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नया मलयालम टीवी चैनल

कोच्चि: केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री, माननीय। मुरलीधरन ने ब्रह्म कुमारियों का नया मलयालम चैनल लॉन्च किया - मलयाली को समर्पित राजयोग टीवी मलयालम। यह एक पूर्ण चैनल है जो हमारी ज़रूरत की हर चीज़ वितरित करता है। भारतीय दर्शन विज्ञान और अध्यात्म का सामंजस्य है। यह चैनल ब्रह्म कुमारियों की मानवता की समग्र दृष्टि का प्रमाण है। मंत्री ने अपने…

आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

मध्यप्रदेश के राज्य कैबिनेट मंत्री ने आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र प्रदान किया मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन में ब्रह्मा कुमारिस संगठन के प्रयासों की सराहना की। मध्य प्रदेश सरकार में पशुपालन और मत्स्यपालन मंत्री और प्रभारी मंत्री श्री लखन सिंह यादव, मुरैना जिला कलेक्टर, प्रियंका दास के साथ, प्रशासन की ओर से इस…

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर   ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के मेडिकल विंग के स्थानीय सेवाकेंद्र “प्रभु उपहार भवन, माधवगंज लश्कर ग्वालियर” द्वारा निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर का आयोजन किया गया।शिविर में परामर्श देनें के लिए डॉ. निर्मला कंचन (स्त्री रोग विशेषज्ञ), एवं…

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19 मई (आबूरोड) आध्यात्मिकता और भौतिकता के संगम से होगा विश्व परीवर्तन.

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19 मई (आबूरोड) आध्यात्मिकता और भौतिकता के संगम से होगा विश्व परीवर्तन. केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र. संस्था के 80 वर्ष कार्यक्रम में वक्तव्य.Read more...

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युवा शिविर का सफल आयोजन.

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आज का मुरली प्रवचन
 
 

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21-11-2019 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन

 


 

“मीठे बच्चे - सन शोज़ फादर, मनमत को छोड़ श्रीमत पर चलो तब बाप का शो कर सकेंगे''

 

प्रश्न:

 

किन बच्चों की रक्षा बाप जरूर करते ही हैं?

 

उत्तर:

 

जो बच्चे सच्चे हैं, उनकी रक्षा जरूर होती है। अगर रक्षा नहीं होती है तो अन्दर में जरूर कोई न कोई झूठ होगा। पढ़ाई मिस करना, संशय में आना माना अन्दर में कुछ न कुछ झूठ है। उन्हें माया अंगूरी मार देती है।

 

प्रश्न:

 

किन बच्चों के लिए माया चुम्बक है?

 

उत्तर:

 

जो माया की खूबसूरती की तरफ आकर्षित हो जाते हैं, उन्हों के लिए माया चुम्बक है। श्रीमत पर चलने वाले बच्चे आकर्षित नहीं होंगे।

 

ओम् शान्ति।

 

