हें और सबको छोड़ एक बाप की मत पर चलना है। बी.के. की मत मिलती है सो भी जाँच करनी होती है कि यह मत राइट है वा रांग है? तुम बच्चों को राइट और रांग समझ भी अभी मिली है। जब राइटियस आये तब ही राइट और रांग बताये। बाप कहते हैं तुमने आधाकल्प यह भक्ति मार्ग के शास्त्र सुने हैं, अब मैं तुमको जो सुनाता हूँ-यह राइट है या वह राइट है? वह कहते हैं ईश्वर सर्वव्यापी है, मैं कहता हूँ मैं तो तुम्हारा बाप हूँ। अब जज करो कौन राइट है? यह भी बच्चों को ही समझाया जाता है ना, जब ब्राह्मण बनें तब समझें। रावण सम्प्रदाय तो बहुत हैं, तुम तो बहुत थोड़े हो। उनमें भी नम्बरवार हैं। अगर कोई कुदृष्टि है, तो भी उनको रावण सम्प्रदाय कहा जायेगा। राम सम्प्रदाय का तब समझा जाए जब सारी दृष्टि बदल कर दैवी बन जाए। अपनी अवस्था से हर एक समझ तो सकते हैं ना। पहले तो ज्ञान था नहीं, अभी बाप ने रास्ता बताया है। तो देखना है अविनाशी ज्ञान रत्नों का दान करता रहता हूँ? भक्त लोग दान करते हैं विनाशी धन का। अभी तुमको दान करना है अविनाशी धन का, न कि विनाशी। अगर विनाशी धन है तो अलौकिक सेवा में लगाते जाओ। पतित को दान करने से पतित ही बन जाते हो। अभी तुम अपना धन दान करते हो तो इसका एवजा फिर 21 जन्मों के लिए नई दुनिया में मिलता है। यह सब बातें समझने की हैं। बाबा सर्विस की युक्तियाँ भी बतालते रहते हैं। सब पर रहम करो। गाया हुआ भी है परमपिता परमात्मा ब्रह्मा द्वारा स्थापना करते हैं। परन्तु अर्थ नहीं समझते। परमात्मा को ही सर्वव्यापी कह दिया है। तो बच्चों को सर्विस का शौक बहुत अच्छा रखना है। औरों का कल्याण करेंगे तो अपना भी कल्याण होगा। दिन-प्रतिदिन बाबा बहुत सहज करते जाते हैं। यह त्रिमूर्ति का चित्र तो बहुत अच्छी चीज़ है। इसमें शिवबाबा भी है, फिर प्रजापिता ब्रह्मा भी है। प्रजापिता ब्रह्माकुमार-कुमारियों द्वारा फिर से भारत में 100 परसेन्ट पवित्रता-सुख-शान्ति का दैवी स्वराज्य स्थापन कर रहे हैं। बाकी अनेक धर्म इस महाभारत लड़ाई से कल्प पहले मुआफिक विनाश हो जायेंगे। ऐसे-ऐसे पर्चे छपवाकर बांटने चाहिए। बाबा कितना सहज रास्ता बताते हैं। प्रदर्शनी में भी पर्चे दो। पर्चे द्वारा समझाना सहज है। पुरानी दुनिया का विनाश तो होना ही है। नई दुनिया की स्थापना हो रही है। एक आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना हो रही है। बाकी यह सब विनाश हो जायेंगे कल्प पहले मुआफिक। कहाँ भी जाओ, पॉकेट में भी पर्चे और बैजेस सदैव पड़े रहें। सेकण्ड में जीवनमुक्ति गाई हुई है। बोलो, यह है बाप, यह दादा। उस बाप को याद करने से यह सतयुगी देवता पद पायेंगे। पुरानी दुनिया का विनाश, नई दुनिया की स्थापना, विष्णुपुरी नई दुनिया में फिर इन्हों का राज्य होगा। कितना सहज है। तीर्थों आदि पर मनुष्य जाते हैं, कितने धक्के खाते हैं। आर्य समाजी आदि भी ट्रेन भरकर जाते हैं। इसको कहा जाता है धर्म के धक्के, वास्तव में हैं अधर्म के धक्के। धर्म में तो धक्के खाने की दरकार नहीं है। तुम तो पढ़ाई पढ़ रहे हो। भक्ति मार्ग में मनुष्य क्या-क्या करते रहते हैं!
बच्चों ने गीत में भी सुना कि मुखड़ा देख..... यह मुखड़ा तुम्हारे सिवाए तो कोई देख नहीं सकते हैं। भगवान को भी तुम दिखला सकते हो। यह हैं ज्ञान की बातें। तुम मनुष्य से देवता, पाप आत्मा से पुण्य आत्मा बनते हो। दुनिया इन बातों को बिल्कुल नहीं जानती। यह लक्ष्मी-नारायण स्वर्ग के मालिक कैसे बनें-यह किसी को पता नहीं है। तुम बच्चे तो सब जानते हो। किसको बुद्धि में तीर लग जाए तो बेड़ा पार हो जाए। अच्छा!
मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
अव्यक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए विशेष होमवर्क
हर समय नवींनता का अनुभव करते औरों को भी नये उमंग-उत्साह में लाना। खुशी में नाचना और बाप के गुणों के गीत गाना। मधुरता की मिठाई से स्वयं का मुख मीठा करते दूसरों को भी मधुर बोल, मधुर संस्कार, मधुर स्वभाव द्वारा मुख मीठा कराना।

