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31-12-07

31-12-07   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन


“नये वर्ष में अखण्ड महादानी, अखण्ड निर्विघ्न, अखण्ड योगी और सदा सफलतामूर्त बनना’’

आज बापदादा अपने सामने डबल सभा को देख रहे हैं। एक तो साकार में सम्मुख बैठे हैं और दूसरे दूर बैठे भी दिल के समीप दिखाई दे रहे हैं। दोनों सभाओं की श्रेष्ठ आत्माओं के मस्तक में आत्म दीप चमक रहा है। कितना सुन्दर चमकता हुआ नजारा है। इतने सब एक संकल्प, एकरस स्थिति में स्थित परमात्म प्यार में लवलीन एकाग्र बुद्धि से स्नेह में समाये हुए कितने प्यारे लग रहे हैं। आप सभी भी आज विशेष नया वर्ष मनाने के लिए पहुंच गये हो। बापदादा भी सभी बच्चों का उमंग-उत्साह देख चमकते हुए आत्म दीप को देख हर्षित हो रहे हैं।

आज का दिन संगम का दिन है। एक वर्ष की पुराने की विदाई है और नये वर्ष की बधाई होने वाली है। नया वर्ष अर्थात् नया उमंग और उत्साह, स्व परिवर्तन का उमंग है, सर्व प्राप्तियों को स्वयं में प्राप्त देख दिल में उत्साह है। दुनिया वाले भी यह उत्सव मनाते हैं, उन्हों के लिए एक दिन का उत्सव है और आप लकी लवली बच्चों के लिए संगमयुग का हर दिन उत्सव है क्योंकि खुशी का उत्साह है। दुनिया वाले तो बुझे हुए दीपक को जलाके वर्ष मनाते हैं और बापदादा और आप इतने सारे चारों ओर के जगे हुए दीपकों के साथ नया वर्ष का उत्सव मनाने आये हैं। यह तो रीति रसम मनाने की निमित्त मात्र करते हो लेकिन आप सभी जगे हुए दीपक हो। अपना चमकता हुआ दीप दिखाई देता है ना! जो अविनाशी दीप है।