रूहानी बाप बैठ रूहानी बच्चों को समझाते हैं, यह तो बच्चों ने निश्चय किया है रूहानी बाप हम रूहानी बच्चों को पढ़ाते हैं। जिसके लिए ही गायन है-आत्मायें परमात्मा अलग रहे बहुकाल... मूल-वतन में अलग नहीं रहते हैं। वहाँ तो सब इकट्ठे रहते हैं। अलग रहते हैं तो जरूर आत्मायें वहाँ से बिछुड़ती हैं, आकरके अपना-अपना पार्ट बजाती हैं। सतोप्रधान से उतरते-उतरते तमोप्रधान बनती हैं। बुलाते हैं पतित-पावन आकर हमको पावन बनाओ। बाप भी कहते हैं हम हर 5 हज़ार वर्ष के बाद आते हैं। यह सृष्टि का चक्र ही 5 हज़ार वर्ष है। आगे तुम यह नहीं जानते थे। शिवबाबा समझाते हैं तो जरूर कोई तन द्वारा समझायेंगे। ऊपर से कोई आवाज़ तो नहीं करते हैं। शक्ति वा प्रेरणा आदि की कोई बात नहीं। तुम आत्मा शरीर में आकर वार्तालाप करती हो। वैसे बाप भी कहते हैं मैं भी शरीर द्वारा डायरेक्शन देता हूँ। फिर उस पर जो जितना चलते हैं, अपना ही कल्याण करते हैं। श्रीमत पर चलें वा न चलें, टीचर का सुनें वा न सुनें, अपने लिए ही कल्याण वा अकल्याण करते हैं। नहीं पढ़ेंगे तो जरूर फेल होंगे। यह भी समझाते रहते हैं शिवबाबा से सीखकर फिर औरों को सिखलाना है। फादर शोज़ सन। जिस्मानी फादर की बात नहीं। यह है रूहानी बाप। यह भी तुम समझते हो जितना हम श्रीमत पर चलेंगे उतना वर्सा पायेंगे। पूरा चलने वाले ऊंच पद पायेंगे। नहीं चलने वाले ऊंच पद नहीं पायेंगे। बाप तो कहते हैं मुझे याद करो तो तुम्हारे पाप कट जाएं। रावण राज्य में तुम्हारे पर पाप तो बहुत चढ़े हुए हैं। विकार में जाने से ही पाप आत्मा बनते हैं। पुण्य आत्मा और पाप आत्मा जरूर होते हैं। पुण्य आत्मा के आगे पाप आत्मायें जाकर माथा टेकती हैं। मनुष्यों को यह पता नहीं है कि देवतायें जो पुण्य आत्मा हैं, वही फिर पुनर्जन्म में आते-आते पाप आत्मा बनते हैं। वह तो समझते हैं यह सदैव पुण्य आत्मा हैं। बाप समझाते हैं, पुनर्जन्म लेते-लेते सतोप्रधान से तमोप्रधान तक आते हैं। जब बिल्कुल पाप आत्मा बन जाते हैं तो फिर बाप को बुलाते हैं। जब पुण्य आत्मा हैं तो याद करने की दरकार नहीं रहती। तो यह तुम बच्चों को समझाना है, सर्विस करनी है। बाप तो नहीं जाकर सबको सुनायेंगे। बच्चे सर्विस करने लायक हैं तो बच्चों को ही जाना चाहिए। मनुष्य तो दिन-प्रतिदिन असुर बनते जाते हैं। पहचान न होने कारण बकवास करने में भी देरी नहीं करते हैं। मनुष्य कहते हैं गीता का भगवान कृष्ण है। तुम समझाते हो वह तो देहधारी है, उनको देवता कहा जाता है। कृष्ण को बाप नहीं कहेंगे। यह तो सब फादर को याद करते हैं ना। आत्माओं का फादर तो दूसरा कोई होता नहीं। यह प्रजापिता ब्रह्मा भी कहते हैं-निराकार फादर को याद करना है। यह कारपोरियल फादर हो जाता है। समझाया तो बहुत जाता है, कई पूरा न समझकर उल्टा रास्ता ले जंगल में जाकर पड़ते हैं। बाप तो रास्ता बताते हैं स्वर्ग में जाने का। फिर भी जंगल तरफ चले जाते हैं। बाप समझाते हैं तुमको जंगल तरफ ले जाने वाला है-रावण। तुम माया से हार खाते हो। रास्ता भूल जाते हो तो फिर उस जंगल के कांटे बन जाते हो। वह फिर स्वर्ग में देरी से आयेंगे। यहाँ तुम आये ही हो स्वर्ग में जाने का पुरूषार्थ करने। त्रेता को भी स्वर्ग नहीं कहेंगे। 25 परसेन्ट कम हुआ ना। वह फेल गिना जाता है। तुम यहाँ आये ही हो पुरानी दुनिया छोड़ नई दुनिया में जाने। त्रेता को नई दुनिया नहीं कहेंगे। नापास वहाँ चले जाते हैं क्योंकि रास्ता ठीक पकड़ते नहीं। नीचे-ऊपर होते रहते हैं। तुम महसूस करते हो जो याद होनी चाहिए वह नहीं रहती। स्वर्गवासी जो बनते हैं उनको कहेंगे अच्छे पास। त्रेता वाले नापास गिने जाते हैं। तुम नर्कवासी से स्वर्गवासी बनते हो। नहीं तो फिर नापास कहा जाता है। उस पढ़ाई में तो फिर दुबारा पढ़ते हैं। इसमें दूसरा वर्ष पढ़ने की तो बात नहीं। जन्म-जन्मान्तर, कल्प-कल्पान्तर वही इम्तहान पास करते हैं जो कल्प पहले किया है। इस ड्रामा के राज़ को अच्छी रीति समझना चाहिए। कई समझते हैं हम चल नहीं सकते हैं। बुढ़ा है तो उनको हाथ से पकड़कर चलाओ तो चलेंगे, नहीं तो गिर पड़ेंगे। परन्तु तकदीर में नहीं है तो कितना भी जोर देते फूल बनाने का, परन्तु बनते नहीं। अक भी फूल होता है। यह कांटे तो चुभते हैं।
बाप कितना समझाते हैं। कल तुम जिस शिव की पूजा करते थे वह आज तुमको पढ़ा रहे हैं। हर बात में पुरूषार्थ के लिए ही जोर दिया जाता है। देखा जाता है-माया अच्छे-अच्छे फूलों को नीचे गिरा देती है। हड़गुड़ तोड़ देती है, जिसको फिर ट्रेटर कहा जाता है। जो एक राजधानी छोड़ दूसरे में चला जाता है उनको ट्रेटर कहा जाता है। बाप भी कहते हैं मेरे बनकर फिर माया का बन जाते हैं तो उनको भी ट्रेटर कहा जाता है। उनकी चलन ही ऐसी हो जाती है। अब बाप माया से छुड़ाने आये हैं। बच्चे कहते हैं-माया बड़ी दुश्तर है, अपनी तरफ बहुत खींच लेती है। माया जैसे चुम्बक है। इस समय चुम्बक का रूप धरती है। कितनी खूबसूरती दुनिया में बढ़ गई है। आगे यह बाइसकोप आदि थोड़ेही थे। यह सब 100 वर्ष में निकले हैं। बाबा तो अनुभवी है ना। तो बच्चों को इस ड्रामा के गुहय राज़ को अच्छी रीति समझना चाहिए, हरेक बात एक्यूरेट नूँधी हुई है। सौ वर्ष में यह जैसे बहिश्त बन गया है, आपोजीशन के लिए। तो समझा जाता है-अब स्वर्ग और ही जल्दी होना है। साइंस भी बहुत काम में आती है। यह तो बहुत सुख देने वाली भी है ना। वह सुख स्थाई हो जाए उसके लिए इस पुरानी दुनिया का विनाश भी होना है। सतयुग के सुख हैं ही भारत के भाग्य में। वह तो आते ही बाद