 

धारणा के लिए मुख्य सार:

 

1) अगर विनाशी धन है तो उसको सफल करने के लिए अलौकिक सेवा में लगाना है। अविनाशी धन का दान भी जरूर करना है।

 

2) अपने पोतामेल में देखना है कि हमारी अवस्था कैसी है? सारे दिन में कोई खराब काम तो नहीं होते हैं? एक-दो को दु:ख तो नहीं देते हैं? किसी पर कुदृष्टि तो नहीं जाती है?

 

वरदान:

 

हर खजाने को बाप के डायरेक्शन प्रमाण कार्य में लगाने वाले आनेस्ट वा ईमानदार भव

 

आनेस्ट अर्थात् ईमानदार उसे कहा जाता है जो बाप के प्राप्त खजानों को बाप के डायरेक्शन बिना किसी भी कार्य में नहीं लगाये। अगर समय, वाणी, कर्म, श्वांस वा संकल्प परमत या संगदोष में व्यर्थ तरफ गंवाते हो, स्वचिंतन के बजाए परचिंतन करते हो, स्वमान की बजाए किसी भी प्रकार के अभिमान में आते हो, श्रीमत के बदले मनमत के आधार पर चलते हो तो आनेस्ट नहीं कहेंगे। यह सब खजाने विश्व कल्याण के लिए मिले हैं, तो उसी में ही लगाना यही है आनेस्ट बनना।

 

स्लोगन:

 

आपोजीशन माया से करनी है दैवी परिवार से नहीं।

 

 

 


     

   बीकेवार्ता वेबपोर्टल : उदघाटन के ऐतिहासिक क्षण प्रकाशन शुभारम्भ दि 28 नवम्बर, 2009


  

बीकेवार्ता आर्टिकल बँक

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 विश्व पर्यावरण दिवस

संयुक्त राष्ट्र द्वारा सकारात्मक पर्यावरण कार्य हेतु दुनियाभर में मनाया जाने वाला 'विश्व पर्यावरण दिवस' सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण और जीवन का अन्योन्याश्रित संबंध है तथापि हमें अलग से यह दिवस मनाकर पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लेने की आवश्यकता पड़ रही है। यह चिंताजनक ही नहीं, शर्मनाक भी है। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टाकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। इसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया। इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का जन्म हुआ तथा प्रति वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस आयोजित करके नागरिकों कोप्रदूषण की समस्या से अवगत कराने का निश्चय किया गया। तथा इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम जनता को प्रेरित करना था। उक्त गोष्ठी में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने 'पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव' विषय पर व्याख्यान दिया था। पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में यह भारत का प्रारंभिक क़दम था। तभी से हम प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाते आ रहे हैं।

 


 

विचारपुष्प  -   जो संकल्प करो उसे बीच-बीच में दृढ़ता का ठप्पा लगाओ तो विजयी बन जायेंगे ! 