तो नये वर्ष में हर एक ने दिल में स्व प्रति, विश्व की आत्माओं प्रति कोई नया प्लैन बनाया है? 12 बजे के बाद नया वर्ष शुरू हो जायेगा तो इस वर्ष को विशेष किस रूप में मनायेंगे? जैसे पुराना वर्ष विदाई लेगा तो आप सबने भी पुराने संकल्प, पुराने संस्कार उन्हों को विदाई देने का संकल्प किया? वर्ष के साथ-साथ आप भी पुराने को विदाई दे नये उमंग-उत्साह के संकल्पों को प्रैक्टिकल में लायेंगे ना! तो सोचो अपने में क्या नवीनता लायेंगे? कौन से नये उमंग-उत्साह की लहर फैलायेंगे? कौन से विशेष संकल्प का वायब्रेशन फैलायेंगे? सोचा है? क्योंकि आप सभी ब्राह्मण सारे विश्व की आत्माओं के लिए परिवर्तन निमित्त आत्मायें हो। विश्व के फाउण्डेशन हो, पूर्वज हो, पूज्य हो। तो इस वर्ष अपनी श्रेष्ठ वृत्ति द्वारा क्या वायब्रेशन फैलायेंगे? जैसे प्रकृति चारों ओर कभी गर्मी का, कभी सर्दी का, कभी बहार का वायब्रेशन फैलाती है। तो आप प्रकृति के मालिक प्रकृतिजीत कौन सा वायब्रेशन फैलायेंगे? जिससे आत्माओं को थोड़े समय के लिए भी सुख-चैन का अनुभव हो। इसके लिए बापदादा यही इशारा दे रहे हैं कि जो भी खज़ाने प्राप्त हुए हैं उन खज़ानों को सफल करो और सफलता स्वरूप बनो। विशेष समय का खज़ाना कभी भी व्यर्थ न जाये। एक सेकण्ड भी व्यर्थ को कार्य में लगाओ। समय को सफल करो, हर श्वांस को सफल करो, हर संकल्प को सफल करो, हर शक्ति को सफल करो, हर गुण को सफल करो। सफलतामूर्त बनने का यह विशेष वर्ष मनाओ क्योंकि सफलता आपका जन्म सिद्ध अधिकार है। उस अधिकार को अपने कार्य में लगाए सफलतामूर्त बनो क्योंकि अब की सफलता आपके अनेक जन्म साथ रहने वाली है। आपके समय सफलता का प्रालब्ध पूरा आधाकल्प सफलता का फल प्राप्त होगा। अब के समय की सफलता का प्रालब्ध पूरा समय ही प्राप्त होगा। श्वांस को सफल करने से भविष्य में भी देखो आपके श्वांस सफलता का परिणाम भविष्य में सभी आत्मायें पूरा समय स्वस्थ रहती हैं। बीमारी का नाम नहीं। डाक्टर्स की डिपार्टमेंट ही नहीं क्योंकि डाक्टर्स क्या बन जायेंगे? राजा बन जायेंगे ना! विश्व के मालिक बन जायेंगे। लेकिन इस समय आप श्वांस सफल करते हो और सर्व आत्माओं को स्वस्थ रहने का प्रालब्ध प्राप्त होता है। ऐसे ही ज्ञान का खज़ाना,उसका फल स्वरूप स्वर्ग में आपके अपने राज्य में इतने समझदार, शक्तिवान बन जाते जो वहाँ कोई वजीर से राय लेने की आवश्यकता नहीं, स्वयं ही समझदार शक्तिवान होते हैं। शक्तियों को सफल करते हो, उसकी प्रालब्ध वहाँ सब शक्तियां विशेष धर्म सत्ता, राज्य सत्ता दोनों ही विशेष शक्तियां, सत्तायें वहाँ प्राप्त होंगी। गुणों का खज़ाना सफल करते हो तो उसकी प्रालब्ध देवता पद का अर्थ ही है दिव्यगुणधारी और साथ-साथ अभी लास्ट जन्म में आपकी जड़ मूर्ति का पूजन करते हैं तो क्या महिमा करते हैं? सर्वगुण सम्पन्न। तो इस समय की सफलता का प्रालब्ध स्वत: ही प्राप्त हो जाती। इसलिए चेक करो खज़ाने मिले, खज़ानों से सम्पन्न हुए हैं लेकिन स्व प्रति वा विश्व प्रति कितना सफल किया? पुराने वर्ष को विदाई देंगे तो पुराने वर्ष में क्या जमा खज़ाना सफल किया, कितना किया? यह चेक करना और आने वाले वर्ष में भी इन खज़ानों को व्यर्थ के बजाए सफल करना ही है। एक सेकण्ड भी और कोई खज़ाना भी व्यर्थ न जाये। पहले बताया है कि संगम समय का सेकण्ड, सेकण्ड नहीं है वर्ष के बराबर है। ऐसे नहीं समझना एक सेकण्ड,एक मिनट ही तो गया, व्यर्थ जाना इसको ही अलबेलापन कहा जाता है। आप सबका लक्ष्य है कि बाप ब्रह्मा समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना है। तो ब्रह्मा बाप ने सर्व खज़ाने आदि से अन्तिम दिन तक सफल किया, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखा। सम्पूर्ण फरिश्ता बन गया। अपनी प्यारी दादी को भी देखा सफल किया और औरों को भी सफल करने का सदा उमंग उत्साह बढ़ाया। तो ड्रामानुसार विशेष विश्व सेवा के अलौकिक पार्ट के निमित्त बनी।

तो इस वर्ष, कल से हर दिन अपना चार्ट रखना - सफल और व्यर्थ... क्या हुआ कितना हुआ? अमृतवेले ही दृढ़ संकल्प करना, स्मृति स्वरूप बनना कि सफलता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है। सफलता मेरे गले का हार है। सफलता स्वरूप ही समान बनना है। ब्रह्मा बाप से प्यार है ना। तो ब्रह्मा बाप का सबसे ज्यादा प्यार किससे था? जानते हो? किससे प्यार था? मुरली से। लास्ट दिन भी मुरली का पाठ मिस नहीं किया। समान बनने में यह चेक करना - ब्रह्मा बाप का जिससे प्यार रहा, ब्रह्मा बाप के प्यार का सबूत है - जिससे बाप का प्यार था उससे मेरा प्यार स्वत: ही सहज होना चाहिए। ब्रह्मा बाप की और विशेषता क्या रही?सदा अलर्ट, अलबेलापन नहीं। लास्ट दिन भी कितना अलर्ट रूप में अपने सेवा का पार्ट बजाया। शरीर कमज़ोर होते भी कैसे अलर्ट होके, आधार लेके नहीं बैठे और अलर्ट करके गये। तीन बातों का मन्त्र देके गये। याद है ना सबको। तो जितना अलर्ट रहेंगे, फॉलो करेंगे, अलबेलापन खत्म होगा। अलबेलेपन के विशेष बोल बापदादा बहुत सुनते रहते हैं। जानते हो ना! अगर इन तीन शब्दों को (निराकारी, निर्विकारी और निरंहकारी) सदा अपने मन में रिवाइज और रियलाइज करते चलो तो आटोमेटिकली सहज और स्वत: समान बन ही जायेंगे। तो एक बात सफल करो सफलतामूर्त बनो।