में हैं, जब भक्तिमार्ग शुरू होता है, जब भारतवासी गिरते हैं तब दूसरे धर्म वाले नम्बरवार आते हैं। भारत गिरते-गिरते एकदम पट पर आ जाता है। फिर चढ़ना है। यहाँ भी चढ़ते हैं फिर गिरते हैं। कितना गिरते हैं, बात मत पूछो। कोई तो मानते ही नहीं कि बाबा हमको पढ़ाते हैं। अच्छे-अच्छे सर्विसएबुल जिनकी बाप महिमा करते हैं वह भी माया के चम्बे में आ जाते हैं। कुश्ती होती है ना। माया भी ऐसे लड़ती है। एकदम पूरा गिरा देती है। आगे चल तुम बच्चों को मालूम पड़ता जायेगा। माया एकदम पूरा सुला देती है। फिर भी बाप कहते हैं एक बार ज्ञान सुना है तो स्वर्ग में जरूर आयेंगे। बाकी पद तो नहीं पा सकेंगे ना। कल्प पहले जिसने जो पुरूषार्थ किया है वा पुरूषार्थ करते-करते गिरे हैं, ऐसे ही अब भी गिरते और चढ़ते हैं। हार और जीत होती है ना। सारा मदार बच्चों का याद पर है। बच्चों को यह अखुट खजाना मिलता है। वह तो कितना लाखों का देवाला मारते हैं। कोई लाखों का धनवान बनते हैं, सो भी एक जन्म में। दूसरे जन्म में थोड़ेही इतना धन रहेगा। कर्मभोग भी बहुत है। वहाँ स्वर्ग में तो कर्मभोग की बात होती नहीं। इस समय तुम 21 जन्मों के लिए कितना जमा करते हो। जो पूरा पुरूषार्थ करते हैं, पूरा स्वर्ग का वर्सा पाते हैं। बुद्धि में रहना चाहिए हम बरोबर स्वर्ग का वर्सा पाते हैं। यह ख्याल नहीं करना है कि फिर नीचे गिरेंगे। यह सबसे जास्ती गिरे अब फिर चढ़ना ही है। ऑटोमेटिकली पुरूषार्थ भी होता रहता है। बाप समझाते हैं-देखो, माया कितनी प्रबल है। मनुष्यों में कितना अज्ञान भर गया है, अज्ञान के कारण बाप को भी सर्वव्यापी कह देते हैं। भारत कितना फर्स्टक्लास था। तुम समझते हो हम ऐसे थे, अब फिर बन रहे हैं। इन देवताओं की कितनी महिमा है, परन्तु कोई जानते नहीं हैं, तुम बच्चों के सिवाए। तुम ही जानते हो बेहद का बाप ज्ञान सागर आकर हमको पढ़ाते हैं फिर भी माया बहुतों को संशय में ला देती है। झूठ कपट छोड़ते नहीं। तब बाप कहते हैं-सच्चा-सच्चा अपना चार्ट लिखो। परन्तु देह-अभिमान के कारण सच नहीं बताते हैं। तो वह भी विकर्म बन जाता है, सच बताना चाहिए ना। नहीं तो बहुत सजा खानी पड़ती है। गर्भ जेल में भी बहुत सजा मिलती है। कहते हैं तोबां-तोबां.. हम फिर ऐसा काम नहीं करेंगे। जैसे किसको मार मिलती है तो भी ऐसे माफी माँगते हैं। सज़ा मिलने पर भी ऐसे करते हैं। अभी तुम बच्चे समझते हो माया का राज्य कब से शुरू हुआ है। पाप करते रहते हैं। बाप देखते हैं-यह इतना मीठे-मीठे मुलायम नहीं बनते हैं। बाप कितना मुलायम बच्चे मिसल हो चलते हैं, क्योंकि ड्रामा पर चलते रहते हैं। कहेंगे जो हुआ ड्रामा की भावी। समझाते भी हैं कि आगे फिर ऐसा न हो। यह बापदादा दोनों इकट्ठे हैं ना। दादा की मत अपनी, ईश्वर की मत अपनी है। समझना चाहिए कि यह मत कौन देता है? यह भी बाप तो है ना। बाप की तो माननी चाहिए। बाबा तो बड़ा बाबा है ना, इसलिए बाबा कहते हैं ऐसे ही समझो शिवबाबा समझाते हैं। नहीं समझेंगे तो पद भी नहीं पायेंगे। ड्रामा के प्लेन अनुसार बाप भी है, दादा भी है। बाप की श्रीमत मिलती है। माया ऐसी है जो महावीर, पहलवानों से भी कोई न कोई उल्टा काम करा देती है। समझा जाता है यह बाप की मत पर नहीं हैं। खुद भी फील करते हैं, मैं अपनी आसुरी मत पर हूँ। श्रीमत देने वाला आकर उपस्थित हुआ है। उनकी है ईश्वरीय मत। बाप खुद कहते हैं इनकी अगर कोई ऐसी मत मिल भी गई तो भी उनको मैं ठीक करने वाला बैठा हूँ। फिर भी हमने रथ लिया है ना। हमने रथ लिया तब ही इसने गाली खाई है। नहीं तो कभी गाली नहीं खाई। मेरे कारण कितनी गाली खाते हैं। तो इनकी भी सम्भाल करनी पड़े। बाप रक्षा जरूर करते हैं। जैसे बच्चों की रक्षा बाप करते हैं ना। जितना सच्चाई पर चलते हैं उतनी रक्षा होती है। झूठे की रक्षा नहीं होती। उनकी तो फिर सज़ा कायम हो जाती है। इसलिए बाप समझाते हैं - माया तो एकदम नाक से पकड़कर खत्म कर देती है। बच्चे खुद फील करते हैं माया खा लेती है तो फिर पढ़ाई छोड़ देते हैं। बाप कहते हैं पढ़ाई जरूर पढ़ो। अच्छा, कहाँ किसका दोष है। इसमें जैसा जो करेगा, सो भविष्य में पायेगा क्योंकि अभी दुनिया बदल रही है। माया ऐसे अंगुरी मार देती है जो वह खुशी नहीं रहती है। फिर चिल्लाते हैं-बाबा, पता नहीं क्या होता है। युद्ध के मैदान में बहुत खबरदार रहते हैं कि कहाँ कोई अंगूरी न मार दे। फिर भी जास्ती ताकत वाले होते हैं तो दूसरे को गिरा देते हैं। फिर दूसरे दिन पर रखते हैं। यह माया की लड़ाई तो अन्त तक चलती रहती है। नीचे-ऊपर होते रहते हैं। कई बच्चे सच नहीं बताते हैं। इज्ज़त का बहुत डर है-पता नहीं बाबा क्या कहेंगे। जब तक सच बताया नहीं है तब तक आगे चल न सकें। अन्दर में खटकता रहता है, फिर वृद्धि हो जाती है। आपेही सच कभी नहीं बतायेंगे। कहाँ दो हैं तो समझते हैं यह बाबा को सुनायेंगे तो हम भी सुना दें। माया बड़ी दुश्तर है। समझा जाता है उनकी तकदीर में इतना ऊंच पद नहीं है तो सर्जन से छिपाते हैं। छिपाने से बीमारी छूटेगी नहीं। जितना छिपायेंगे उतना गिरते ही रहेंगे। भूत तो सबमें हैं ना। जब तक कर्मातीत अवस्था नहीं बनी, तब तक क्रिमिनल आई भी छोड़ती नहीं है। सबसे बड़ा दुश्मन है काम। कई गिर पड़ते हैं। बाबा तो बार-बार समझाते हैं शिवबाबा के सिवाए कोई देहधारी को याद नहीं करना है। कई तो ऐसे पक्के हैं, जो कभी किसकी याद भी नहीं आयेगी। पतिव्रता स्त्री होती है ना, उनकी कुबुद्धि नहीं होती है। अच्छा!
मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