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संस्कार धन - बोध कथा  : मन का राजा 

राजा भोज वन में शिकार करने गए लेकिन घूमते हुए अपने सैनिकों से बिछुड़ गए और अकेले पड़ गए। वह एक वृक्ष के नीचे बैठकर सुस्ताने लगे। तभी उनके सामने से एक लकड़हारा सिर पर बोझा उठाए गुजरा। वह अपनी धुन में मस्त था। उसने राजा भोज को देखा पर प्रणाम करना तो दूर, तुरंत मुंह फेरकर जाने लगा।
भोज को उसके व्यवहार पर आश्चर्य हुआ। उन्होंने लकड़हारे को रोककर पूछा, ‘तुम कौन हो?’ लकड़हारे ने कहा, ‘मैं अपने मन का राजा हूं।’ भोज ने पूछा, ‘अगर तुम राजा हो तो तुम्हारी आमदनी भी बहुत होगी। कितना कमाते हो?’ लकड़हारा बोला, ‘मैं छह स्वर्ण मुद्राएं रोज कमाता हूं और आनंद से रहता हूं।’ भोज ने पूछा, ‘तुम इन मुद्राओं को खर्च कैसे करते हो?’ लकड़हारे ने उत्तर दिया, ‘मैं प्रतिदिन एक मुद्रा अपने ऋणदाता को देता हूं। वह हैं मेरे माता पिता। उन्होंने मुझे पाल पोस कर बड़ा किया, मेरे लिए हर कष्ट सहा। दूसरी मुद्रा मैं अपने ग्राहक असामी को देता हूं ,वह हैं मेरे बालक। मैं उन्हें यह ऋण इसलिए देता हूं ताकि मेरे बूढ़े हो जाने पर वह मुझे इसे लौटाएं।

तीसरी मुद्रा मैं अपने मंत्री को देता हूं। भला पत्नी से अच्छा मंत्री कौन हो सकता है, जो राजा को उचित सलाह देता है ,सुख दुख का साथी होता है। चौथी मुद्रा मैं खजाने में देता हूं। पांचवीं मुद्रा का उपयोग स्वयं के खाने पीने पर खर्च करता हूं क्योंकि मैं अथक परिश्रम करता हूं। छठी मुद्रा मैं अतिथि सत्कार के लिए सुरक्षित रखता हूं क्योंकि अतिथि कभी भी किसी भी समय आ सकता है। उसका सत्कार करना हमारा परम धर्म है।’ राजा भोज सोचने लगे, ‘मेरे पास तो लाखों मुद्राएं है पर जीवन के आनंद से वंचित हूं।’ लकड़हारा जाने लगा तो बोला, ‘राजन् मैं पहचान गया था कि तुम राजा भोज हो पर मुझे तुमसे क्या सरोकार।’ भोज दंग रह गए।

 


ब्रह्माकुमारीज् की प्रमुख खबरें -

 

 

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बोध कथा-

विचार की पवित्रता

एक राजा और नगर सेठ में गहरी मित्रता थी। वे रोज एक दूसरे से मिले बिना नहीं रह पाते थे। नगर सेठ चंदन की लकड़ी का व्यापार करता था। एक दिन उसके मुनीम ने बताया कि लकड़ी की बिक्री कम हो गई है। तत्काल सेठ के मन में यह विचार कौंधा कि अगर राजा की मृत्यु हो जाए, तो मंत्रिगण चंदन की लकडि़यां उसी से खरीदेंगे। उसे कुछ तो मुनाफा होगा। शाम को सेठ हमेशा की तरह राजा से मिलने गया। उसे देख राजा ने सोचा कि इस नगर सेठ ने उससे दोस्ती करके न जाने कितनी दौलत जमा कर ली है, ऐसा कोई नियम बनाना होगा जिससे इसका सारा धन राज खजाने में जमा हो जाए।
दोनों इसी तरह मिलते रहे, लेकिन पहले वाली गर्मजोशी नहीं रही। एक दिन नगर सेठ ने पूछ ही लिया, ‘पिछले कुछ दिनों से हमारे रिश्तों में एक ठंडापन आ गया है। ऐसा क्यों?’ राजा ने कहा, ‘मुझे भी ऐसा लग रहा है। चलो, नगर के बाहर जो महात्मा रहते हैं, उनसे इसका हल पूछा जाए।’ उन्होंने महात्मा को सब कुछ बताया। महात्मा ने कहा, ‘सीधी सी बात है। आप दोनों पहले शुद्ध भाव से मिलते रहे होंगे, पर अब संभवत: एक दूसरे के प्रति आप लोगों के मन में कुछ बुरे विचार आ गए हैं इसलिए मित्रता में पहले जैसा सुख नहीं रह गया।’ नगर सेठ और राजा ने अपने-अपने मन की बातें कह सुनाईं। महात्मा ने सेठ से कहा,’ तुमने ऐसा क्यों नहीं सोचा कि राजा के मन में चंदन की लकड़ी का आलीशान महल बनवाने की बात आ जाए? इससे तुम्हारा चंदन भी बिक जाता। विचार की पवित्रता से ही संबंधों में मिठास आती है। तुमने राजा के लिए गलत सोचा इसलिए राजा के मन में भी तुम्हारे लिए अनुचित विचार आया। गलत सोच ने दोनों के बीच दूरी बढ़ा दी। अब तुम दोनों प्रायश्चित करके अपना मन शुद्ध कर लो, तो पहले जैसा सुख फिर से मिलने लगेगा।’ 5  