 

धारणा के लिए मुख्य सार:

 

1) हमें पढ़ाने वाला स्वयं ज्ञान का सागर, बेहद का बाप है, इसमें कभी संशय नहीं लाना है, झूठ कपट छोड़ अपना सच्चा-सच्चा चार्ट रखना है। देह-अभिमान में आकर कभी ट्रेटर नहीं बनना है।

 

2) ड्रामा को बुद्धि में रख बाप समान बहुत-बहुत मीठा मुलायम (नम्र) बनकर रहना है। अपना अहंकार नहीं दिखाना है। अपनी मत छोड़ एक बाप की श्रेष्ठ मत पर चलना है।

 

वरदान:

 

साथी को सदा साथ रख सहयोग का अनुभव करने वाले कम्बाइन्ड रूपधारी भव

 

सदा “आप और बाप'' ऐसे कम्बाइन्ड रहो जो कोई भी अलग न कर सके। कभी अपने को अकेला नहीं समझो। बापदादा अविनाशी साथ निभाने वाले आप सबके साथी हैं। बाबा कहा और बाबा हाज़िर है। हम बाबा के, बाबा हमारा। बाबा आपकी हर सेवा मे सहयोग देने वाले है सिर्फ अपने कम्बाइन्ड स्वरूप के रूहानी नशे में रहो।

 

स्लोगन:

 

सेवा और स्व-उन्नति दोनों का बैलेन्स हो तो सदा सफलता मिलती रहेगी।

 


 

 details 

 

     

   बीकेवार्ता वेबपोर्टल : उदघाटन के ऐतिहासिक क्षण प्रकाशन शुभारम्भ दि 28 नवम्बर, 2009


  

बीकेवार्ता आर्टिकल बँक

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बहूतसे सेवाकेंद्र की तथा प्रेस के भाई बहनों की माँग रहती है की उन्हें नये विषय पर ब्राहृाकुमारीज् आर्टिकल्स की आवश्यकता रहती है. जैसे मन की शांती, जीवन में सुख शांती प्राप्त करने की बातें, तनाव मुक्त जीवन आदि विषयोंपर समाचार पत्रों के लिए तथा पढने के लिए तथा दुसरों को समझाने हेतू आर्टिकल्स चाहिए और वह भी हिंदी तथा अपनी प्रादेशिक/रिजनल भाषाओं में, बीकेवार्ता ने इस बात को देखते हूए बहनों तथा भाइयों की मांग को कुछ हद तक पूरी करने का प्रयास किया है, ज्ञानसागर परमात्मा से कुछ ज्ञान की अंजली को जनमाध्यमोंको देने हेतू ज्ञानांजली - बीकेवार्ता आर्टिकल बँक को शुरु किया है,

 

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 विश्व पर्यावरण दिवस

संयुक्त राष्ट्र द्वारा सकारात्मक पर्यावरण कार्य हेतु दुनियाभर में मनाया जाने वाला 'विश्व पर्यावरण दिवस' सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण और जीवन का अन्योन्याश्रित संबंध है तथापि हमें अलग से यह दिवस मनाकर पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लेने की आवश्यकता पड़ रही है। यह चिंताजनक ही नहीं, शर्मनाक भी है। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टाकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। इसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया। इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का जन्म हुआ तथा प्रति वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस आयोजित करके नागरिकों कोप्रदूषण की समस्या से अवगत कराने का निश्चय किया गया। तथा इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम जनता को प्रेरित करना था। उक्त गोष्ठी में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने 'पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव' विषय पर व्याख्यान दिया था। पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में यह भारत का प्रारंभिक क़दम था। तभी से हम प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाते आ रहे हैं।

 


 

विचारपुष्प  -   जो संकल्प करो उसे बीच-बीच में दृढ़ता का ठप्पा लगाओ तो विजयी बन जायेंगे ! 

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संस्कार धन - बोध कथा  : मन का राजा 

राजा भोज वन में शिकार करने गए लेकिन घूमते हुए अपने सैनिकों से बिछुड़ गए और अकेले पड़ गए। वह एक वृक्ष के नीचे बैठकर सुस्ताने लगे। तभी उनके सामने से एक लकड़हारा सिर पर बोझा उठाए गुजरा। वह अपनी धुन में मस्त था। उसने राजा भोज को देखा पर प्रणाम करना तो दूर, तुरंत मुंह फेरकर जाने लगा।
भोज को उसके व्यवहार पर आश्चर्य हुआ। उन्होंने लकड़हारे को रोककर पूछा, ‘तुम कौन हो?’ लकड़हारे ने कहा, ‘मैं अपने मन का राजा हूं।’ भोज ने पूछा, ‘अगर तुम राजा हो तो तुम्हारी आमदनी भी बहुत होगी। कितना कमाते हो?’ लकड़हारा बोला, ‘मैं छह स्वर्ण मुद्राएं रोज कमाता हूं और आनंद से रहता हूं।’ भोज ने पूछा, ‘तुम इन मुद्राओं को खर्च कैसे करते हो?’ लकड़हारे ने उत्तर दिया, ‘मैं प्रतिदिन एक मुद्रा अपने ऋणदाता को देता हूं। वह हैं मेरे माता पिता। उन्होंने मुझे पाल पोस कर बड़ा किया, मेरे लिए हर कष्ट सहा। दूसरी मुद्रा मैं अपने ग्राहक असामी को देता हूं ,वह हैं मेरे बालक। मैं उन्हें यह ऋण इसलिए देता हूं ताकि मेरे बूढ़े हो जाने पर वह मुझे इसे लौटाएं।

तीसरी मुद्रा मैं अपने मंत्री को देता हूं। भला पत्नी से अच्छा मंत्री कौन हो सकता है, जो राजा को उचित सलाह देता है ,सुख दुख का साथी होता है। चौथी मुद्रा मैं खजाने में देता हूं। पांचवीं मुद्रा का उपयोग स्वयं के खाने पीने पर खर्च करता हूं क्योंकि मैं अथक परिश्रम करता हूं। छठी मुद्रा मैं अतिथि सत्कार के लिए सुरक्षित रखता हूं क्योंकि अतिथि कभी भी किसी भी समय आ सकता है। उसका सत्कार करना हमारा परम धर्म है।’ राजा भोज सोचने लगे, ‘मेरे पास तो लाखों मुद्राएं है पर जीवन के आनंद से वंचित हूं।’ लकड़हारा जाने लगा तो बोला, ‘राजन् मैं पहचान गया था कि तुम राजा भोज हो पर मुझे तुमसे क्या सरोकार।’ भोज दंग रह गए।