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विश्व और भारत महत्वपूर्ण दिवस


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महाशिवरात्री संदेश दि. 22 से 28 फरवरी, 2017 रात 12 बजे तक 7 दिनमें 

7 करोंड व्हाटसएप युजर्स को दिया जायेगा महाशिवरात्री का आध्यात्मिक रहस्य

ओमशान्ति मीडिया पत्रिका, बीकवार्ता वेबपोर्टल तथा डॉ. दिपक हरके का संयुक्त उपक्रम

वंडर बुक ऑफ रिकार्ड इंटरनॅशनल, लंदन में दर्ज होगा विश्व किर्तीमान

 

अहमदनगर (प्रतिनिधी) हम प्रतिवर्ष भक्तिभाव से महाशिवरात्री महोत्सव मनाते है, किन्तू यह उत्सव क्या मनाते ? इसके पिछे छिपा आध्यात्मिक क्या है ? इसकी जानकारी कुछ ही लोगो के पास है ? महाशिवरात्री के आध्यात्मिक रहस्य को हम अपने जीवन में समझकर अपने जीवनमें प्रतिपल खुश रहने हेतू महाशिवरात्री संदेश देना आवश्यक है  दि. 22 से 28 फरवरी, 2017 की रात 12 से 7 करोड व्हॉटसअॅप युजर्सको महाशिवरात्रीका आध्यात्मिक संदेश प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की ओरसे पहूंचाया जायेगा. ओमशान्ति मीडिया पत्रिका, www.bkvarta.com बीकवार्ता वेबपोर्टल तथा डॉ. दिपक हरके का यह संयुक्त उपक्रम है.

 

इसके पूर्व का विश्व विक्रम डॉ. दिपक हरके इनके नाम पर है, दिपावली का आध्यात्मिक रहस्य का ऑडिओ मॅसेज 1 करोड 352 व्हॉटस्अॅप युजर्स को 29 अक्तुबर 2016 को रात 12 बजे से 20 अक्तुबर, 2016 के रात बजे बजे तक भेजकर उन्होने यह उपलब्ध हासिल की थी. महाशिवरात्री का विश्वविक्रमी संदेश प्राप्त करने के लिए 9422288888 इस व्हॉटसअॅप मैसेज पर WR एैसा मॅसेज भेजकर आप यह संदेश प्राप्त कर सकतें है. विश्वविक्रम में सहभागीता पत्र प्राप्त करने के लिए हरएक सहभागी व्यक्ति निर्धारीत राशी जमा कर वंडर बुक ऑफ रिकार्डमें सहभाग प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकतें है . इस विश्वविक्रम का उदघाटन भारतीय क्रीकेट टिम के उपकप्तान अजिंक्य रहणे इनके शुभहस्तोंसे मुंबई के बीकेसीस्थित एमसीए क्लब में सपन्न हूआ. इस उपक्रम के बारें में रहाने ने डॉ. दिपक हरके को बधाई दी तथा ब्रह्माकुमारीज् के मानवसेवा के कार्य की सराहना की. 