 


ब्रह्माकुमारीज् की प्रमुख खबरें -

 

 

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बोध कथा-

विचार की पवित्रता

एक राजा और नगर सेठ में गहरी मित्रता थी। वे रोज एक दूसरे से मिले बिना नहीं रह पाते थे। नगर सेठ चंदन की लकड़ी का व्यापार करता था। एक दिन उसके मुनीम ने बताया कि लकड़ी की बिक्री कम हो गई है। तत्काल सेठ के मन में यह विचार कौंधा कि अगर राजा की मृत्यु हो जाए, तो मंत्रिगण चंदन की लकडि़यां उसी से खरीदेंगे। उसे कुछ तो मुनाफा होगा। शाम को सेठ हमेशा की तरह राजा से मिलने गया। उसे देख राजा ने सोचा कि इस नगर सेठ ने उससे दोस्ती करके न जाने कितनी दौलत जमा कर ली है, ऐसा कोई नियम बनाना होगा जिससे इसका सारा धन राज खजाने में जमा हो जाए।
दोनों इसी तरह मिलते रहे, लेकिन पहले वाली गर्मजोशी नहीं रही। एक दिन नगर सेठ ने पूछ ही लिया, ‘पिछले कुछ दिनों से हमारे रिश्तों में एक ठंडापन आ गया है। ऐसा क्यों?’ राजा ने कहा, ‘मुझे भी ऐसा लग रहा है। चलो, नगर के बाहर जो महात्मा रहते हैं, उनसे इसका हल पूछा जाए।’ उन्होंने महात्मा को सब कुछ बताया। महात्मा ने कहा, ‘सीधी सी बात है। आप दोनों पहले शुद्ध भाव से मिलते रहे होंगे, पर अब संभवत: एक दूसरे के प्रति आप लोगों के मन में कुछ बुरे विचार आ गए हैं इसलिए मित्रता में पहले जैसा सुख नहीं रह गया।’ नगर सेठ और राजा ने अपने-अपने मन की बातें कह सुनाईं। महात्मा ने सेठ से कहा,’ तुमने ऐसा क्यों नहीं सोचा कि राजा के मन में चंदन की लकड़ी का आलीशान महल बनवाने की बात आ जाए? इससे तुम्हारा चंदन भी बिक जाता। विचार की पवित्रता से ही संबंधों में मिठास आती है। तुमने राजा के लिए गलत सोचा इसलिए राजा के मन में भी तुम्हारे लिए अनुचित विचार आया। गलत सोच ने दोनों के बीच दूरी बढ़ा दी। अब तुम दोनों प्रायश्चित करके अपना मन शुद्ध कर लो, तो पहले जैसा सुख फिर से मिलने लगेगा।’ 5  

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विश्व और भारत महत्वपूर्ण दिवस


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8 मई 2012 कोविश्वभरमेंथैलेसीमियादिवसमनायागया

 

 

थैलेसीमिया दिवस: 8 मई


विश्वभर में 8 मई 2012 को थैलेसीमिया दिवस मनाया गया. थैलेसीमिया दिवस का मकसद लोगों को थैलेसीमिया के प्रति जागरूक कराना है. ज्ञातव्य हो कि थैलेसीमिया से ग्रस्त मरीज के खून में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बनतीं. जो बनती भी हैं, वे जल्दी ही खत्म हो जाती हैं. इसके अलावा मरीज का हिमोग्लोबिन स्तर भी कम हो जाता है. यह बीमारी बच्चों में पाई जाती है. सही समय पर उपचार में कमी होने से 15-16 साल की उम्र में मरीज की मौत भी हो सकती है.

 

nt-fam� '"i�G �%oman"; color:black'>अवसर पर हमारे देश ने उन्हें पुनः पुर्नजीवित करने का प्रयास किया जब इस अवसर पर उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया।

 

 

e�Dn-�%�*pt; font-family:"Georgia","serif";mso-bidi-font-family:Georgia;color:black'> प्रभावित होता है. 

इस बीमारी की चपेट में आने के बालिकाओं के मुकाबले बालकों की ज्‍यादा संभावना है. इस बीमारी को पहचानने का कोई निश्चित तरीका ज्ञात नहीं है, लेकिन जल्‍दी निदान हो जाने की स्थिति में सुधार लाने के लिए कुछ किया जा सकता है. दुनियाभर में यह बीमारी पाई जाती है और इसका असर बच्‍चों, परिवारों, समुदाय और समाज पर पड़ता है.

 

 

04 दिसम्बर (अकोला) तनाव मुक्त शिविर. राजयोगीनी ब्रहमाकुमारी गीता बहन, मा. आबू इनके तीन दिवसीय तनावमुक्त शिविर संपन्न हुआ.

 

31 दिसम्बर (गोवा:कोंकण) गीता पाठशाला का शुभारम्भ. नवनिर्मित गीता पाठशाला का उदघाटन संपन्न हुआ.