 

 

१३ मार्च (पालक्कड:केरला) ध्यान महोत्सव का आयोजन. विभीन्य मान्यवारोंने किया राजयोग ध्यान अभ्यास.

 

31 जनवरी (भूवनेश्वर) वार्षिकोत्सव मनाया गया. सेवाकेंद्र के एक वर्ष पूर्ती पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

 


 

30 जनवरी (विलेपार्ले:मुंबई) सफल सारथी अवार्ड. ट्रान्सपोर्ट एण्ड ट्रॅव्हल्स प्रभागद्वारा यह अवार्ड प्राप्त ड्रायव्हर भाईयों को सम्मानित किया गया.

 


 

29 जनवरी (हैद्राबाद) मुख्यमंत्री महोदय शान्तिसरोवर में. भ्राता एम. चंद्राबाबू नायडूजीने शांती सरोवर भेट की. शांतीसरांेवर के दसवें वर्धापन दिन कार्यक्रम का उदघाटन उन्होंने किया.


 

28 जनवरी (जयपूर:राज.) अंतरराष्ट्रीय खेल सम्मेलन मंें ईश्वरीय संदेश. स्पोटर्स एण्ड फिजिकल एज्युकेशन विषयपर आयोजित इस मम्मेलन में बीके जगबीरभाईने दिया संदेश.


 

27 जनवरी (मडिकेरी:कर्ना.) कर्म की गती गुह्य है. - भगवानभाई सेंट्रल जेल में ब्र.कु भगवानभाई, माऊंट आबू ने दिया ईश्वरीय संदेश


 

26 जनवरी (मंगलौर:कर्ना.) सेंट्रल जेल में दिया ईश्वरीय संदेश. ब्र.कु भगवानभाई, माऊंट आबू ने दिया ईश्वरीय संदेश.


 

25 जनवरी (मालाड:मुंबई)फिल्म इन्स्टि. में मेडिटेशन रुम का उदघाटन. प्रसिध्द फिल्म निर्देशक तथा निर्माता भ्राता सुभाष घई ने विशअलींग फिल्म इन्स्टि. में मेडिटेशन रुम का उघाटन किया

 


 

24 जनवरी (कटघोरा) आध्यात्मिक समागम एवं सम्मान समारोह संपन्न. नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधीयों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया.


 

23 जनवरी (लातूर:महा.) उर्जा छात्र-क्लब स्थापित. गणतंत्र दिवस के अवसरपर विवेकानंद विद्यालय, सीबीएससी लातूर में महाराष्ट्र उर्जा छात्र क्लब की स्थापना की गई


 

22 जनवरी (बिलासपूर:छ.ग.) आरके नगर में सरस्वती झाँकी. राजकिशोर नगर, बीके रुपा बहनने माँ सरस्वती की महिमा का प्रवचन किया.


21 जनवरी (शान्तिवन) रेडिओ मधुबन वर्धापन दिन. ब्रहमाकुमारीज कम्युनिटी रेडिओ मधुबन का 4 था वर्धापन दिवस मनाया गया.

 


 

20 जनवरी (मालाड:मुंबई) सुरक्षीत रास्ता सप्ताह. एसटी डिपो में हुआ कार्यक्रम.


 

19 जनवारी (केशोद:गुज) यात्रा खुशनुमा जीवन की और कार्यक्रम संपन्न. ब्र.कु.डा. सविता, माऊंट आबूने किया मार्गदर्शन.


 

18 जनवरी (आबूपर्वत:पाण्डवभवन) पिताश्रीजी का स्मृतिदिवस. विश्वशांती दिवस के रुप में समूचे विश्व में मनाया गया.


 

17 जनवरी (विशाखापट्टणम) विधायक महोदय को दिया संदेश. नये वर्ष का संदेश भ्राता विष्णु कुमार राजू जी को बीके शशीकला बहनने दिया 


 

16 जनवरी (मुंबई) 102वीं विज्ञान परिषद में स्पार्क सेवा. मुंबई विश्व विद्यालय में आयोजित इस परिषदमें स्प्रिच्ुअल एप्लीकेशन एण्ड रिसर्च की सुंदर सेवा हुई


 

15 जनवरी (जयपूर) नारित्वदर्शन की सहभागीता. जयपूर अन्तरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टीवल में नारित्व दर्शन को नॉमिनेट किया गया.