 

30 दिसम्बर (अमरिका) डा. बीन्नी बहन की अमरिका सेवायात्रा. बीके डा. बीन्नी बहन के राजयोग ध्यानाभ्यास विषयपर विशेष व्याख्यान संपन्न हुए.


 

29 दिसम्बर (फरिदाबाद) प्युचर आफ पावर. भ्राता निझारभाई जुमाभाईजी आयोजित प्युचर आफ पावर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. अतिविशिष्ट व्यक्तियों को राजयोग संदेश दिया गया.


 

 
28 दिसम्बर (मड़गांव:गोवा)
 महिला सशक्तिकरण. ग्रामीण महिला सशक्तिकरण अभियान का सफल आयोजन किया गया जिसका उदघाटन ब्रा.कु. शोभा, बहन बेला नाईक, जज ब्राहमाकुमार भगवान भाई, आबू पर्वत श्रीमती नूतन कामत, बीके सुरेखा बहन इनके शुभकरकमलोद्वारा संपन्न हुआ.


 

 

27 दिसम्बर (शिकागो) डॉ. बीन्नी बहन का शिकागो में व्याख्यान. स्वामी विवेकानंद जयंती के उपलक्ष में बीके डा. बीन्नी बहन का राजयोग ध्यानाभ्यास विषयपर विशेष व्याख्यान संपन्न हुआ.


 

26 दिसम्बर (कोलाबा) स्ट्रेस मॅनेजमेंट शिविर. पश्चिम रेल्वे अधिकारीयों के लिए विशेष स्ट्रेस मॅनेजमेंट शिविर का आयोजन किया गया. जिसमे ब्रा.कु. गायत्री बहन का विशेष व्याख्यान संपन्न हुआ.


25 दिसम्बर (कोंकण:गोवा) सर्व धर्म सम्मेलन संपन्न. स्थानिय सेवाकेंद्र की ओरसे विशेष सर्वधर्म सम्मेलन का विशेष आयोजन किया गया. ब्रा.कु. भगवानभाई माऊंट आबू की विशेष उपस्थितीत थी. ब्रा.कु. शोभा बहनने ई·ारीय संदेश दिया.


24 दिसम्बर (ग्वालियर) योगतपस्या भटटी. महाराजपूर सेवाकेंद्र की औरसे लष्कर सेवाकेंद्र की भाई बहनों की विशेष राजयोग तपस्या योगभट्टी का आयोजन किया गया. ब्रा.कु. राधाबहन, ज्योतीबहनने विशेष अभ्यास करवाया.


23 दिसम्बर (मालाड:मुंबई) मेडिकल कॅम्प का भव्य आयोजन. सेवाकेंद्र कीऔरसे आयोजित भव्य मेडिकल कॅम्प का उदघाटन कुंती बहन, फिल्म एक्टर राहूल राय, कुनीकलाल के शुभहस्तों से किया गया.


22 दिसम्बर (आबू रोड) राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण अभियान. इनर्जी कन्झरवेशन दिवस के उपक्ष में होलिस्टीक अप्रोच टुवर्डस एनर्जी कन्झरवेशन विषयपर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. नई देहली के भ्राता सुनिल सूद, एनर्जी ऑडिटर और संस्थापक अध्यक्ष आयएईएमपी इनकी विशेष उपस्थिती थी.


21 दिसम्बर (कोरबा) विधायक जी का सम्मान. नवनिर्वाचित विधायक भ्राता जयसिंहजी अग्रवाल का विशेष सम्मान स्थानिय सेवाकेंद्र की औरसे बहन रुकमणीजी के किया गया. विधायकजीने ब्राहमाकुमारीज गतिविधीयों पर प्रसन्नता जताई तथा आध्यात्मिक प्रगती के लिए आशावाद जाहिर किया


20 दिसम्बर (पानीपत) मुख्यमंत्री महोदय द्वारा शिलान्यास. हरियाणा के मुख्यमंत्री मा. भ्राता भुपेंदर सिंग हुडा जी के शुभकरकमलोंद्वारा युव्र्हसील पिस ऑडोटोरियम का शिलान्यास संपन्न हुआ. इस अवसपर पर अतिविशिष्ट व्यक्ति उपस्थित थे.


19 दिसम्बर (ब्राज़िल) निर्मलादीदीजी की ब्राज़िल सेवायात्रा. सेलिंग द वेव्ज् आफ पीस एण्ड हेप्पीनेस विषयपर निर्मलादीदीजी का विशेष व्याख्यान फिस्टा शहर में आयोजित किया गया. दीदीजी के ब्रााजील सेवायात्रा में कई व्याख्यान संपन्न हुए.


18 दिसम्बर (आबूरोड) गॉडलिवूड का वेबटीवी चॅनल. गॉडलीवूड.आर्ग वेबपोर्टल पर वेब टीवी का शुभारम्भ किया गया.