 

14 जनवरी (शान्तिवन) रिडिकव्हरींग ऑफ लाईफ. वैज्ञानिक तथा अभियंता प्रभागद्वारा राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया


 

13 जनवरी (शान्तिवन) ब्र.कु. करुणाभाईजी का 75 वाँ जनमदिन. ब्रहमाकुमारीज संस्था के मीडिया उपाध्यक्ष तथा मल्टीमीडिया प्रभारी ब्र.कु. करुणाभाईजी के जनमदिन की प्लेटिनम ज्युबिली हर्षोल्हाससे मनाई गई.


 

12 जनवरी (शांतीवन)दादीजी का 99 वाँ जनमदिन मनाया. ब्रहमाकुमारीज संस्था की मुख्य प्रशासिका ददी जानकीजी का जन्मदिन बहुत ही उमंग उत्साहसे मनाया गया


 

11 जनवरी (मा.आबू) बीके केदारभाई का अभिनंदन किया दादीजीने. राजस्थान सरकारद्वारा उर्जा संरक्षण पुरस्कार प्राप्त करनेवाले बीके केदारभाई (उर्जा ऑडिटर) का अभिनंदन दादी रतनमोहिनीजी, बीके रमेशभाईजीने किया.


 

10 जनवरी (टिकरापारा:बीलासपूर) बालिका शिक्षा शिविर में सदेश. सरस्वती शिशु मंदिर उच्चस्तर मा. विद्यालय में बीके मंजू बहनने दिया ईश्वरीय संदेश.


 

09 जनवरी (राहूरी:महा.) आज की शाम भगवान के नाम. ब्र.कु. सुरजभाई, मा. आबू, ब्र.कु. गीताबहन पुना तथा उषा बहन राहूरी ने दिया ईश्वरीय संदेश. ब्र.कु. बद्रिश हेहाडरायने मीडियाद्वारा पहूंचाया संदेश


 

08 जनवरी (कलपेट्टा:केरला) केंद्रीय विद्यालय में दिया ईश्वरीय संदेश. ब्र.कु. भगवानभाई, आबू पर्वत ने  कही नैतिक मूल्यों की बा


 

07 जनवरी (बार्शि:महा.) कुंकूलोक हायस्कूल में ईश्वरीय संदेश. बीके संगीताबहनने दिया संदेश


 

06 जनवरी (केशोद) महान जादुगर विरागभाई हकुभा को दिया संदेश. बी.के. सत्याबहन, तथा बीके शिल्पा बहनने दिया परिचय.


 

05 जनवरी (हरिद्वार) ऋषीकुल में संत स्नेहमीलन, ब्र.कु.मिनाबहनने परमपिता परमात्मा का दिया सत्य परिच


 

04 जनवारी (बंेगलौर) फ्रि आय चेकींग कॅम्प. सेवाकेंद्र की ओरसे आयोजित कॅम्प में सहभागीयों दिया गया संदे


 

03 जनवरी (लिमा,पेरु:फ्रान्स)कोप-20 में ब्रहमाकुमारीज् की सहभागीता. क्लायमेंट चेंज कॉन्फरन्स में ब्रहमाकुमारीजने किया सहभाग


 

02 जनवरी (वाशी:मुंबई) सदभावना सभा में ब्रहमाकुमारीज् सहभाग. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की औरसे आयोजित इस मीटिंग में बहनोंने दिया संदेश


 

01 जनवरी (तिनसुखीया:आसाम) स्वर्णीम युग की पुन:स्थापना. गीता के भगवान को प्रत्यक्ष करने के सम्मेलनको, बी के ब्रजमोहनभाईजी, देहली, ब्र.कु. उषाबहनजी मा. आबू, बीके आशा बहनजी ने किया सम्बोधित

 

31 मार्च (कोरबा) नारी सुरक्षा अभियान. मानिकपुर में नारी सुरक्षा अभियान अंतर्गत व्याख्यान संपन्न हुआ


 

 

30 मार्च (राजिम) राज्यपाल महोदय को ई·ारीय संदेश. छत्तीसगढ़ के मान. राज्यपाल महामहिम शेखरदत्त जी को ई·ारीय संदेश दिया बहन पुष्पाने. इनके साथ ब्रा.कु. नारायणभाई और सांसद चन्दूलालजी उपस्थित थे.


 

29 मार्च (पिंपरी:पुना) शिवज्ञान दर्शन मेला. ब्र.कु पारुदीदी, ब्र.कु. सुरेखा बहन, उद्योजक संदिप वाघेरे इनके करकमलोंद्वारा इसका उदघाटन किया गया.


 

28 मार्च (बोरवली:मुंबई) दिव्या बहन को वूमन ऑफ एक्सलन्स अवार्ड. आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में लाला लजपतराय इन्सिस्ट¬ूट आफ मॅनेजमेंट की औरसे ब्राहृाकुमारी दिव्या बहन को आध्यत्मिक क्षेत्र में अद्वितीय कार्य करने पर वूमन ऑफ एक्सलन्स अवार्ड से सम्मानित किया गया. डा. कमल गुप्ताजी, चेअरमन एलएलआय ने सम्मानित किया.


 

27 मार्च (अंजार-कच्छ:गुज.) रतनमणी मेटल एण्ड ट¬ूब लि. में कार्यक्रम. मुंदरा सेवाकेंद्र से ब्रा.कु. सुशला बहन ने मोटीवेशनल ट्रेनिंग शिविर करवाया.


 

26 मार्च (सायन:मुंबई) शांती उद्यान में महिला दिवस. आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष मंे ब्राहृाकुमारी संतोषदिदीजी के प्रमुख उपस्थित में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. वरीष्ठ इन्स्पेक्टर बहन सुजाथा को इस समय ई·ारीय संदेश दिया गया.


 

25 मार्च (गुलबर्गा) 47 फिट शिवलिंग का भव्य आयोजन. विशाल द्वादर्श ज्योतिलिंग अमृतसरोवर में 5000 स्केअर फिट जगह पर किया गया. हर रोज दो हजार के करीब श्रद्धालु दर्शन करने आते थे.


 

24 मार्च (नेपाल) फ्यूचर ऑफ पावर. समाज के गणमान्य व्यक्तियों के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन पोखरा में किया गया.


 

23 मार्च (शांतीवन) रेडिओ मधुबन ने मनाया महिला दिवस. आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में, नारित्व दर्शन कार्यक्रम का आयाजन ब्राहृाकुमारीज् सामुदायीक रेडिओ स्टेशन , रेडिओ मधुबन ने आयोजित किया.


 

22 मार्च (बार्शी) महिला दिवस मनाया गया. सेवाकेंद्र की औरसे आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया

 


 

21 मार्च (मनीपाल:कर्ना.) 35 फिट महाशिवलिंग. शहर के मुख्य स्थान के सर्कल में भगवान शिव की 35 फिट शिवलिंग की भव्य प्रतिमा लगाई गई.


 

20 मार्च (विलेपार्ले:मुंबई) टीवी तथा फिल्म कलाकरोंने मनाई शिवरात्री. लाखंण्डवाला क्षेत्र में टीवी तथा फिल्म कलाकर डाली बींद्रा, श्रीमती ज्योत्सना डिगे आदियांेने शिवजयंती मनाई.


 

19 मार्च (चेंबुर:मुंबई) 40 फिट शिवलिंग दर्शन. पहली बार भगवान शिव के 40 फिट ऊँचाईवाले शिवलिंगका दर्शन लिया श्रद्धालुओंने.


 

18 मार्च (मुंबई) नारी सुरक्षा, हमारी सुरक्षा. महिला सशक्तिकरण हेतु निकाली गई रॅली. समाज की सभी वर्गो की महिलाओं लिया हिस्सा.


 

17 मार्च (बैंगलौर) शिवजयंती महोत्सव. भगवान शिव का भव्य ज्योतिलिंग स्थापन किया गया.शिवलिंगका दर्शन लिया श्रद्धालुओंने.


 

16 मार्च (बार्शी) शिवजयंती महोत्सव. भ.के. गव्हाने, पत्रकार, विनोद बुडूख, अध्यक्ष लायन्स कल्ब, प्रकाश महामुनी, अध्यक्ष, लायन्स क्लब, तेजस बखारीया, अध्यक्ष, रोटरी क्लब, मोहनभाई, संगीत बहन, वर्षा बहन, राणी बहन महादेवी बहन वैजिनाथभाई आदियोंने किया शिवध्वजारोहण.