17 दिसम्बर (जलगांव:महाराष्ट्र) नार्थ महाराष्ट्र वि·ाविद्यालय में कार्यक्रम. वि·ाविद्यालय के संगीत विभाग में कला तथा सांस्कृतिक प्रभाग के कार्यक्रम संपन्न  हूए


16 दिसम्बर (चोपडा:महाराष्ट्र) कला सांस्कृतिक प्रभाग कार्यक्रम. चोपडा जि. जलगांव में कला एवम सांस्कृतिक प्रभाग के विभिन्न कार्यक्रम संपन्न हुए


15 दिसम्बर (रायपुर छ.ग.) विधायक भ्राता डॉ. रमनसिंजी का सम्मान. विधानसीाा चुनाव में लगातार तीसरी बार विजय प्राप्त करने पर मुख्यमंत्री भ्राता डा. रमनसिंजी का गुलदस्ता भेंट कर सम्मान किया इंदौर ज़ोन की क्षेत्रीय प्रशसिका ब्राहमाकुमारी कमला बहनने.


14 दिसम्बर (सर्वे:गोवा) दवा के साथ दुवा की जरुरुत - भगवान भाई. सर्वे शहर के डाक्टर भाई बहनों के लिए आयोजित विशेष प्रवचन में माऊंट आबू के भगवानभाईने यह बात कही


13 दिसम्बर (ग्वालियर) माइण्ड मॅनेजमेंट प्रोग्राम. गोदरेज कन्झुमर प्रोडक्टस् लि. मालनपूर में बीके प्रल्हाद, बीके ज्योती बहनने माइण्ड मॅनेजमेंट विषयपर कार्यशाला का संचलन किया.


 

 

12 दिसम्बर (देहली) हेपीनेस फारएवर. श्री सत्य साई एन्टरनेशनल सेंटर में आयेजित कार्यक्रम में बीके पीयुश, डा सविता आनंद, बीके पुष्पा जस्टीस सुनील गौर, ज. व्ही ई·ारंा, बीके मृत्युंजय, जेके डाडू, आएएस, आदि ने किया उदघाटन


 

11 दिसम्बर (कोलाबा) रेल अफसरों के लिए तनावमुक्त शिविर. बीके स्वामीनाथन् ने दिया रेल अफसरों को तनावमुक्त जीवन जीने की कला की टिप्स


10 दिसम्बर (पानीपत) महिला शक्तिकरण सम्मेलन. बहन आशा हुडा, उपाध्यक्ष हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद, बीके चक्रधारी बहन, बीके भारतभूषण, बीके सरला, जिला परीषद चेअमर ज्योती जागलान आदियोंं के करकमलोंद्वारा उदघाटन हुआ.


 

 

 

09 दिसम्बर (कुरूक्षेत्र) कर्मोसे मनुष्य महान बनता है. माऊंट आबू से पधारे ब्राहमाकुमार भगवान भाई ने जिला सुधार गृह में संस्कार विषय पर प्रवचन दिया.


 

08 दिसम्बर (सोनीपत:हरियाणा) सरस्वती पब्लिक स्कूल में प्रवचन. माऊंट आबू से पधारे ब्राहमाकुमार भगवान भाई ने नैतिक शिक्षा विषयपर प्रवचन दिया.


07 दिसम्बर (ग्वालियर) भूमिपुजन संपन्न. गोल्डन वल्र्ड रिट्रीट सेंटर स्थित सभागार के डोम का भूमिपूजन बीके अवधेश बहनजी, क्षेत्रीय निर्देशिका, भोपाल क्षेत्रके करकमलोद्वारा संपन्न हु


06 दिसम्बर (पुना) सिक्कीम गर्वनर जी को राजयोग संदेश. महामहिम श्रीनिवास दादासाहेब पाटील को ब्र.कु. दिपकभाई, ब्रा.कु. सोमप्रभाबहन ने ई·ारीय संदेश दिया

 


05 दिसम्बर (करनाल) नैतिक शिक्षा से सर्वांगिण विकास. माऊंट आबू से पधारे ब्राहमाकुमार भगवान भाई ने मधुबन पब्लिक स्कूल में प्रवचन दिया.

 


 

04 दिसम्बर (अकोला) तनाव मुक्त शिविर. राजयोगीनी ब्रहमाकुमारी गीता बहन, मा. आबू इनके तीन दिवसीय तनावमुक्त शिविर संपन्न हुआ.

 


 

01 दिसम्बर (युरोप) शिलू बहन की युरोप यात्रा.


 

8 सितम्बर (ज्ञानसरोंवर) आर्ट कल्चर विंग सम्मेलनसंपन्न. कला सांस्कृतिक प्रभाग की रजत जयंती के उपलक्ष में राष्ट्रीय सम्मेलनसंपन्न हुआ. दादी जानकीजी, दादी ह्मदयमोहिनीजी, रमेशभाई, मोहिनी बहन, मुन्नती बहन, कुसूम बहन बॉलीवूड स्टार क्रीस्टना, बॉलीवूड स्टार रती अग्नीहोत्री, चंकीपांडे ने उदघाटन किया.

31 अगस्त (रशिया) स्वतंत्रता दिवस मनाया गया.ाारतीय मूल निवासीयोंने भारतीय स्वतंत्रता दिवस मनया तथा इस अवसपर पर भ्राता गांधी, सेंट पिटर्सबर्ग में भारत के कॉन्सील को राखी बांधी गई.

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