 

15 मार्च (चेन्नई) बारा ज्योतिलिंगम् दर्शन. शहर मंे भगवान शिव के बारा ज्योतिलिंगर्म दर्शन करने हेतु भव्य चैतन्य आयोजन किया गया.


14 मार्च (बेलापूर:मुंबई) शिवजयंती महोत्सव. भ्राता मंदा म्हात्रे,पूर्व विधायक, बहन स्नेहल पाठक, टीवी कलाकार, भ्राता आर सी सिंग, बीके शिला, बीके शुभांगी , बीके मिना ने किया उदघाटन


 

13 मार्च (अजमेर) भव्य शिवलिंग का निर्माण. शिवजयंती महोत्सवपर 15फिट का भव्य शिवलिंग का निर्माण किया गया जिसका दर्शन शहर के हजारों श्रद्धालुओंने लिया.


 

12 मार्च (केशोद) शिवजयंती महोत्सव. विधायक भ्राता अरविंदभाई लाडाणी, रोटरी क्लब के प्रमुख भ्राता कांतीभाई चुडासमा, जेसीस के प्रमुख भ्राता रजनीभाई फडदु, प्रो. डो. भुपेन्द्रभाई जेपी तथा बीके रुपा बहन उपस्थित थे


 

11 मार्च (मालाड:लिबर्टी गार्डन) गीतकार श्रवणकुमार पहुंचे शिवरात्रीपर . परमात्मा शिव की मनोरम्य झाँकी.  शिवजयंती महोत्सव पर शिवजयंती की झाँकि निकाली गई. जिसका उदघाटन शोभा बहन, कॅप्टर जीहेना, कॅ. पूनम, बीके राजबेन, बीके कुंती बहन, म्युझीक डायरेक्टर श्रवणकुमार, गीतकार डेबूजीत, चांदमिश्रा, निरजाबहन आदियों के करकमलोंद्वारा किया उदघाटन


 

10 मार्च (कोरबा) शिव शंकर झाँकि. शिवजयंती महोत्सव पर शिवजयंती की झाँकि निकाली गई.


 

09 मार्च (ग्वालियर) शिवजयंती महोत्सव. सेवाकेंद्रकी औरसे शिवजयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया.


 

08 मार्च (नासिक) डो. भटकर सेवाकेंद्रपर. सीडॅक के प्रणेता तथा सुपर कम्प्युटर के जनक डो. विजय भटकर सेवाकेंद्र पर पहुंचे तथा राजयोग अनुभूती की.


 

 

07 मार्च (मालाड:दिडोंशी) सड़क निर्माण में ब्र.कु. योगदान. शहर विकास के अंतर्गत सड़क निर्माण योजना में ब्रह्माकुमारी बहनों ने प्रवचन दिया.


 

06 मार्च (ग्वालीयर:दिनलयाल नगर) शिवपार्वती झाँकि. शिवजयंती महोत्सव पर शिवजयंती की झाँकि निकाली गई.


 


05 मार्च (बाणेर) अमरनाथ की भव्य गुफाये. शिवजयंती महोत्सव पर भव्य अमरनाथ गुफाओं का निर्माण किया गया. जिससे बहोतही सुंदर सेवायें हुई.


04 मार्च (बेलगाम) विश्व की सबसे बडी पतंग. ब्रह्माकुमारीज् की औरसे विश्व की सबसे बडी पतंग का निर्माण किया गया इसमें शिवसंदेश दिया गया. 203 फिट पतंग का निर्माण किया गया.

 


 

03 मार्च (शांतीवन) शिवध्वजारोहण. शिवरात्री महोत्सव पर परमात्मा शिव का ध्वज लहराया बापदादा, दादी जानकीजी तथा वरीष्ठ दादी, भाईयोंने


02 मार्च (हातीना:गुज) महिला सम्मेलनसंपन्न. वडोदरा से पोरबंदर नारी सशक्तिकरण अभियान अंतर्गत कार्यक्रम संपन्न हुआ


 

01 मार्च (गुडगांव) ओआरसी में प्रशासक डायलाग. प्रशासक प्रभाग आयोजित इस सेमिनार में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.


 

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